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यूपी: सिगरेट पीने से ज्यादा खतरनाक हो सकता है लगातार एक घंटे बैठे रहना, शरीर न चलना कई बीमारियों को दावत
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:33 AM IST
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सार
Symptoms of obesity: यदि आप लगातार एक घंटे तक बैठे रहते हैं और शरीर पूरी तरह से निष्क्रिय रहता है तो आप एक सिगरेट पीने जितना नुकसान कर रहे हैं।
बैठे रहना मोटापे की शुरुआत।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. भुवन चंद्र तिवारी के मुताबिक, सेहत के लिए शारीरिक गतिविधि बेहद जरूरी है। लगातार बैठे रहना नुकसानदायक हो सकता है। लगातार एक घंटे से ज्यादा बैठे रहना एक सिगरेट पीने जितना नुकसानदायक है। प्रो. तिवारी शनिवार को संस्थान में सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ फिजिकल एक्टिविटी एंड हेल्थ के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।
प्रो. भुवन तिवारी ने बताया कि शारीरिक गतिविधि की कमी हमें बीमार बना रही है। वयस्क और बुजुर्ग ही नहीं, बच्चे भी चपेट में हैं। पढ़ाई के दबाव, स्क्रीन टाइम की अधिकता और शारीरिक गतिविधियों की कमी बच्चों को बीमार बना रही है। बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। इस वजह से बच्चों में डायबिटीज और दिल की बीमारियां भी देखने को मिल रही हैं। सम्मेलन के आयोजक डॉ. सुमित दीक्षित ने बताया कि हमें बचपन से ही बच्चों के खानपान और जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा करके बीमारियों से उन्हें बचाया जा सकता है। सम्मेलन में स्कूलों के बच्चे और शिक्षक भी उपस्थित रहे।
10 से 19 वर्ष के बीच करीब तीन गुना बढ़ा मोटापा
केजीएमयू में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की डॉ. मोनिका अग्रवाल के अनुसार, 10 से 19 आयु वर्ग में 288 फीसदी मोटापा बढ़ा है। इसका मतलब करीब 15 वर्ष में मोटापे की दर तीन गुना बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि भारत में करीब 8.2 फीसदी बच्चे मोटे और 10 फीसदी सामान्य से ज्यादा वजन के हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. सलमान खान ने कहा कि मोटापा अब अमीरों की ही नहीं, गरीबों की बीमारी भी बन गया है। यह चिंताजनक स्थिति है।
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प्रो. भुवन तिवारी ने बताया कि शारीरिक गतिविधि की कमी हमें बीमार बना रही है। वयस्क और बुजुर्ग ही नहीं, बच्चे भी चपेट में हैं। पढ़ाई के दबाव, स्क्रीन टाइम की अधिकता और शारीरिक गतिविधियों की कमी बच्चों को बीमार बना रही है। बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। इस वजह से बच्चों में डायबिटीज और दिल की बीमारियां भी देखने को मिल रही हैं। सम्मेलन के आयोजक डॉ. सुमित दीक्षित ने बताया कि हमें बचपन से ही बच्चों के खानपान और जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा करके बीमारियों से उन्हें बचाया जा सकता है। सम्मेलन में स्कूलों के बच्चे और शिक्षक भी उपस्थित रहे।
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10 से 19 वर्ष के बीच करीब तीन गुना बढ़ा मोटापा
केजीएमयू में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की डॉ. मोनिका अग्रवाल के अनुसार, 10 से 19 आयु वर्ग में 288 फीसदी मोटापा बढ़ा है। इसका मतलब करीब 15 वर्ष में मोटापे की दर तीन गुना बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि भारत में करीब 8.2 फीसदी बच्चे मोटे और 10 फीसदी सामान्य से ज्यादा वजन के हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. सलमान खान ने कहा कि मोटापा अब अमीरों की ही नहीं, गरीबों की बीमारी भी बन गया है। यह चिंताजनक स्थिति है।