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यूपी: निखरेगी प्रदेश की राजधानी, जल्द मिलेगी नई विधानसभा; मेट्रो के नए फेज में आएगी तेजी; बनेंगे आईटी पार्क

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 12 Feb 2026 09:02 AM IST
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सार

UP Budget 2026: बुधवार को आए प्रदेश के बजट में राजधानी लखनऊ का विशेष ख्याल रखा गया है। इस बजट में चिकित्सा, मेट्रो के साथ  यूपी स्टार्टअप इन्क्यूबेटर हब पर भी बात की गई है।

UP: The state capital will be renovated, with a new legislative assembly soon; the new phase of the metro will
यूपी के बजट में लखनऊ को तोहफा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

राजधानी में मेट्रो के दूसरे चरण को रफ्तार देने के लिए प्रदेश सरकार ने बजट में 550 करोड़ रुपये दिए हैं। चारबाग से बसंतकुंज तक ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के फेज-1बी प्रोजेक्ट के लिए विभिन्न मदों में इस रकम की व्यवस्था की गई है।

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चारबाग से बसंतकुंज के बीच मेट्रो के दूसरे चरण का निर्माण 5801 करोड़ रुपये से कराया जाएगा। आधी रकम केंद्र व राज्य सरकारों से मिलेगी और बाकी ऋण लिया जाएगा। प्रोजेक्ट के लिए राज्यांश के अतिरिक्त 550 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। अगस्त 2025 में चारबाग से बसंतकुंज तक ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर तक मेट्रो के विस्तार को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने अपने अंश के 1450 करोड़ से अधिक का प्रावधान इस बजट में किया है।
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दूसरे चरण में करीब 12 किमी लंबे रूट पर सात स्टेशन भूमिगत और पांच एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाने हैं। यह रूट अमीनाबाद, चौक, यहियागंज, पांडेयगंज, केजीएमयू, इमामबाड़ा और रूमी गेट से होकर गुजरेगा। चारबाग में इंटरचेंज भूमिगत मेट्रो स्टेशन बनाया जाएगा। गौतमबुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी स्टेशन, मेडिकल चौराहा और चौक भूमिगत स्टेशन होंगे। ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मूसाबाग और वसंतकुंज एलिवेटेड स्टेशन होंगे।

मेट्रो प्रशासन ने पांचों एलिवेटेड स्टेशनों और एलिवेटेड सेक्शन के साथ बसंतकुंज डिपो से पांच लाइनों की क्षमता वाले 740 मीटर लंबे रैंप निर्माण का 492 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है। जल्द ही भूमिगत सेक्शन के निर्माण और रोलिंग स्टाक का टेंडर जारी होगा।

कुकरैल क्षेत्र में नाइट सफारी के काम में आएगी तेजी

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार कुकरैल क्षेत्र में नाइट सफारी का काम तय समय पर नहीं शुरू हो सका है। एक वर्ष पहले जारी बजट को वापस करते प्रदेश सरकार ने बजट- 2026 में एक करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करते हुए 207 करोड़ का बजट जारी किया है। उम्मीद है कि कोर्ट से अनुमति मिलने पर निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा।

यूपी सरकार ने वर्ष 2022 में कुकरैल नाइट सफारी और एडवेंचर पार्क के नाम से प्रोजेक्ट तैयार किया था। 855 एकड़ में नाइट सफारी बनाने के लिए 1510 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पहले चरण के काम के लिए 631 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं। बीते वर्ष 206 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से अनुमति न मिलने से काम शुरू नहीं हो सका।

कुकरैल नाइट सफारी के निदेशक रामकुमार ने बताया कि निर्माण कार्य की स्वीकृति के लिए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी, जो किसी वजह से नहीं हो सकी। अब अगली सुनवाई का इंतजार है। कोर्ट से अनुमति मिलने पर कार्य जल्द शुरू होगा। 207 करोड़ रुपये के बजट में से नाइट सफारी की बाउंड्री व अन्य शुरुआती कार्य में करीब सात करोड़ रुपये खर्च होंगे। एंट्री प्लाजा, पार्किंग, अस्पताल व अन्य कार्यों पर करीब 200 करोड़ खर्च होंगे। नाइट सफारी में पर्यटक ट्रॉम से रात में बाघ, तेंदुए, भालू और मगरमच्छ जैसे वन्य जीवों को देख सकेंगे। साथ ही एडवेंचर पार्क आकर्षण का केंद्र होगा।

कोर्ट में चल रही है सुनवाई
कुकरैल नाइट सफारी को पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के आधार पर विकसित किया जाना है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने वन्य जीव मानकों पर निर्माण कार्य न होने का हवाला दिया है। इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है।

राजधानी में बनेगा यूपी स्टार्टअप इन्क्यूबेटर हब

 बजट के दौरान राजधानी में 30 करोड़ रुपये की लागत से यू-हब (यूपी स्टार्टअप इन्क्यूबेटर हब) बनाने का एलान किया गया। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप विकास व उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए छह वर्ष पहले किया वादा भी पूरा किया है। यू-हब का मुख्यालय लखनऊ में और दूसरा इन्क्यूबेटर गौतमबुद्धनगर में बनाया जाएगा। प्रदेश सरकार ने देश के पहले स्टार्टअप मिशन निदेशालय के लिए 2.5 करोड़ रुपये की व्यवस्था भी की है।

सरकार के एलान से प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को बूस्टर डोज मिली है। सितंबर 2019 में योगी सरकार ने कार्यक्रम में यूपी एंजेल नेटवर्क के तहत स्टार्टअप को गति देने के लिए इनक्यूबेटर प्रोग्राम को लॉन्च करने का एलान किया था। इसके तहत अब लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में यह सिस्टम विकसित किया जाएगा।

यू-हब से ऐसे स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा, जिनके पास अच्छा आइडिया है और वह कंपनी बनने का माद्दा रखत हैं। हालांकि, जानकारी के अभाव में बाजार से संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे स्टार्टअप को रजिस्ट्रेशन, मार्केटिंग, विज्ञापन और ग्राहक तक आसान पहुंच की जानकारी देने के साथ उनके उद्यम को बूस्टअप किया जाएगा। विशेषज्ञों का पैनल ऐसे नवाचारों की मदद करेगा।

देश में तीसरे स्थान पर है यूपी
बीएसआईएस के अध्यक्ष विनायक नाथ ने बताया कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के मामले में यूपी देश में तीसरे स्थान पर है। महाराष्ट्र 60 हजार स्टार्टअप के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद कर्नाटक और फिर 40 हजार से ज्यादा स्टार्टअप के साथ उत्तर प्रदेश है। चौथे नंबर पर दिल्ली है।

पहली बार किसी सरकार ने की पहल
भारत स्टार्टअप एंड इनोवेशन सोसाइटी के अध्यक्ष विनायक नाथ का कहना है कि देश में पहली बार किसी सरकार ने स्टार्टअप इन्क्यूबेटर विकसित करने की बात कही है। सामान्य रूप से टेक्निकल यूनिवर्सिटी या निजी क्षेत्रों के इन्क्यूबेटर होते हैं। यूपी सरकार ने गौर किया है कि इतने बड़े प्रदेश में स्टार्टअप की असीम संभावनाएं हैं, जिससे स्टार्टअप इको सिस्टम विकसित किया जा रहा है। प्रदेश को स्टार्टअप इकोसिस्टम में देश में पहले स्थान पर लेकर जाना है।

10 करोड़ की लागत से आईटी पार्क भी मिलेंगे
आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर आगे ले जाने के लिए लखनऊ जैसे टियर-2 व टियर-3 शहरों में सूचना प्रौद्यौगिकी नीति के अनुसार आईटी पार्क विकसित किए जाएंगे। सरकार ने इसके लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इन आईटी पार्क से प्रशिक्षित युवाओं को कार्पोरेट सेक्टर में रोजगार मिल सकेगा।

नया विधानभवन बनाने की दिशा में एक और पहल

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यूपी विधानसभा - फोटो : अमर उजाला।

 शासन ने नया विधानभवन बनाने की दिशा में एक और पहल की है। प्रदेश सरकार के बजट में इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नया विधानभवन गोमतीनगर में सहारा समूह से वापस ली 245 एकड़ जमीन पर बनाने की तैयारी है। इसके लिए एलडीए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर रहा है।

प्राधिकरण ने करीब 10 महीने पहले सहारा शहर में अपने हिस्से की 75 एकड़ जमीन को कब्जे में लिया था। सितंबर में नगर निगम ने अपने हिस्से की 170 एकड़ जमीन लीज निरस्त करने के बाद कब्जे में ली थी। इस तरह कुल 245 एकड़ जमीन खाली हो गई है। अब इसी पर नया विधानभवन बनाने की तैयारी है।

यह जगह लोकेशन और आवागमन के लिहाज से बेहतर है। शासन के निर्देश पर जमीन की पैमाइश रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। उच्च स्तर पर यह लगभग तय हो गया है कि सहारा शहर की जमीन पर विधानभवन बनाया जाएगा। कंसल्टेंट ही विधानभवन की डीपीआर और डिजाइन तैयार करेगा।

लीज निरस्त होने के बाद खाली हुई है जमीन
नगर निगम की ओर से आवासीय योजना विकसित करने के लिए सहारा इंडिया हाउसिंग लिमिटेड कंपनी को 1994 में लाइसेंस पर शर्तों के तहत 170 एकड़ जमीन 30 वर्ष की लीज पर दी गई थी। इसमें 130 एकड़ में आवासीय कॉलोनी और 40 एकड़ में ग्रीन बेल्ट विकसित की जानी थी। शर्तों के उल्लंघन पर नगर निगम ने 1997 में लाइसेंस डीड निरस्त करने का नोटिस जारी किया था। लंबे समय तक यह मामला कानूनी विवाद में उलझा रहा। बीते वर्ष लीज के 30 साल पूरे होने पर नगर निगम ने इसे बढ़ाने के बजाय जमीन का कब्जा ले लिया। इसे लेकर कहा गया कि जिन शर्तों पर सहारा को जमीन दी गई, उसने उनका उल्लंघन किया। इस कारण लीज निरस्त की गई।

पीजीआई : बजट में करीब दोगुने का इजाफा होकर पहुंचा 2446 करोड़

 संजय गांधी पीजीआई को विश्व स्तर का चिकित्सा संस्थान बनाने के लिए सरकार ने धनवर्षा की है। संस्थान के बजट में करीब दोगुने का इजाफा करते हुए इस वर्ष 2,446 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बीते साल का बजट 1292 करोड़ रुपये था। बढ़ा हुआ बजट मुख्य रूप से संस्थान को क्वाटर्नरी हेल्थ केयर चिकित्सा केंद्र बनाने के लिए है।

संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने बताया कि संस्थान को 359 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों के लिए मिले हैं। निर्माण कार्य और उपकरण व संयंत्र के लिए जो राशि आवंटित की गई है, उसका उपयोग क्वाटर्नरी हेल्थ केयर चिकित्सा केंद्र स्थापित करने में किया जाएगा। क्वाटर्नरी हेल्थ केयर चिकित्सा सेवाओं का सबसे उच्च और विशिष्ट स्तर है। इस पहल के तहत संस्थान में 500 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक समेकित केंद्र में कार्डियक साइंसेज, न्यूरो साइंसेज, रीनल साइंसेज, गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल, हेपैटिक सेवाएं, क्रिटिकल केयर, मैटरनल और फेटल मेडिसिन, ऑन्कोलॉजी, जीन एवं सेल थेरेपी और दुर्लभ बीमारियों की जीनोमिक सेवाओं का विकास किया जाएगा। इनके साथ ही ट्रॉमा सेंटर की सुविधाओं में इजाफा होगा।

एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज
पीजीआई का एपेक्स ट्रॉमा सेंटर आने वाले दिनों में गंभीर मरीज और घायलों के इलाज का प्रमुख केंद्र बनने वाला है। सरकार ने एपेक्स ट्रॉमा सेंटर को 100 करोड़ आवंटित किए हैं। अभी तक केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पर ही घायलों का सबसे ज्यादा बोझ है। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सुविधा बढ़ने से मरीजों का बोझ केजीएमयू से कम होगा।

निशुल्क इलाज के लिए दो करोड़ रुपये
संस्थान में गरीबी रेखा से नीचे, विपन्न और लावारिस मरीजों के इलाज के लिए दो करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इस राशि से इनका निशुल्क इलाज किया जाएगा। इसके साथ ही संस्थान को वेतन मद में 900 और गैर वेतन मद में 375 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

दोबारा शुरू होगा किफायती उड़ानों का सुहाना सफर

राजधानी से प्रयागराज, बरेली, अजमेर आदि शहरों के लिए किफायती उड़ानें दोबारा शुरू होंगी। रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (उड़ान) के तहत संचालित होने वाली फ्लाइटों का किराया ढाई हजार रुपये के करीब होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम लोगों की सुविधा के लिए उड़ान स्कीम का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य सस्ती उड़ानें उपलब्ध कराना था। कई रूटों पर विमान सेवाएं शुरू की गईं। इनमें एटीआर श्रेणी का 80 सीटर विमान इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन विमानन कंपनियों ने धीरे-धीरे सस्ती सेवाओं को बंद कर दिया। अब प्रदेश सरकार ने इसके लिए बजट में प्रावधान किया है। इससे रनवे निर्माण सहित उड़ान स्कीम के काम कराए जाएंगे। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि लखनऊ से एक बार फिर सस्ती उड़ानों का सफर जल्द शुरू होगा।

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