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यूपी: बजट में पंचायतों को बड़ा तोहफा, आधुनिक पढ़ाई के लिए बनाई जाएंगी डिजिटल लाइब्रेरी; 67 प्रतिशत बजट बढ़ा

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 12 Feb 2026 08:35 AM IST
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सार

UP Budget 2026-27: प्रदेश सरकार के बजट में पंचायतों का खास ख्याल रखा गया है। इस बार के बजट में बीते वर्ष की तुलना में 67 प्रतिशत बजट का अधिक प्रावधान हैं। 

UP: Panchayats get a major gift in the budget, digital libraries to be built for modern education; budget incr
यूपी बजट में प्रावधान। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

प्रदेश सरकार ने पंचायती राज विभाग के बजट में बड़ा इजाफा करते हुए ग्रामीण विकास को नई गति देने का ऐलान किया है। इस वर्ष विभाग को पिछली बार की तुलना में 67 प्रतिशत अधिक बजट मिला है। पंचायती राज की विभिन्न योजनाओं के लिए कुल 32,090 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में उत्सव भवन बनाए जाएंगे, जिससे सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण के लिए 2,823 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इससे व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण, ठोस-तरल कचरा प्रबंधन और गांवों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी। सरकार का लक्ष्य स्वच्छ और स्वस्थ ग्रामीण परिवेश तैयार करना है।
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गांव-गांव में आधुनिक पढ़ाई की सुविधा
डिजिटल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए हर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 454 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इन लाइब्रेरी में ई-बुक्स और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी सामग्री उपलब्ध होगी।

स्टेडियम,, ओपन जिम निर्माण में आएगी तेजी
खेल और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए गांवों में स्टेडियम और ओपन जिम के निर्माण पर 130 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। साथ ही 1,000 बहुद्देशीय पंचायत भवनों के लिए 57 करोड़ और उत्सव भवन योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

राज्य सरकार लाएगी देश की पहली आबकारी निर्यात नीति

 स्टेट जीएसटी के बाद सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले आबकारी विभाग में निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए नीति लाई जाएगी। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में आबकारी विभाग को 71,278 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया है, जो वर्तमान वित्तीय वर्ष से करीब 8 हजार करोड़ रुपये अधिक है। इस लक्ष्य को पाने के लिए देश में पहली बार यूपी आबकारी निर्यात नीति लाई जाएगी़, आबकारी निवेशक शिखर सम्मेलन भी कराया जाएगा। विभाग ने बीते दिनों एक निवेशक सम्मेलन कराया भी था, जिसमें देश की कई शराब कंपनियां और संगठन शामिल हुए थे।

नई आबकारी नीति में खासकर सिंगल मॉल्ट स्कॉच का उत्पादन करने और उसे निर्यात करने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। विदेशियों को यूपी में बनी सिंगल मॉल्ट शराब का स्वाद चखाने के लिए करीब आधा दर्जन कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में केवल दो कंपनियों रेडिको खेतान और मोहन मीकिंस की बनाई सिंगल मॉल्ट शराब विदेश भेजी जाती है। रेडिको के दो ब्रांड विदेश में लोकप्रिय भी हैं। वह अपने प्लांट की क्षमता बढ़ा भी रहा है। तीन अन्य कंपनियों ने इसमें रुचि दर्शाई है। मोदीनगर में मोदी इल्वा, मुजफ्फरनगर में इंडो स्प्रिट और लखीमपुर खीरी में ग्लोबस स्प्रिट भी सिंगल मॉल्ट शराब का उत्पादन शुरू करने वाली हैं।

विभाग वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति में यूपी में बनी शराब के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए कई सहूलियतें भी देने जा रहा है। यूरोपियन यूनियन से हुए समझौते के बाद जहां विदेशी शराब यूपी के बाजारों में उपलब्ध होगी, वहीं यूपी में बनी शराब यूरोप के 10 से ज्यादा देशों में भेजी जाएगी। हालांकि, विदेशी शराब आने के बाद बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

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