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Lucknow News: चारबाग रेलवे स्टेशन के तीन प्रोजेक्ट छह साल बाद भी नहीं हो सके पूरे
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चारबाग रेलवे स्टेशन।
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लखनऊ। चारबाग रेलवे स्टेशन के तीन प्रमुख प्रोजेक्ट छह साल बाद भी पूरे नहीं हो सके हैं। रेलवे अधिकारियों का पूरा ध्यान स्टेशन के अपग्रेडेशन पर है। इस कारण रूट रिले इंटरलॉकिंग, फोरलेन आउटर और सेफ्टी सिक्योरिटी के प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो पाया है।
चारबाग रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 180 से अधिक ट्रेनों से सवा लाख से ज्यादा यात्री आते-जाते हैं। यहां 40 साल पुरानी सिग्नलिंग व्यवस्था को बदलने के लिए लॉकडाउन से पहले रूट रिले इंटरलॉकिंग कार्य शुरू हुआ था। कानपुर जाने वाली दिशा में आरआरआई भवन भी बनाया गया, लेकिन यह अधूरा है। आरआरआई का काम पूरा न होने से सिग्नलिंग व्यवस्था पुरानी ही है। चूहे तारों को कुतर देते हैं, जिससे ट्रेनें रुक जाती हैं।
ऐसे ही स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए आठ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट बनाए गए थे। इनमें ड्रोन से निगरानी, एचडी सीसीटीवी, मेटल डोर डिटेक्टर और लगेज स्कैनर की संख्या बढ़ानी थी। यह काम भी अटक गया है।
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आउटर पर ट्रेनों के रुकने की समस्या खत्म करने के लिए फोरलेन आउटर बनाने की योजना थी। चारबाग से दिलकुशा और आलमनगर आउटर के लिए दो रेल लाइनों को बढ़ाकर चार करना था। यह काम भी शुरू हुआ, पर अभी तक पूरा नहीं हुआ। इससे ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है।
देरी का कारण
सूत्रों के अनुसार, आरआरआई और फोरलेन आउटर का काम शुरू होने के बाद रेलवे लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आरएलडीए) ने चारबाग स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने का काम शुरू कर दिया। आरएलडीए ने सेकंड एंट्री पर निर्माण कार्य कराए। हालांकि, अपग्रेडेशन कार्य भी धीमा है, लेकिन इसकी वजह से अन्य प्रोजेक्ट देरी के शिकार हो गए।
कोचिंग कॉम्प्लेक्स का इंतजार
चारबाग स्टेशन पर वंदे भारत ट्रेनों की मेंटेनेंस के लिए करोड़ों रुपये की लागत से कोचिंग कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। यह बनकर तैयार है, लेकिन इसका उद्घाटन बाकी है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि कॉम्प्लेक्स की कमीशनिंग बाकी है, जिससे वंदे भारत ट्रेनों की मेंटेनेंस यहां ठीक से नहीं हो पा रही है।
Iचारबाग स्टेशन पर अपग्रेडेशन का कार्य चल रहा है। इसके साथ ही आरआरआई और फोरलेन आउटर का काम जल्द पूरा किया जाएगा। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, सीपीआरओ, उत्तर रेलवेI
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चारबाग रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 180 से अधिक ट्रेनों से सवा लाख से ज्यादा यात्री आते-जाते हैं। यहां 40 साल पुरानी सिग्नलिंग व्यवस्था को बदलने के लिए लॉकडाउन से पहले रूट रिले इंटरलॉकिंग कार्य शुरू हुआ था। कानपुर जाने वाली दिशा में आरआरआई भवन भी बनाया गया, लेकिन यह अधूरा है। आरआरआई का काम पूरा न होने से सिग्नलिंग व्यवस्था पुरानी ही है। चूहे तारों को कुतर देते हैं, जिससे ट्रेनें रुक जाती हैं।
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ऐसे ही स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए आठ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट बनाए गए थे। इनमें ड्रोन से निगरानी, एचडी सीसीटीवी, मेटल डोर डिटेक्टर और लगेज स्कैनर की संख्या बढ़ानी थी। यह काम भी अटक गया है।
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आउटर पर ट्रेनों के रुकने की समस्या खत्म करने के लिए फोरलेन आउटर बनाने की योजना थी। चारबाग से दिलकुशा और आलमनगर आउटर के लिए दो रेल लाइनों को बढ़ाकर चार करना था। यह काम भी शुरू हुआ, पर अभी तक पूरा नहीं हुआ। इससे ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है।
देरी का कारण
सूत्रों के अनुसार, आरआरआई और फोरलेन आउटर का काम शुरू होने के बाद रेलवे लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आरएलडीए) ने चारबाग स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने का काम शुरू कर दिया। आरएलडीए ने सेकंड एंट्री पर निर्माण कार्य कराए। हालांकि, अपग्रेडेशन कार्य भी धीमा है, लेकिन इसकी वजह से अन्य प्रोजेक्ट देरी के शिकार हो गए।
कोचिंग कॉम्प्लेक्स का इंतजार
चारबाग स्टेशन पर वंदे भारत ट्रेनों की मेंटेनेंस के लिए करोड़ों रुपये की लागत से कोचिंग कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। यह बनकर तैयार है, लेकिन इसका उद्घाटन बाकी है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि कॉम्प्लेक्स की कमीशनिंग बाकी है, जिससे वंदे भारत ट्रेनों की मेंटेनेंस यहां ठीक से नहीं हो पा रही है।
Iचारबाग स्टेशन पर अपग्रेडेशन का कार्य चल रहा है। इसके साथ ही आरआरआई और फोरलेन आउटर का काम जल्द पूरा किया जाएगा। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, सीपीआरओ, उत्तर रेलवेI

चारबाग रेलवे स्टेशन।