UP Cabinet: शिक्षामित्रों का मानदेय लगभग दोगुना हुआ, स्मारकों का सरकार करेगी संरक्षण; पढ़ें 22 बड़े फैसले
राज्य कैबिनेट ने 22 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनमें शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी शामिल है। साथ ही कई जनपदों में आधुनिक बस अड्डों का निर्माण होगा और महापुरुषों की प्रतिमाओं का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जिससे बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिलेगी।
विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय लगभग दोगुना कर दिया है। यूपी के 52 जनपदों में परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बस अड्डों के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। इसके अलावा बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि समेत अन्य महापुरुषों की मूर्तियों का व्यापक सौंदर्यीकरण होगा। पढ़ें बड़े फैसले...
शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि को कैबिनेट की मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा पर मुहर लगाते हुए योगी कैबिनेट ने मंगलवार को शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 2017 में ₹10,000 निर्धारित किए गए शिक्षामित्रों के मानदेय को अब बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय अप्रैल माह से लागू हो जाएगा।
इस निर्णय से प्रदेश सरकार पर कुल 1475.27 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। यह निर्णय उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र 2026 के प्रथम सत्र में मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में लिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय वर्ष में 11 माह के लिए देय होगा।
1.43 लाख शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ
कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा अभियान के तहत 60:40 अनुपात में प्राप्त होता था।
समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत केंद्रांश के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा तथा अनुमोदन प्राप्त न होने की स्थिति में बढ़े हुए मानदेय के कारण इन पर आने वाला अतिरिक्त ₹1138.12 करोड़ का व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। वहीं शेष 13,597 शिक्षामित्र, जिनका भुगतान पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, उनके लिए ₹119.65 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार भी प्रदेश सरकार उठाएगी।
करीब 25 हजार अनुदेशक होंगे लाभान्वित
संदीप सिंह ने बताया कि इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों को भी बड़ी राहत दी गई है। वर्ष 2017 में निर्धारित ₹9,000 मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं।
इस वृद्धि से राज्य सरकार पर ₹217.50 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और मई माह में दिए जाने वाले भुगतान में यह वृद्धि शामिल होगी।
योगी सरकार ने ग्रेटर नोएडा में ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को दी मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इस क्रम में ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के अंतर्गत ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जो प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम के तहत निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, उनके विनियमन एवं संचालन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
संचालन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित
उन्होंने बताया कि प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्रा. लि., नोएडा द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, जिसे विधिक प्रावधानों के अनुरूप परीक्षण के उपरांत स्वीकृति दी गई है।
इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की अनुसूची में संशोधन करते हुए ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ प्रख्यापित किए जाने तथा प्रायोजक संस्था को संचालन प्राधिकार-पत्र निर्गत करने का निर्णय लिया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे तथा युवाओं को आधुनिक एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी। यह पहल राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि योगी सरकार उच्च शिक्षा के विस्तार, गुणवत्ता संवर्धन और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। नए विश्वविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे।
सामाजिक न्याय के प्रणेताओं के स्मारकों का सरकार करेगी संरक्षण
उत्तर प्रदेश में महापुरुषों की विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए योगी सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारकों के विकास का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ‘डा० बी०आर० आंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत महापुरुषों, समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियों का संरक्षण, सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अंतर्गत योगी सरकार बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि समेत अन्य महापुरुषों की मूर्तियों का व्यापक सौंदर्यीकरण करेगी।
इसके साथ ही आगामी 14 अप्रैल को प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां स्थानीय जनप्रतिनिधि (सांसद, विधायक, एमएलसी) जनता को इस योजना और चयनित स्थलों के बारे में जानकारी भी देंगे।
हर विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारक, 403 करोड़ का प्रावधान
यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित करेगी, बल्कि उन्हें जनोपयोगी केंद्र के रूप में भी विकसित करेगी। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 स्मारकों का विकास किया जाएगा।
प्रति स्मारक 10 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसके अंतर्गत कुल 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन स्मारकों के आसपास बाउंड्रीवॉल, छत्र निर्माण, सौंदर्यीकरण, हरियाली का विकास और प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।
सांस्कृतिक धरोहर के साथ रोजगार सृजन भी
योजना का उद्देश्य सिर्फ मूर्तियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आसपास के क्षेत्रों को विकसित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित करना है। निर्माण कार्यों के जरिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
जन जागरूकता और विरासत संरक्षण को बढ़ावा
योगी सरकार की यह पहल मूर्ति स्थलों को केवल प्रतीकात्मक स्थान न बनाकर उन्हें जानकारीपरक और जन उपयोगी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे नई पीढ़ी को महापुरुषों के योगदान के बारे में जानने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। इसके अंतर्गत 31 दिसम्बर, 2025 तक स्थापित मूर्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर उनके आसपास के क्षेत्र का सर्वांगीण विकास किया जाएगा।
पीपीपी मॉडल पर अब 49 बस स्टेशनों का होगा कायाकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशनों के विकास के द्वितीय चरण को मंजूरी दे दी गई है।
इस चरण में प्रारंभिक रूप से प्रस्तावित 54 बस स्टेशनों में से 6 अनुपयुक्त स्टेशनों को हटाते हुए तथा जनपद चंदौली को शामिल करते हुए कुल 49 बस स्टेशनों को विकसित किया जाएगा। यह परियोजना पीपीपी के डीबीएफओटी (डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर लागू की जाएगी, जिसमें राज्य सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं आएगा।
8 साल में पूरी करनी होगी परियोजना
प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि परियोजना के तहत बस स्टेशनों को अत्याधुनिक स्वरूप दिया जाएगा, जहां यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता एवं अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पात्रता शर्तों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। तकनीकी क्षमता की शर्त को परियोजना लागत के 150% से घटाकर 100% किया गया है, वहीं परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा 5 से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है। नेट वर्थ की अनिवार्यता परियोजना लागत का 25% निर्धारित की गई है तथा कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या 3 से बढ़ाकर 4 कर दी गई है।
12 माह में शुरू करना होगा काम
सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने पर परियोजना का काम शुरू करने की समय सीमा भी 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी स्थलों पर 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और ग्राउंड कवरेज की निःशुल्क अनुमति देने का प्रस्ताव है।
लीज अवधि 35 या 90 वर्ष निर्धारित की गई है और इसके समाप्त होने पर स्वामित्व स्वतः ही उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को प्राप्त हो जाएगा। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि बिडिंग प्रक्रिया के दौरान यदि किसी संशोधन की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया जाएगा।
4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान
परिवहन मंत्री ने बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में 23 बस स्टेशनों (लखनऊ, कानपुर, आगरा सहित) को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है और द्वितीय चरण के 49 बस अड्डों के साथ अब कुल 52 जनपद इस योजना से आच्छादित हो जाएंगे, जबकि शेष 23 जनपदों को अगले चरण में शामिल किया जाएगा।
परियोजना में ₹4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान है (पहले चरण में लगभग ₹2500 करोड़), जिसके तहत बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करते हुए वीआईपी लाउंज, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल और ठहरने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कुल क्षेत्रफल का लगभग 55% हिस्सा सार्वजनिक सुविधाओं और 45% व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग होगा।
तीन जनपदों में बस स्टेशन निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी
परिवहन मंत्री ने बताया कि कैबिनेट में मंजूर किए गए अन्य प्रस्तावों के तहत सिकंदराराऊ (हाथरस), नरौरा (बुलंदशहर) और तुलसीपुर (बलरामपुर) में नए बस अड्डों के निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है। परियोजना के तहत निर्माण कार्य दो वर्षों में पूरा करने तथा व्यावसायिक गतिविधियों को सात वर्षों में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
वर्तमान में प्रतिदिन 15 से 23 लाख यात्री परिवहन सेवाओं का उपयोग करते हैं, जो त्योहारों के दौरान 30 से 35 लाख तक पहुंच जाते हैं, ऐसे में यह योजना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही शहरी भीड़भाड़ कम करने में भी सहायक होगी।
नरौरा में बस स्टेशन के साथ डिपो कार्यशाला स्थापित की जाएगी, जबकि तुलसीपुर में देवीपाटन मंदिर के निकट यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक बस स्टेशन का निर्माण होगा। इन बस स्टेशनों को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दुकानों और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।