फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP Drill bit stuck patient chest years leaves doctors amazed; relief achieved after 45-minute sur

यूपी: 11 साल से मरीज की छाती में फंसी थी ड्रिल बिट, डॉक्टर भी हैरान; 45 मिनट की सर्जरी में मिली राहत

Tue, 08 Sep 2026 06:30 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 08 Sep 2026 06:30 PM IST
सार

लखनऊ पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने मरीज की छाती में 11 साल से फंसी ड्रिल बिट सफलतापूर्वक निकाल दी। सीटी स्कैन में धातु का टुकड़ा मिलने के बाद करीब 45 मिनट की सर्जरी हुई। मरीज लंबे समय से सीने के दर्द से परेशान था। ऑपरेशन के बाद उसे राहत मिली।

विज्ञापन
UP Drill bit stuck patient chest years leaves doctors amazed; relief achieved after 45-minute sur
सर्जरी - फोटो : Freepik.com

विस्तार

पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण सर्जरी करके मरीज को दर्द से राहत दी है। मरीज के सीने में 11 साल से फंसे ड्रिल बिड (धातु का टुकड़ा) को सफलतापूर्वक निकाला गया है। यह ड्रिल 11 साल पहले सर्जरी के दौरान व्यक्ति के हड्डी में ही छूट गई थी।

विज्ञापन


सर्जरी के बाद मरीज को सीने में दर्द से राहत मिल गई है। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कुशीनगर निवासी अब्दुल कादिर (53) तीन दिन पहले एपेक्स ट्रॉमा आया था, उसका हाथ काफी मुड़ा हुआ था। जिससे वह अपने काम नहीं कर पाता था। 

विज्ञापन

 

मरीज को चेस्ट में भी दर्द हो रहा था

साथ ही मरीज को चेस्ट में भी दर्द की शिकायत थी। हाथ में विकृति, पस निकलने और सीने में भी दर्द की शिकायत के कारण मरीज का सीटी स्कैन कराया गया तो पता चला कि मरीज के चेस्ट में एक ड्रिल बिट धंसी हुई थी। पिछले 11 साल से मरीज इस ड्रिल बिट के कारण होने वाला दर्द झेल रहा था। 

डॉक्टर ने बताया इस ड्रिल का उपयोग टूटी हड्डी का इलाज करने के दौरान हड्डी में छेद करने के लिए किया जाता है। आशंका कि सर्जरी के दौरान ही यह बिड चेस्ट में छूट गई हो। लेकिन हाथ में सर्जरी के दौरान चेस्ट में ड्रिल बिड कैसे पहुंच गई इसको लेकर पीजीआई के डॉक्टर्स भी असमंजस्य में हैं। 

डॉ. अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में डॉक्टर्स की टीम ने करीब 45 मिनट की सर्जरी के बाद मरीज के हाथ की हड्डी की समस्या को ठीक करने संग चेस्ट से ड्रिल बिड निकालकर इस समस्या से भी निजात दिला दिया है। सर्जरी के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ है।



 

मरीज के साथ कब क्या हुआ

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था। हादसे में उसकी दाहिनी बांह की हड्डी (ह्यूमरस) टूट गई थी, जिसका इलाज वर्ष 2015 में किया गया था। लोहिया संस्थान प्लेटिंग के साथ इलाज किया गया। लेकिन 2018 में मरीज़ ज़मीन पर गिर गया, जिससे दाहिने हाथ में फिर से दर्द और विकृति (टेढ़ापन) आ गई। मरीज फिर लखनऊ के लोहिया अस्पताल गया। जहां 2018 में प्लेट हटा दी गई और नेलिंग की गई। 

इसके बाद 2023 में एक बार फिर मरीज़ ज़मीन पर गिर गया, जिससे दाहिने हाथ में दोबारा दर्द और विकृति हुई। वर्ष 2023 में नेलिंग हटा दी गई और फिर से नेलिंग करके इलाज किया गया। 2025 में मरीज के घाव से मवाद निकलने लगा और फरवरी 2026 में नेलिंग हटा दी गई। जहां प्लेटिंग के साथ बोन ग्राफ्टिंग करके उसका इलाज किया गया।

इस टीम ने किया ऑपरेशन

इस जटिल सर्जरी को करने वाली टीम में मुख्य रूप से प्रो. अमित कुमार सिंह (ट्रॉमा सर्जरी), डॉ. अमित कुमार (एडिशनल प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स), डॉ. आदित्य एवं डॉ. वरुण गुप्ता (सीनियर रेजिडेंट, ट्रॉमा सर्जरी), डॉ. वंश (एडिशनल प्रोफेसर, एनेस्थीसिया) शामिल रहे।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed