UP: सिर पर लटक रही मौत, फिर भी नीचे बना दिया आशियाना... 10 हजार परिवार मौत के साये में जीने को मजबूर
लखनऊ में 33 हजार वोल्ट की ओवरहेड लाइनों के नीचे प्लॉट कटते-बिकते रहे और बिजली इंजीनियर तमाशा देखते रहे। हाल ये है कि शहर के अनुमानित 10 हजार परिवार रोज मौत के साये में जीने के लिए मजबूर हैं।
विस्तार
फैजुल्लागंज द्वितीय के शिवनगर में रविवार को 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से पतंग छुड़ाते वक्त 12 वर्षीय आर्यन के झुलसने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी में हाईटेंशन लाइन के नीचे ऐसी कई बस्तियां बसी हैं। ये बस्तियां अचानक नहीं बसीं। दो दशकों में प्रॉपर्टी डीलरों और बिजली इंजीनियरों की सांठगांठ से 11 और 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइनों के नीचे प्लॉट काटकर अनुमानित 10 हजार परिवारों को रोज मौत के साये में जीने के लिए मजबूर कर दिया गया है।
अमर उजाला की पड़ताल में भरत नगर के निलेश कुमार मिश्र ने बताया कि प्रॉपर्टी डीलरों ने घर खरीदते समय भरोसा दिलाया था कि ओवरहेड बिजली की लाइनों को जल्द हटवा दिया जाएगा। इसके लिए एक लाख रुपये तक जमा कराए गए, लेकिन 15 वर्ष बीतने के बावजूद लाइन एक इंच भी नहीं हिली। फैजुल्लागंज निवासी सतीश भी बताते हैं कि जब हाईटेंशन लाइन के नीचे मकान बन रहे थे, उस वक्त बिजली इंजीनियरों ने आंखें मूंद रखी थीं। जब हादसा हुआ तो नोटिस उसी परिवार के घर पहुंचा, जिसे शुरुआत से प्रॉपर्टी डीलरों ने झांसा देकर ठगा था।
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अहिबरनपुर लाइन: 8 किमी में 700 मकान खतरे के नीचे
मंगलवार को 12 वर्षीय आर्यन नबीकोटनंदना ट्रांसमिशन उपकेंद्र से निकलने वाली 33 केवी अहिबरनपुर लाइन से झुलसा था। इस लाइन के नीचे 700 से अधिक मकान बने हुए हैं। करीब आठ किमी के दायरे में हाईटेंशन लाइन इन घरों से सिर्फ एक-दो मीटर ऊपर गुजर रही है। इससे छत पर बैठना तो दूर, कपड़े तक नहीं सुखाए जा सकते। जरा सी चूक पर जान जाने का खतरा बना रहता है।
ये इलाके मौत के साये में
चिनहट, भरवारा, गोमतीनगर विस्तार, निलमथा, तेलीबाग, साउथ सिटी, बिजनौर, नादरगंज, सरोजनीनगर, बंथरा, गेहरू, पारा, मोहान रोड, राजाजीपुरम, हरदोई रिंग रोड, बालागंज, आजादनगर, यासीनगंज, दुबग्गा, अंधे की चौकी हरदोई रोड, जेहटा, बरावन कला, आईआईएम रोड, फैजुल्लागंज, दाउदनगर, भरतनगर, श्रीनगर, मड़ियांव, नबीकोटनंदना, कुर्सी रोड, बेहटा, तकरोही सहित कई इलाकों में हाईटेंशन लाइनों के नीचे बड़ी बस्तियां मौजूद हैं।
कुछ बड़े हादसे
- करीब 10 दिन पहले पारा के न्यू जलालपुर में 11 साल का अमृतय्या अग्निहोत्री छत पर खेलते हुए झुलसा।
- नादरगंज में चार माह पहले बारिश के दौरान घर पर करंट उतरने से एक बच्ची के हाथ-पैर झुलस गए थे।
- बीकेटी में छह माह पहले 20 वर्षीय युवती कपड़े फैलाते समय झुलसी थी।
खतरा टालने की कीमत
- 11 हजार वोल्ट की लाइन भूमिगत करने का खर्च : 21.60 लाख रुपये प्रति किमी
- 33 हजार वोल्ट लाइन भूमिगत करने का खर्च : 46.40 लाख रुपये प्रति किमी
विद्युत सुरक्षा निदेशालय को कार्रवाई की जिम्मेदारी
जानकीपुरम जोन के मुख्य अभियंता वीपी सिंह का कहना है कि हाईटेंशन लाइन के नीचे मकान बनाने पर धारा-79 एवं धारा-80 के तहत प्रॉपर्टी डीलरों एवं निर्माणकर्ता को नोटिस जारी होता है। लगभग हर जेई ने अपने इलाके में 40 से ज्यादा नोटिस जारी कर चुके हैं। नोटिस की प्रतिलिपि विद्युत सुरक्षा निदेशालय को भेजी जाती है। निदेशालय को कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया है, यहां इन नोटिसों को नजरअंदाज किया गया। इसी वजह से हाईटेंशन लाइन के नीचे अवैध निर्माण बढ़े हैं।