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Lucknow News: चिकित्सा-अभिनय के क्षेत्र में बढ़ा शहर का नाम
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डॉ अनिल रस्तोगी, डॉ डॉ. केवल कृष्ण ठकुराल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
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लखनऊ। चिकित्सा व कला क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए राजधानी की तीन शख्सियतों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। इनमें केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष टीबी चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रसाद और राजकीय आयुर्वेद कॉलेज टुडियागंज के पूर्व प्राचार्य डॉ. केवल कृष्ण ठकुराल शामिल हैं। इनके साथ ही शहर के मशहूर रंगकर्मी, वैज्ञानिक और फिल्म अभिनेता डॉ. अनिल रस्तोगी के नाम की भी घोषणा की गई है।
जाने-माने टीबी चेस्ट विशेषज्ञ हैं डॉ. राजेंद्र प्रसाद
पद्मश्री सम्मान के लिए चुने गए डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजधानी के जाने-माने टीबी चेस्ट विशेषज्ञ हैं। वह केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के छात्र और विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। उनके नाम की घोषणा होते ही घर-परिवार के साथ केजीएमयू में खुशी की लहर दौड़ गई।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि यह सम्मान पाकर गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने घर-परिवार के साथ केजीएमयू को यह सम्मान समर्पित किया। डॉ. राजेंद्र का जन्म वर्ष 1950 में बस्ती के मुंडेरवा कस्बे में हुआ था। प्रारंभिक पढ़ाई मुंडेरवा से करने के बाद खलीलाबाद से हाईस्कूल और लखनऊ के क्रिश्चियन कॉलेज से इंटर की पढ़ाई की। वर्ष 1970 में केजीएमयू में एमबीबीएस में प्रवेश लिया। इसके बाद यहीं से एमडी की पढ़ाई की। वर्ष 1984 में शिक्षक के रूप में केजीएमयू से जुड़े। इसके बाद यहीं रेस्पिररेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष बने।
डॉ. राजेद्र प्रसाद ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय गोपीचंद कपड़े के व्यापारी और मां स्वर्गीय विजय लक्ष्मी गृहिणी थीं। बेटा डॉ. निखित गुप्ता लोहिया संस्थान में मेडिसिन विभाग में शिक्षक हैं। बेटी पल्लवी की शादी हो चुकी है। उन्होंने यहां तक पहुंचने में पत्नी मीरा गुप्ता और परिवार को श्रेय दिया।
राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ठकराल को मिला पद्मश्री
पद्श्री सम्मान के लिए चुने जाने पर राजकीय आयुर्वेद कॉलेज टुडियागंज के पूर्व प्राचार्य डॉ. केवल कृष्ण ठकुराल ने खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि पिता के अलाव तीन भाई भी डॉक्टर हैं। उनकी प्रेरणा से आयुर्वेद डॉक्टर बना। डॉ. ठकुराल ने बताया कि टुड़ियागंज के राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में वर्ष 1964 में बीएएमएस में दाखिला लिया। राजाजीपुरम के ई ब्लॉक के मकान नंबर ई-1904 में रहने वाले डॉ. केके ठकराल ने बताया कि लेक्चरर से आयुर्वेद कॉलेजों में प्राचार्य और निदेशक तक का सफर तय किया। वर्ष 1996 में रिटायर हो गए। उन्होंने 66 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए, जिसमें से 54 भारत और 12 विदेशों में प्रकाशित हुए। शल्य तंत्र के सिद्धांत समेत कई पुस्तकें लिखीं। क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा में विशेषज्ञता से जुड़ी पुस्तक का प्रकाशन अंग्रेजी में हुआ। डॉ. ठकराल को वर्ष 1991 में आयुर्वेद रत्नाकर अवॉर्ड, वर्ष 1992 में आयुर्वेद बृहस्पति अवॉर्ड, वर्ष 2010 में राष्ट्रीय हर्बल संरक्षण पुरस्कार जैसे कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ नई दिल्ली 2001 फेलोशिप भी मिल चुकी हैं।
इतना आसान नहीं होता डॉ. अनिल रस्तोगी होना...
83 वर्ष की उम्र, सौ नाटकों में बतौर अभिनेता करीब एक हजार मंचन, 75 से अधिक फिल्में और 14 से अधिक वेब सीरीज और टीवी धारावाहिकों में अभिनय। इतनी उपलब्धियों के बावजूद सरल, सहज और सर्वसुलभ होना इतना आसान नहीं होता। डॉ. अनिल रस्तोगी को लखनऊ जान से प्यारा है और लखनऊ भी उनका उतना ही मुरीद है। उन्हें पद्मश्री सम्मान दिए जाने की सूचना मिली तो शहरवासी खुशी से झूम उठे। सीडीआरआई में वैज्ञानिक रहे अनिल ने दर्पण नाट्य समूह से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि दर्शकों के प्यार के साथ मेरे काम को सरकार ने भी सम्मान दिया, यह बेहद खुशी की बात है। मेरी अब तक की यात्रा में पत्नी सुधा रस्तोगी का बड़ा योगदान रहा है। डॉ. अनिल रस्तोगी को यश भारती-2017, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार-2023, पाटलिपुत्र लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड-2024, अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय शलाका सम्मान-2026, कालिदास सम्मान मिल चुका है।
पांच वर्षों में लखनऊ के हिस्से आए 13 पद्म पुरस्कार
बीते पांच वर्षों में राजधानी के हिस्से 13 पद्म पुरस्कार आए। इनमें से तीन वर्ष के दौरान 10 पुरस्कार मिले। 2025 में डॉ. सोनिया नित्यानंद- चिकित्सा, हृदय नारायण दीक्षित- साहित्य एवं शिक्षा, सत्यपाल सिंह-खेल को पद्म पुरस्कार से नवाजा गया था। 2024 में चार विभूतियों को यह सम्मान मिला, जिनमें प्रो. आरके धीमन- निदेशक एसजीपीजीआई, गौरव खन्ना, नसीम बानो और नवजीवन रस्तोगी शामिल रहे। 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मरणोपरांत पद्मविभूषण और साहित्यकार डॉ. विद्याविंदु सिंह को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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जाने-माने टीबी चेस्ट विशेषज्ञ हैं डॉ. राजेंद्र प्रसाद
पद्मश्री सम्मान के लिए चुने गए डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजधानी के जाने-माने टीबी चेस्ट विशेषज्ञ हैं। वह केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के छात्र और विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। उनके नाम की घोषणा होते ही घर-परिवार के साथ केजीएमयू में खुशी की लहर दौड़ गई।
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि यह सम्मान पाकर गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने घर-परिवार के साथ केजीएमयू को यह सम्मान समर्पित किया। डॉ. राजेंद्र का जन्म वर्ष 1950 में बस्ती के मुंडेरवा कस्बे में हुआ था। प्रारंभिक पढ़ाई मुंडेरवा से करने के बाद खलीलाबाद से हाईस्कूल और लखनऊ के क्रिश्चियन कॉलेज से इंटर की पढ़ाई की। वर्ष 1970 में केजीएमयू में एमबीबीएस में प्रवेश लिया। इसके बाद यहीं से एमडी की पढ़ाई की। वर्ष 1984 में शिक्षक के रूप में केजीएमयू से जुड़े। इसके बाद यहीं रेस्पिररेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष बने।
डॉ. राजेद्र प्रसाद ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय गोपीचंद कपड़े के व्यापारी और मां स्वर्गीय विजय लक्ष्मी गृहिणी थीं। बेटा डॉ. निखित गुप्ता लोहिया संस्थान में मेडिसिन विभाग में शिक्षक हैं। बेटी पल्लवी की शादी हो चुकी है। उन्होंने यहां तक पहुंचने में पत्नी मीरा गुप्ता और परिवार को श्रेय दिया।
राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ठकराल को मिला पद्मश्री
पद्श्री सम्मान के लिए चुने जाने पर राजकीय आयुर्वेद कॉलेज टुडियागंज के पूर्व प्राचार्य डॉ. केवल कृष्ण ठकुराल ने खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि पिता के अलाव तीन भाई भी डॉक्टर हैं। उनकी प्रेरणा से आयुर्वेद डॉक्टर बना। डॉ. ठकुराल ने बताया कि टुड़ियागंज के राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में वर्ष 1964 में बीएएमएस में दाखिला लिया। राजाजीपुरम के ई ब्लॉक के मकान नंबर ई-1904 में रहने वाले डॉ. केके ठकराल ने बताया कि लेक्चरर से आयुर्वेद कॉलेजों में प्राचार्य और निदेशक तक का सफर तय किया। वर्ष 1996 में रिटायर हो गए। उन्होंने 66 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए, जिसमें से 54 भारत और 12 विदेशों में प्रकाशित हुए। शल्य तंत्र के सिद्धांत समेत कई पुस्तकें लिखीं। क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा में विशेषज्ञता से जुड़ी पुस्तक का प्रकाशन अंग्रेजी में हुआ। डॉ. ठकराल को वर्ष 1991 में आयुर्वेद रत्नाकर अवॉर्ड, वर्ष 1992 में आयुर्वेद बृहस्पति अवॉर्ड, वर्ष 2010 में राष्ट्रीय हर्बल संरक्षण पुरस्कार जैसे कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ नई दिल्ली 2001 फेलोशिप भी मिल चुकी हैं।
इतना आसान नहीं होता डॉ. अनिल रस्तोगी होना...
83 वर्ष की उम्र, सौ नाटकों में बतौर अभिनेता करीब एक हजार मंचन, 75 से अधिक फिल्में और 14 से अधिक वेब सीरीज और टीवी धारावाहिकों में अभिनय। इतनी उपलब्धियों के बावजूद सरल, सहज और सर्वसुलभ होना इतना आसान नहीं होता। डॉ. अनिल रस्तोगी को लखनऊ जान से प्यारा है और लखनऊ भी उनका उतना ही मुरीद है। उन्हें पद्मश्री सम्मान दिए जाने की सूचना मिली तो शहरवासी खुशी से झूम उठे। सीडीआरआई में वैज्ञानिक रहे अनिल ने दर्पण नाट्य समूह से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि दर्शकों के प्यार के साथ मेरे काम को सरकार ने भी सम्मान दिया, यह बेहद खुशी की बात है। मेरी अब तक की यात्रा में पत्नी सुधा रस्तोगी का बड़ा योगदान रहा है। डॉ. अनिल रस्तोगी को यश भारती-2017, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार-2023, पाटलिपुत्र लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड-2024, अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय शलाका सम्मान-2026, कालिदास सम्मान मिल चुका है।
पांच वर्षों में लखनऊ के हिस्से आए 13 पद्म पुरस्कार
बीते पांच वर्षों में राजधानी के हिस्से 13 पद्म पुरस्कार आए। इनमें से तीन वर्ष के दौरान 10 पुरस्कार मिले। 2025 में डॉ. सोनिया नित्यानंद- चिकित्सा, हृदय नारायण दीक्षित- साहित्य एवं शिक्षा, सत्यपाल सिंह-खेल को पद्म पुरस्कार से नवाजा गया था। 2024 में चार विभूतियों को यह सम्मान मिला, जिनमें प्रो. आरके धीमन- निदेशक एसजीपीजीआई, गौरव खन्ना, नसीम बानो और नवजीवन रस्तोगी शामिल रहे। 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मरणोपरांत पद्मविभूषण और साहित्यकार डॉ. विद्याविंदु सिंह को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

डॉ अनिल रस्तोगी, डॉ डॉ. केवल कृष्ण ठकुराल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद।

डॉ अनिल रस्तोगी, डॉ डॉ. केवल कृष्ण ठकुराल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
