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UP: सड़क हादसों को रोकने के उपाय नहीं किए, छह थाना प्रभारी लाइन हाजिर; दो सीओ ट्रैफिक पर भी कार्रवाई

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 08 Apr 2026 08:39 PM IST
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सार

सड़क हादसों में कमी लाने के उपाय न करने पर छह थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर किया गया। दो यातायात अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए। अधिकारियों को दुर्घटना नियंत्रण, समयबद्ध विवेचना और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कानून-व्यवस्था में सुधार हो सके।

UP Measures Taken to Prevent Road Accidents; Six Station House Officers Sent to Reserve Lines; Action Also
डीजीपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सुधारात्मक कदम नहीं उठाने वाले 6 थाना प्रभारियों को बुधवार को लाइन हाजिर कर दिया गया है। साथ ही दो सीओ ट्रैफिक के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू करने का आदेश दिया गया है। मुख्यालय से चयनित 487 थानों में से 46 में हादसे बढ़े। इनमें 6 थाने ऐसे रहे जहां सड़क हादसे तेजी से बढ़े।

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लाइन हाजिर होने वालों में वाराणसी के चोलापुर थाना प्रभारी दीपक कुमार, गोरखपुर के कैम्पियरगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह, कन्नौज के छिबरामऊ थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी, बाराबंकी के रामसनेहीघाट थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद शुक्ला, अलीगढ़ के जवां थाना प्रभारी धीरज यादव और जौनपुर के सिकरारा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह शामिल हैं। साथ ही लापरवाही के आरोप में बाराबंकी के सीओ यातायात आलोक कुमार पाठक और जौनपुर के सीओ यातायात गिरेंद्र कुमार सिंह के विरुद्ध प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं।

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अपराधों की विवेचना तय समय में पूरी करें

डीजीपी ने बुधवार को सभी पुलिस कमिश्नर, एडीजी जोन, आईजी रेंज और जिलों के पुलिस कप्तानों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इसमें उन्होंने आगामी पर्वों की सुरक्षा व्यवस्था, आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण, जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) व सिटी रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन स्कीम, यक्ष एप के प्रभावी उपयोग, ई साक्ष्य तथा कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। 


डीजीपी ने सामान्य अपराध की विवेचना 60 दिन और गंभीर अपराधों की विवेचना 90 दिन में करके अदालत में आरोपपत्र भेजने के निर्देश दिए। साथ ही सभी जिलों के न्यायालय परिसरों की सुरक्षा की नियमित समीक्षा और प्रवेश द्वारों पर प्रभावी जांच, सीसीटीवी एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ रखने का निर्देश दिया। 

उन्होंने कहा कि थाने एवं चौकी स्तर पर जन शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षाकृत सुधार हुआ है, पर कुछ जिलों में अभी सुधार की जरूरत है। उन्होंने ई साक्ष्य का सभी विवेचकों को प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए। लखनऊ कमिश्नरेट के डीसीपी साउथ अमित कुमार आनंद ने ई साक्ष्य के विभिन्न चरणों और तकनीकी पहलुओं पर प्रस्तुतीकरण दिया।

 

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