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UP: बीच रास्ते बदल दिया माल, 2.14 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी पकड़ी; नए तरीके देख अधिकारी भी हैरान

Thu, 09 Jul 2026 08:13 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 09 Jul 2026 08:13 PM IST
सार

राज्य कर विभाग की विशेष जांच में लखनऊ और रायबरेली की एक रासायनिक कंपनी पर 2.14 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया। जांच में ई-वे बिल में माल का विवरण बदलने, फर्जी क्रेडिट नोट और स्टॉक में गड़बड़ी मिली। व्यापारी ने 77.16 लाख रुपये जमा किए, जबकि जांच जारी है।

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UP: Goods swapped mid-transit; GST evasion worth ₹2.14 crore detected; officials stunned by the novel modus op
यूपी में बड़ी जीएसटी चोरी - फोटो : सांकेतिक

विस्तार

राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी), लखनऊ जोन-प्रथम ने लखनऊ और रायबरेली स्थित एक केमिकल निर्माता फर्म के तीन प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापामार जांच कर करीब 2.14 करोड़ रुपए के कर अपवंचन का खुलासा किया है। 

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जांच के दौरान व्यापारी ने 77.16 लाख रुपए स्वयं सरेंडर कर राजकोष में जमा करा दिए, जबकि शेष राशि जमा कराने की प्रक्रिया जारी है। विभाग का कहना है कि जब्त अभिलेखों की जांच में कर चोरी की और बड़ी रकम सामने आने की संभावना है।
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विशेष अनुसंधान शाखा को बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स तथा जीएसटी प्राइम पोर्टल के डाटा विश्लेषण में फर्म की गतिविधियां संदिग्ध मिली थीं। इसके बाद सात जुलाई को लखनऊ और रायबरेली स्थित प्रतिष्ठानों पर एक साथ कार्रवाई की गई।

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नया तरीका सामने आया

एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 (विशेष अनुसंधान शाखा) मनोज कुमार विश्वकर्मा के निर्देश पर ये कार्रवाई संयुक्त आयुक्त स्तुति श्रीवास्तव के नेतृत्व में की गई। जांच टीम में डिप्टी कमिश्नर संजीव निरंजन तथा सहायक आयुक्त विशाल सिंह और निहारिका भी शामिल रहे। जांच के दौरान रायबरेली स्थित फैक्टरी के पास एक वाहन पकड़ा गया, जिसमें कर चोरी का नया तरीका सामने आया।

विभाग के अनुसार वाहन के लिए पहले महाराष्ट्र से पंजाब तक नेप्था (एचएसएन कोड 27101221) का ई-वे बिल जारी किया गया था, लेकिन यात्रा के दौरान ही पंजाब के खरीदार की ओर से उसी माल का नाम और एचएसएन कोड बदलकर रायबरेली की फर्म के नाम बिक्री दर्शा दी गई। 

अधिकारियों का कहना है कि बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के ऐसा परिवर्तन संभव नहीं है। मौके पर वाहन में मौजूद माल और बिल में दर्ज वस्तु अलग-अलग मिली। इस मामले में सचल दल इकाई ने वाहन सहित माल को रोककर 10 लाख रुपए का अर्थदंड वसूल किया।

 

व्यापारी इस पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सका

इसके बाद वाहन ट्रैकिंग सिस्टम और ई-वे बिल विश्लेषण में कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं। विभाग के अनुसार फर्म ने 30.64 लाख रुपए के केमिकल की बिक्री झारखंड के कोडरमा के नाम दर्शाई, जबकि वाहन वहां पहुंचने के बजाय दूसरे राज्य में जाता मिला। व्यापारी इस पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

जांच में यह भी सामने आया कि फर्म क्रेडिट नोट की आड़ में भी कर चोरी कर रही थी। विभाग ने दावा किया कि जिन वाहनों से माल वापसी दिखाकर क्रेडिट नोट जारी किए गए, उनकी वास्तविक लोकेशन उस समय ओडिशा, गुजरात और राजस्थान में मिली। इससे माल वापसी के दावे संदिग्ध पाए गए।

डाटा विश्लेषण के अनुसार प्रतिष्ठानों पर लगभग 12 करोड़ रुपए का केमिकल स्टॉक होना चाहिए था, लेकिन भौतिक सत्यापन में भारी अंतर मिला। इन्हीं आधारों पर विभाग ने कुल 2.14 करोड़ रुपए के कर अपवंचन का मामला दर्ज किया।

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