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सुना है क्या: धरी रह गईं नोटशीट की कहानी, साथ ही 'दिखने लगे गुनाह और चुस्त महकमे में सुस्त फाइलों' के किस्से

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 20 Apr 2026 10:07 AM IST
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सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

suna hai kya saga of note sheets has come to naught alongside tales of crimes coming to light
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'धरी रह गईं माननीयों की नोटशीट' की कहानी। इसके अलावा 'टेंपर्ड ग्लास से दिखने लगे गुनाह' और 'चुस्त महकमे में सुस्त फाइलें' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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धरी रह गईं माननीयों की नोटशीट

आधी आबादी के मुद्दे पर हुई प्रेसवार्ता में एकता दिखाने के लिए बुलाया तो गया था सभी घटक दलों के माननीयों को लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला। हालांकि, माननीयों की तैयारी में कोई कमी नहीं थी। उन्होंने पूरी तन्मयता से हर बिंदु पर नोट बनाए थे, ताकि मौका मिलेगा तो बांचेंगे भी। उनकी बोलने की बेताबी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि घटक दलों के सभी माननीय मंच पर मुखिया के संबोधन पर कम और अपने नोट तैयार करने में ज्यादा मशगूल दिखे। उन्हें भरोसा था कि बार-बार घटक दलों की एकता की बात हो रही है तो बोलने का मौका भी मिलेगा, लेकिन उनके हिस्से आई सिर्फ निराशा। लिहाजा प्रेसवार्ता खत्म होने की घोषणा होते ही सभी माननीय मन मसोस कर निकल गए।

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टेंपर्ड ग्लास से दिखने लगे गुनाह

एक जिले में डीएम पर तहसीलदार ने घूस के आरोप क्या जड़े, हमेशा की तरह ''आई एम सेफ'' बिरादरी ने तहसीलदार को ही गुनहगार बताकर निपटाने की तैयारी कर ली। सारा मामला सही चल रहा था लेकिन फोन पर टेंपर्ड ग्लास लगाकर देने की मांग वाली ऑडियो क्लिप ने साहब की बेगुनाही से पर्दा हटा दिया। ऑडियो में पौने दो लाख के आईफोन के साथ टेंपर्ड ग्लास भी लगवाने का लालच उन पर भारी पड़ गया। खैर बड़े लोग हर फन के माहिर होते हैं। कुछ दिन में ऑडियो भी टेंपर्ड बताया जाएगा। फिर सारी कायनात मिलकर भी साहब का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी।

चुस्त महकमे में सुस्त फाइलें

जीव-जंतु से जुड़े प्रोजेक्ट्स आगे ही नहीं बढ़ रहे हैं। इम्पैक्ट स्टडी के नाम पर हर प्रोजेक्ट अटका हुआ है। ऊपर वालों ने हाल ही में इन प्रोजेक्ट्स से जुड़ी मैडम को बुलाकर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर दी है। दरअसल, बताया जा रहा है कि मैडम कोई भी निर्णय खुद लेने के बजाय नीचे वालों के बीच ही फाइल घुमाती रहती हैं। नीचे वालों ने ही ऊपर तक कानाफूसी कर दी है कि मैडम एक-दो अफसरों पर ज्यादा भरोसा करती हैं। वे जो कहते हैं, सिर्फ उसी को फाइल पर लाती हैं।

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