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UP: एआई से जाम पर 'लगाम', आरटीसी योजना से सातों कमिश्नरेटों में ट्रैफिक कंजेशन घटा; जानिए कैसे करता वर्क

Fri, 17 Jul 2026 07:44 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Fri, 17 Jul 2026 07:44 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश पुलिस की एआई आधारित आरटीसी योजना से सातों पुलिस कमिश्नरेट में यातायात जाम में उल्लेखनीय कमी आई है। प्रयागराज में सबसे अधिक 44.92% और लखनऊ में 13.67% सुधार दर्ज हुआ। योजना का विस्तार अन्य जिलों में भी किया जा रहा है, हालांकि वीआईपी मूवमेंट अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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UP: AI curbs traffic jams; RTC scheme reduces congestion across all seven commissionerates—here’s how it works
AI Camera - फोटो : istock

विस्तार

प्रदेश पुलिस की आरटीसी (रिड्यूसिंग ट्रैफिंक कंजेशन) योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सातों कमिश्नरेट में जाम से निजात मिलना शुरू हो गया है। डीजीपी राजीव कृष्णा और एडीजी यातायात ए. सतीश गणेश के मार्गदर्शन में संचालित यह योजना यातायात प्रबंधन को नई दिशा दे रही है। योजना के तहत सातों पुलिस कमिश्नरेट के 74 प्रमुख मार्गों पर रियल टाइम मॉनीटरिंग और ट्रैफिक एनालिसिस के जरिये मार्च माह से 15 जुलाई तक यातायात जाम के मामलों में कमी दर्ज की गई है।

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710 किलोमीटर लंबाई वाले मार्गों पर सुधार हुआ

योजना के तहत सातों कमिश्नरेट के कुल 710 किलोमीटर लंबाई वाले मार्गों पर सुधार पाया गया। प्रयागराज में 44.92 फीसदी, गाजियाबाद में 43.15 फीसदी और वाराणसी में 20.75 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। इसी तरह लखनऊ में 13.67 फीसदी, कानपुर में 13.19 फीसदी, आगरा में 10.99 फीसदी और नोएडा में 10.1 फीसदी की कमी हुई है। 

योजना का उद्देश्य यातायात जाम की पहचान, तत्काल विश्लेषण और न्यूनतम समय में प्रभावी हस्तक्षेप कर यातायात को सामान्य बनाना है। इस प्रणाली में गूगल आधारित रियल टाइम ट्रैफिक डेटा का प्रत्येक दो घंटे में स्वचालित विश्लेषण होता है। प्रत्येक चिह्नित मार्ग का सामान्य परिस्थितियों में औसत यात्रा समय निर्धारित है। जैसे ही किसी मार्ग पर वास्तविक समय में यात्रा अवधि सामान्य औसत समय से अधिक होती है, गति-यूपी एआई प्लेटफॉर्म स्वतः लाल झंडी दिखाता है। 

 

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वास्तविक समय यातायात प्रबंधन में बदला 

आरटीसी योजना ने पारंपरिक जाम लगने के बाद कार्रवाई व्यवस्था को पूर्वानुमानित और वास्तविक समय यातायात प्रबंधन में बदला है। अब यातायात का मूल्यांकन नागरिकों के वास्तविक यात्रा समय के आधार पर किया जा रहा है। यह प्रणाली प्रतिदिन हजारों ट्रैफिक डेटा बिंदुओं का विश्लेषण कर अधिकारियों को हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले मार्गों की तत्काल सूचना देती है। 

इसमें रूट मार्शल व्यवस्था और प्रत्येक मार्ग के लिए उत्तरदायी अधिकारी तय किए गए हैं। इस प्रणाली से नागरिकों के यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत, अनावश्यक जाम में कमी, प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही पुलिस संसाधनों का वैज्ञानिक और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। आरटीसी मॉडल का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में भी हो रहा है।

 

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वीआईपी मूवमेंट अभी मुसीबत

प्रदेश पुलिस के प्रयासों के बावजूद वीआईपी मूवमेंट की वजह से लगने वाला जाम लोगों को परेशान कर रहा है। इसकी वजह से वाहनों को काफी देर तक रुकना पड़ता है और बाद में वाहनों की अधिकता की वजह से जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसे दुरुस्त करने में खासा समय लगता है। हाल ही में राजधानी में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यक्रम की वजह से कई मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया था।

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