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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: No CBI probe into Ram Mandir offering theft case; High Court rules petition not maintainable.

UP: राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले की CBI जांच नहीं होगी, हाईकोर्ट ने कहा- याचिका सुनवाई योग्य नहीं

Mon, 06 Jul 2026 02:00 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 06 Jul 2026 02:00 PM IST
सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की केंद्रीय जांच और लेखा परीक्षण की मांग वाली जनहित याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर सुनवाई करना उचित नहीं है।

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UP: No CBI probe into Ram Mandir offering theft case; High Court rules petition not maintainable.
अयोध्या के राम मंदिर की तस्वीर - फोटो : ANI Photos

विस्तार

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्रों से चढ़ावा चोरी के आरोपों वाले मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल जनहित याचिका (पी आई एल) को सोमवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह कहते हुए शुरुआती सुनवाई पर याचिका निस्तारित कर दी कि यह मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में यह याचिका हाईकोर्ट में सुनवाई को ग्रहण करने योग्य नहीं है।

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ऑडिट कराने की मांग की गई थी

मामले की सी बी आई से जांच कराने समेत चढ़ावे की संपत्ति का कैग से ऑडिट कराने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा व्यक्तिगत रूप से दाखिल जनहित याचिका पर दिया। 

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इसमें, कथित गबन मामले की जांच समेत केस दर्ज करने के निर्देश सी बी आई को देने का कोर्ट से आग्रह किया गया है। साथ ही श्रीरामजन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों में चढ़ावे के रूप में मिलने वाली नकद धनराशि, सोने चांदी के आभूषणों व अन्य कीमती वस्तुओं का आडिट महालेखा परीक्षक नियंत्रक( कैग) से कराने की मांग भी की गई है। 

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याचिकाकर्ता ने कहा- भक्तों की भावनाओं को ठेस पंहुची

याचिकाकर्ता का कहना है कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक भगवान श्रीराम जी के मंदिर में दान व चढ़ावे की संपत्ति के कथित गबन के आरोपों का मामला अखबारों में छप रहा है। इससे भक्तों की भावनाओं को ठेस पंहुची है। ऐसे में इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच और ऑडिट होना आवश्यक है। 



याची ने राज्य सरकार को भी यह भी निर्देश देने की मांग की है कि मामले की तफ्तीश किसी पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी की देखरेख में कराई जाए। याचिका में केंद्र, राज्य सरकार के सतर्कता विभाग के प्रमुख सचिव, सी बी आई के निदेशक, कैग व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को इसके चेयरपर्सन के माध्यम से पक्षकार बनाया गया था।

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