यूपी: ग्लैमर की दुनिया ने बनाई श्रद्धा दुबे से दूरी, 'सर' की पैरवी वाला भी कोई नहीं पहुंचा; न ही पहुंचा सामान
Shraddha Dubey: शिवा हत्याकांड की आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश की जमानत अर्जी को प्रभारी सीजेएम आलोक वर्मा ने शुक्रवार को खारिज कर दिया।
विस्तार
जिस श्रद्धा दुबे के एक इशारे पर कभी आम से लेकर खास तक दौड़े चले आते थे, शुक्रवार को वह अपनों की राह देखती रही। कभी कीमती गहनों और लाखों रुपये के पर्स के साथ किसान बाजार पहुंचने वाली श्रद्धा के लिए जेल की जिंदगी बिल्कुल अलग है। महज 10 दिन में बदले हालात के बीच उसे दिनभर किसी अपने के आने की उम्मीद रही लेकिन शाम तक कोई मिलने नहीं पहुंचा।
महिला सर्किल की मुलाहिजा बैरक में बहन रश्मि के साथ बैठी श्रद्धा की निगाहें दरवाजे पर टिकी रही। जेल में मुलाकात की पर्ची लगने के बाद बंदी राइटर संबंधित को सूचना देने बैरक के बाहर आता है। श्रद्धा को भी इसी पुकार का इंतजार था। हर आहट पर उसकी नजरें दरवाजे की ओर उठती मगर दिन गुजरता रहा और इंतजार खत्म नहीं हुआ। चकाचौंध और ऐशो-आराम से दूर जेल की चारदीवारी में शुक्रवार का दिन श्रद्धा के लिए अपनों की प्रतीक्षा और जरूरी सामान की कमी के बीच बीता।
बृहस्पतिवार रात जेल में दाखिल होते समय श्रद्धा अपने साथ कपड़े और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें नहीं ले गई थी। इसका असर दैनिक कामकाज पर भी पड़ा। बहन रश्मि के साथ उसे कपड़ों का इंतजाम होने का इंतजार करना पड़ा। बाल संवारने तक के लिए श्रद्धा को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाहर की जिंदगी में सहजता से उपलब्ध रहने वाली सुविधाओं के बिना दिन गुजारना उसके लिए नई चुनौती बन गई। जेल सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा को किसी परिचित के मिलने आने की आस थी। उसे ‘सर’ की पैरवी का भी इंतजार रहा लेकिन शाम तक कोई उससे मिलने नहीं पहुंचा।
नहीं मिली जमानत
शिवा हत्याकांड की आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश की जमानत अर्जी को प्रभारी सीजेएम आलोक वर्मा ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। शिवा की हत्या हुई या उन्होंने आत्महत्या की, इसका पता करने के लिए पुलिस फोरेंसिक टीम की मदद से घटना का रिक्रिएशन करेगी। इसके लिए टीम तैयार कर ली गई है।
उधर, कोर्ट में शुक्रवार को तीनों आरोपियों को जमानत देने की मांग वाली अर्जी दी गई। अर्जी में कहा गया कि तीनों आरोपी पूर्णतया निर्दोष हैं और उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, बल्कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। कोर्ट में आरोपियों की ओर से अलग-अलग दी गई जमानत अर्जियों पर कहा गया कि उन्हें इस मामले में पुलिस ने फर्जी तरीके से गिरफ्तार कर 22 अक्तूबर को कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 31 अक्तूबर तक के लिए जेल भेज दिया था। वहीं, अभियोजन की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी लगातार पुलिस की पकड़ से फरार चल रहे थे। तीनों को नागपुर में महाराष्ट्र पुलिस एवं एसटीएफ टीम ने गिरफ्तार किया था। आरोपियों को ट्रांजिट डिमांड पर लखनऊ की सीजेएम कोर्ट में 22 अक्तूबर की देर शाम पेश किया गया था, जहां से कोर्ट ने आरोपियों को 31 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए कहा है कि अपराध गंभीर प्रकृति का है। लिहाजा, जमानत का कोई उचित आधार नहीं बनता है।