यूपी: पीएम की सोना न खरीदने की अपील से हो सकते हैं लाखों लोग प्रभावित, छोटे शहरों पर पड़ेगा बुरा असर
jewellery sale in UP: पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। अगर लोगों ने यह अपील मानी तो सोने कारोबार से जुड़े लाखों लोग प्रभावित होंगे।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से गैर-जरूरी सोना खरीद एक साल तक टालने की अपील के बाद उत्तर प्रदेश का सर्राफा बाजार चिंता में आ गया है। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) का कहना है कि यदि सोने की खरीद में गिरावट आती है तो इसका सबसे बड़ा असर छोटे ज्वैलर्स, कारीगरों और इससे जुड़े सहायक कारोबार पर पड़ेगा।
प्रदेश देश के सबसे बड़े आभूषण बाजारों में शामिल है। देश के कुल आभूषण कारोबार में यूपी की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी है। प्रदेश में करीब छह लाख सर्राफा कारोबारी, तीन लाख कारीगर, एक लाख से अधिक सहायक व्यापारी और 25 लाख से ज्यादा कर्मचारी इस कारोबार से जुड़े हैं। यानी अकेले यूपी में करीब 35 लाख से अधिक लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष रूप से सोना-चांदी कारोबार पर निर्भर है।सराफा संगठनों के अनुसार यूपी में रोजाना करीब 500 किलो सोने की बिक्री होती है। लेकिन यदि खरीद टालने का माहौल बनता है तो मांग में 40 से 50 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इसका सीधा असर शादी-विवाह सीजन, त्योहारों और ग्रामीण बाजारों पर पड़ेगा, जहां सोना निवेश और सामाजिक परंपरा दोनों माना जाता है।
छोटे शहरों के कारोबार पर सबसे ज्यादा असर
लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, आगरा, गोरखपुर और नोएडा जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ कस्बाई बाजारों में भी आभूषण कारोबार बड़ी संख्या में रोजगार देता है। सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक पहले ही ऊंचे दामों से परेशान हैं। ऐसे में खरीद टालने की अपील से बाजार में नकारात्मक संदेश गया है। एमसीएक्स में चांदी का भाव 2.77 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि खुले बाजार में यह करीब 2.17 लाख रुपये किलो बिक रही है। वहीं सोने के लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बने रहने से आम ग्राहक पहले ही सीमित खरीद कर रहे हैं।
पर्यटन और विवाह उद्योग पर भी असर
इसका सीधा संबंध पर्यटन, होटल, खानपान, आयोजन प्रबंधन और विवाह उद्योग से भी है। यूपी में भव्य शादियों, धार्मिक आयोजनों और पारिवारिक समारोहों में बड़ी मात्रा में आभूषण खरीद होते हैं। यदि लोग शादी खर्च और गहनों की खरीद टालते हैं तो पर्यटन उद्योग पर भी असर दिखाई देगा। वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज और मथुरा जैसे धार्मिक शहरों में शादी और पर्यटन आधारित कारोबार में मंदी आ सकती है।
एआईजेजीएफ ने मांग की है कि सरकार मांग दबाने के बजाय देश में मौजूद निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाने की दिशा में काम करे। फेडरेशन ने विनियमित ‘बुलियन बैंक’ ढांचा बनाने का सुझाव दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा और महासचिव नितिन केडिया का कहना है कि फेडरेशन का कहना है कि घरों, मंदिरों, ट्रस्टों और स्वर्ण विनिमय कोषों में पड़ा सोना यदि नियंत्रित व्यवस्था के तहत ज्वैलर्स और निर्माताओं तक पहुंचे तो आयात निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। संगठन का दावा है कि सही नीति बनने पर भारत सालाना 200 से 300 टन तक सोने के आयात में कमी ला सकता है।