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Lucknow News: जानिए बजट भाषण में वित्त मंत्री ने किन गीतकारों और शायर की पंक्तियां पढ़कर माहौल बनाया शायराना
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गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना और शायर इकबाल अशहर। स्रोत सोशल मीडिया
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अभिषेक सहज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को सदन में बजट पेश किया। बजट भाषण के दौरान सुरेश खन्ना का शायराना अंदाज देखने को भी मिला। इस दौरान उन्होंने मशहूर शायर इकबाल अशहर की शायरी, काव्य मंचों के विख्यात गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना और गोविंद विद्यार्थी के गीत की पंक्तियां भी पढ़कर सुनाईं।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण के दौरान दिल्ली के शायर इकबाल अशहर की पंक्तियां दो बार पढ़ीं। एक बार शुरुआत में ही सुरेश खन्ना ने सुनाया- यही जुनून यही एक ख्वाब मेरा है, वहां चराग जला दूं जहां अंधेरा है। इसके बाद इकबाल अशहर की गजल का शेर सुनाया- ये अलग बात है कि तुम ना बदलो मगर जमाना बदल रहा है, गुलाब पत्थर पर खिल रहा है, चिराग आंधी में जल रहा है। वित्त मंत्री का शायराना अंदाज यहीं पर नहीं रुका। उन्होंने सिकंदरामऊ हाथरस के गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना की पंक्तियां भाषण के दौरान पढ़कर सुनाईं- बड़ी मुश्किल से कोई सुबह मुस्कुराती है, गम की हर रात दबे पांव चली आती है, वक्त लगता है जिंदगी बदलने में, पर बदलने में वक्त जिंदगी लग जाती है।
डॉ. विष्णु सक्सेना का ही एक और मुक्तक वित्त मंत्री ने बजट भाषण के अंत में शामिल किया कि - बात अनमोल बहुत है ये जिंदगी के लिए, बता रहा हूं फलसफा मैं हर किसी के लिए, पोंछ सकते हो तो दुखियों के पोंछ लो आंसू, न जिएं आप फकत अपनी खुशी के लिए। अमर उजाला से बातचीत में डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है कि वित्त मंत्री ने मेरा मुक्तक अपने बजट भाषण के दौरान पढ़ा। उन्होंने कहा कि अगर वे पंक्तियों को लिखने वालों का नाम भी ले लेते तो सोने पर सुहागा हो जाता। भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने लेखक व गायक गोविंद विद्यार्थी के एक गीत पंक्तियां भी योगी सरकार की प्रशंसा में पढ़ीं- काबिल-ए-तारीफ है अंदाज एक-एक काम का, गा रही गीत योगी-योगी जी के नाम का...।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को सदन में बजट पेश किया। बजट भाषण के दौरान सुरेश खन्ना का शायराना अंदाज देखने को भी मिला। इस दौरान उन्होंने मशहूर शायर इकबाल अशहर की शायरी, काव्य मंचों के विख्यात गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना और गोविंद विद्यार्थी के गीत की पंक्तियां भी पढ़कर सुनाईं।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण के दौरान दिल्ली के शायर इकबाल अशहर की पंक्तियां दो बार पढ़ीं। एक बार शुरुआत में ही सुरेश खन्ना ने सुनाया- यही जुनून यही एक ख्वाब मेरा है, वहां चराग जला दूं जहां अंधेरा है। इसके बाद इकबाल अशहर की गजल का शेर सुनाया- ये अलग बात है कि तुम ना बदलो मगर जमाना बदल रहा है, गुलाब पत्थर पर खिल रहा है, चिराग आंधी में जल रहा है। वित्त मंत्री का शायराना अंदाज यहीं पर नहीं रुका। उन्होंने सिकंदरामऊ हाथरस के गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना की पंक्तियां भाषण के दौरान पढ़कर सुनाईं- बड़ी मुश्किल से कोई सुबह मुस्कुराती है, गम की हर रात दबे पांव चली आती है, वक्त लगता है जिंदगी बदलने में, पर बदलने में वक्त जिंदगी लग जाती है।
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डॉ. विष्णु सक्सेना का ही एक और मुक्तक वित्त मंत्री ने बजट भाषण के अंत में शामिल किया कि - बात अनमोल बहुत है ये जिंदगी के लिए, बता रहा हूं फलसफा मैं हर किसी के लिए, पोंछ सकते हो तो दुखियों के पोंछ लो आंसू, न जिएं आप फकत अपनी खुशी के लिए। अमर उजाला से बातचीत में डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है कि वित्त मंत्री ने मेरा मुक्तक अपने बजट भाषण के दौरान पढ़ा। उन्होंने कहा कि अगर वे पंक्तियों को लिखने वालों का नाम भी ले लेते तो सोने पर सुहागा हो जाता। भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने लेखक व गायक गोविंद विद्यार्थी के एक गीत पंक्तियां भी योगी सरकार की प्रशंसा में पढ़ीं- काबिल-ए-तारीफ है अंदाज एक-एक काम का, गा रही गीत योगी-योगी जी के नाम का...।

गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना और शायर इकबाल अशहर। स्रोत सोशल मीडिया
