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Lucknow News: अस्पताल में भर्ती मां पूछती रही... बिटिया राज्यपाल के हाथों से मेडल क्यों नहीं मिला

Sat, 01 Aug 2026 02:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 02:54 AM IST
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The hospitalized mother kept asking... "Daughter, why didn't you receive the medal from the Governor?"
राजनीति शास्त्र विभाग से परास्नातक प्रज्ञा सिंह
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के 69वें दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक मेडल जीतने वाले कई मेधावियों के लिए खुशी अधूरी रह गई। वर्षों की मेहनत के बाद गोल्ड मेडल तो मिले, लेकिन कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हाथों मुख्य मंच पर सम्मान पाने का सपना पूरा नहीं हो सका। सबसे मार्मिक पल तब आया, जब अस्पताल में भर्ती एक मां बार-बार फोन कर अपनी बेटी से मंच पर सम्मान की तस्वीर मांगती रही, लेकिन बेटी के पास दिखाने के लिए कोई तस्वीर नहीं थी।
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राजनीति शास्त्र विभाग से परास्नातक प्रज्ञा सिंह ने नरेंद्र माधव स्वर्ण, बांग्ला नैषमा स्वर्ण, डीएन समल स्मृति स्वर्ण, गोपीनाथ धवन स्वर्ण और प्रो. निरुपमा मिश्रा स्वर्ण पदक सहित पांच स्वर्ण पदक हासिल किए। प्रज्ञा ने बताया कि उनकी मां गंभीर रूप से बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती थीं। उन्हें बताया गया था कि कुलाधिपति के हाथों सम्मान मिलेगा, जिसे लेकर मां बेहद उत्साहित थीं। लेकिन समारोह से पहले ही सुबह सात बजे पदक दे दिए गए। अस्पताल से मां लगातार मंच पर सम्मान की तस्वीर मांगती रहीं, लेकिन वह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
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एमए की छात्रा अंशिका सिंह ने सर्वाधिक नौ मेडल हासिल किए। उन्होंने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर धोखा देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि उन्हें भी सुबह सात बजे ही पदक दे दिए गए और बताया गया कि कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के पास समय नहीं है। अंशिका ने कहा, अगर इस तरह मेडल देना था तो इससे अच्छा था हमारे मेडल घर ही भिजवा देते।
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एलएलबी तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के छात्र शिखर को भी नौ स्वर्ण पदक मिले। उन्होंने भी मंच से सम्मान न मिलने पर निराशा जताई। उन्होंने बताया कि उनके पिता अजय पाल प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं और मां पुष्पा देवी गृहिणी हैं। दोनों बेटे को मंच पर सम्मानित होते देखने की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

नियमित पढ़ाई बनी सफलता की कुंजी
चांसलर गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले स्वराज शुक्ला ने बताया कि नियमित अध्ययन ही उनकी सफलता का आधार रहा। उन्होंने कहा कि पांच वर्षीय एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब उनका लक्ष्य पीसीएस-जे की तैयारी कर न्यायिक सेवा में जाना है। उन्हें सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी के रूप में चांसलर मेडल और दो अन्य गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

खुद के नोट्स ने दिलाया स्वर्ण पदक
पांच वर्षीय बीए-एलएलबी पाठ्यक्रम की छात्रा शैलजा सिंह को डॉ. चक्रवर्ती स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि नियमित अध्ययन, बार एक्ट, केस लॉ और स्वयं तैयार किए गए नोट्स उनकी सफलता का आधार बने।


अब सेना में जाकर करना है देश की सेवा
बीए (अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र) की छात्रा श्रुति कुमारी को ''वाइस चांसलर गोल्ड मेडल फॉर द बेस्ट एनसीसी'' से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से उन्हें बेहद खुशी मिली है। उनका लक्ष्य भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना है।

राजनीति शास्त्र विभाग से परास्नातक प्रज्ञा सिंह

राजनीति शास्त्र विभाग से परास्नातक प्रज्ञा सिंह

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