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यूपी: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, संदिग्ध लेनदेन पर पूरा बैंक खाता फ्रीज नहीं कर सकती जांच एजेंसी; जानिए डिटेल
Sun, 16 Aug 2026 08:43 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 16 Aug 2026 08:43 PM IST
सार
Lucknow High Court: कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खाता फ्रीज करने की शक्ति का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय गतिविधियां और वैध कारोबार ही ठप हो जाए।
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लखनऊ हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि साइबर अपराध से जुड़ा संदिग्ध लेनदेन किसी निश्चित रकम तक सीमित है तो जांच एजेंसी किसी व्यक्ति का पूरा बैंक खाता डेबिट फ्रीज नहीं कर सकती। खाते पर लगाई गई रोक संदिग्ध अपराध की रकम तक ही सीमित व आनुपातिक होनी चाहिए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी को संबंधित बैंक को एफआईआर, खाते पर रोक लगाने का आधार और लियन के लिए निर्धारित रकम की जानकारी देनी होगी। साथ ही कानून के अनुसार संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी इसकी सूचना देनी होगी।
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इस आदेश के साथ कोर्ट ने अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया कि वे इस शिकायत निवारण व्यवस्था का पालन करें और खातों के फ्रीज होने या डिजिटल बैंकिंग सेवाएं रोके जाने से संबंधित शिकायतों के लिए उचित नोडल व्यवस्था बनाएं।
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न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश लखनऊ के व्यवसायी रितेश यादव की याचिका निस्तारित करते हुए पारित किया। कोर्ट ने सम्बंधित बैंक को उनके खातों को डी-फ्रीज करने और 36 हजार रुपये से अधिक की रकम के संचालन की अनुमति देने का निर्देश दिया। कहा कि 36 हजार रुपये पर लियन बना रहेगा।
कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खाता फ्रीज करने की शक्ति का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय गतिविधियां और वैध कारोबार ही ठप हो जाए। याची ने कई बैंकों में खाते फ्रीज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था।
याची के अनुसार, कर्नाटक में साइबर अपराध की जांच के सिलसिले में उसके बंधन बैंक खाते में 36 हजार रुपये की संदिग्ध रकम आने के बाद खाते फ्रीज किए गए थे। कोर्ट ने उक्त आदेश के साथ अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया कि वे इस शिकायत निवारण व्यवस्था का पालन करें और खातों के फ्रीज होने या डिजिटल बैंकिंग सेवाएं रोके जाने से संबंधित शिकायतों के लिए उचित नोडल व्यवस्था बनाएं।