यूपी: भाजपा के नए प्रभारी के ऊपर विधानसभा के साथ लोकसभा चुनाव जिताने की जिम्मेदारी, योगी के साथ होगी जुगलबंदी?
Vinod Tawde: भाजपा ने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रभारी है। विनोद तावड़े की पहली बड़ी परीक्षा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं।
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भाजपा ने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रभारी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रभारी के तौर पर तावड़े की नियुक्ति के पीछे सिर्फ 2027 का विधानसभा चुनाव जीतना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि सीएम योगी के चेहरे के साथ तावड़े की चुनावी रणनीति के सहारे 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भी मजबूत जमीन तैयार करना है। इसलिए तावड़े की नियुक्ति को सिर्फ विधानसभा चुनाव तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के जरिए 2029 के लिए भी संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों मजबूत करना है।
राजनीतिक सफर और संगठनात्मक पृष्ठभूमि
विनोद तावड़े छात्र जीवन से ही वे आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे और 1980 के दशक में पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। 1999 में वे मुंबई भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष बने और कई वर्षों तक महाराष्ट्र बीजेपी के महासचिव रहे। 2014 से 2019 के दौरान देवेंद्र फडणवीस सरकार में उन्होंने स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक मामलों के कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। वे 2011 से 2014 तक महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे। तावड़े भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रहे। इससे पहले बिहार, हरियाणा और केरल समेत कई राज्यों के भी प्रभारी रह चुके हैं।
तावड़े के सामने ये चुनौतियां भी होंगी
देश के सबसे अधिक विधानसभा क्षेत्र वाले यूपी के प्रभारी के तौर पर तावड़े के सामने कई चुनौतियां भी होंगी। राजनीतिक और रणनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य में पार्टी ने लगातार दो बार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी की पकड़ ढीली नजर आई। ऐसे में भाजपा की पकड़ मजबूत करने के साथ ही तावड़े के सामने आगामी चुनावों में जीत की हैट्रिक सुनिश्चित करने और संगठनात्मक संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती होगी। साथ ही संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और अंदरूनी गुटबाजी को दूर कर सबको साथ लेकर चलने, बूथ स्तर पर कैडर को फिर से सक्रिय करने, जटिल सामाजिक-जातिगत समीकरणों को साधना बड़ी चुनौती होगी।
ढाई साल बाद यूपी भाजपा को मिला नया प्रभारी
यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने अब तेजी से सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रभारी और राष्ट्रीय मंत्री जगदीश ईश्वर भाई पटेल को सह प्रभारी बनाया है। तावड़े महाराष्ट्र और जगदीश भाई गुजरात से हैं।
राष्ट्रीय संगठन के गठन के एक दिन बाद ही पार्टी ने मंगलवार को बिहार जैसे जातीय समीकरण के लिहाज से जटिल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी बनाकर संगठन और चुनावी प्रबंधन में सिद्धहस्त नेता पर दांव लगाया है। माना जा रहा है कि तावड़े की रणनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चेहरा आगे करके पार्टी आगामी चुनाव जीतकर हैट्रिक बनाने के साथ ही 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए जमीन मजबूत करेगी।
विजयंत पांडा के हटने के बाद से यूपी में कोई स्थायी प्रभारी नहीं था। करीब ढाई साल बाद पार्टी ने तावड़े को नया प्रभारी बनाया है। हालांकि तावड़े अघोषित तौर पर यूपी में पार्टी का कामकाज देख रहे थे। यही वजह है कि पार्टी ने किसी नए चेहरे के बजाए तावड़े को ही यूपी की कमान सौंपी है। उन्हें यूपी का प्रभारी बनाने के पीछे भाजपा के चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पार्टी का मानना है कि 403 विधानसभा वाले इस प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए सिर्फ चुनावी रैलियां ही काफी नहीं हैं, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती, टिकट वितरण, जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधने और सहयोगी दलों से समन्वय के साथ ही पार्टी के अंदरूनी अर्न्तकलह से निपटने जैसी कई ऐसी चुनौतियों से पार पाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में तावड़े के अनुभवों के देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें प्रभारी की जिम्मेदारी देकर यूपी जीतने का टास्क दिया है। तावड़े के लिए यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव एक बड़ी अग्निपरीक्षा होंगे। इस समय इस फैसले को अहम इसलिए बताया जा रहा है, क्योंकि विधानसभा सीट के लिहाज से यूपी काफी बड़ा राज्य है। 2027 के चुनावों के के बाद पार्टी के सामने 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए यूपी जीतना अहम है। इसलिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में तावड़े को अहम जिम्मेदारी दी गई है।