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Lucknow News: भारतीय ज्ञान परंपरा जलवायु संकट के समाधान में सहायक
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 28 Apr 2026 07:54 PM IST
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अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने बारह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम के तीसरे दिन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का विषय सतत पर्यावरण प्रबंधन भारतीय ज्ञान प्रणाली, नीतिगत ढांचा और तकनीकी नवाचारों का एकीकरण है। पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. चौधरी ने जलवायु परिवर्तन के शमन और अनुकूलन में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका विषय पर अपनी प्रस्तुति दी।
उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में वैदिक विज्ञान, आयुर्वेद, योग, सांख्य दर्शन और लोक परंपराएं शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन की गंभीरता और पारंपरिक पारिस्थितिकी ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों में प्रचलित पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों के उदाहरण दिए, जो आज भी सतत जल प्रबंधन के लिए प्रभावी हैं। डॉ. चौधरी ने बिश्नोई समुदाय, बीज बचाओ आंदोलन और चिपको आंदोलन जैसे उदाहरणों से स्थानीय समुदायों की भागीदारी के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने जनजातीय वन अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया। अंत में आयोजकों द्वारा मुख्य वक्ता के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा प्रतिभागियों को आगामी सत्रों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
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उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में वैदिक विज्ञान, आयुर्वेद, योग, सांख्य दर्शन और लोक परंपराएं शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन की गंभीरता और पारंपरिक पारिस्थितिकी ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों में प्रचलित पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों के उदाहरण दिए, जो आज भी सतत जल प्रबंधन के लिए प्रभावी हैं। डॉ. चौधरी ने बिश्नोई समुदाय, बीज बचाओ आंदोलन और चिपको आंदोलन जैसे उदाहरणों से स्थानीय समुदायों की भागीदारी के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने जनजातीय वन अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया। अंत में आयोजकों द्वारा मुख्य वक्ता के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा प्रतिभागियों को आगामी सत्रों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
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