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Lucknow News: दीक्षांत समारोह में जहां मेधावियों का हुआ सम्मान, वहीं राजभवन की जांच रिपोर्ट ने खोली व्यवस्थाओं की पोल
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डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय
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लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को एक ओर मेधावी विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान हुआ, तो दूसरी ओर उसी मंच से विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल भी उठे। राजभवन की जांच टीम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव एवं विशेष कार्याधिकारी डॉ. एसएम बोबडे ने बताया कि विश्वविद्यालय में दिव्यांग छात्र-छात्राओं को मिलने वाली कई मूलभूत सुविधाएं संतोषजनक नहीं मिलीं। रिपोर्ट में अकादमी भवन में गंदगी, बेसमेंट में कूड़ा, जर्जर होती इमारतें और खराब पड़े फायर फाइटिंग सिस्टम जैसी कई कमियां सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि दीक्षांत समारोह से कुछ दिन पहले राजभवन की टीम ने विश्वविद्यालय का निरीक्षण कर दिव्यांग छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का आकलन किया था। जांच में कुछ व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, जबकि कई स्थानों पर गंभीर खामियां सामने आईं।
रिपोर्ट में सामने आईं ये कमियां
जांच में पाया गया कि अकादमी भवन के वॉटर कूलर खराब हैं। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। सीलन के कारण दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है और मुख्य द्वार की सीढ़ियां जर्जर हैं। परिसर में बने मंच भी खराब स्थिति में हैं। बेसमेंट को कूड़ाघर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। अकादमी भवन के हॉल नंबर-दो की छत क्षतिग्रस्त हो रही है। प्रशासनिक भवन में साफ-सफाई का अभाव मिला और फायर फाइटिंग सिस्टम भी ठप पाया गया। रिपोर्ट में मेस की फीस अधिक होने और छात्रों की पसंद के अनुरूप भोजन नहीं मिलने का भी उल्लेख है। इसके अलावा पीएचडी शोधार्थियों के लिए आवश्यक उपकरणों की कमी भी सामने आई।
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इन व्यवस्थाओं की हुई सराहना
रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के बाहरी परिसर की साफ-सफाई को संतोषजनक बताया गया। पुस्तकालय में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध पुस्तकें और सहायक व्यवस्थाएं बेहतर पाई गईं। कुलपति कार्यालय की व्यवस्थाओं की भी सराहना की गई। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए अकादमिक कैलेंडर जारी करने तथा छात्रावासों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया।
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उन्होंने बताया कि दीक्षांत समारोह से कुछ दिन पहले राजभवन की टीम ने विश्वविद्यालय का निरीक्षण कर दिव्यांग छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का आकलन किया था। जांच में कुछ व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, जबकि कई स्थानों पर गंभीर खामियां सामने आईं।
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रिपोर्ट में सामने आईं ये कमियां
जांच में पाया गया कि अकादमी भवन के वॉटर कूलर खराब हैं। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। सीलन के कारण दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है और मुख्य द्वार की सीढ़ियां जर्जर हैं। परिसर में बने मंच भी खराब स्थिति में हैं। बेसमेंट को कूड़ाघर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। अकादमी भवन के हॉल नंबर-दो की छत क्षतिग्रस्त हो रही है। प्रशासनिक भवन में साफ-सफाई का अभाव मिला और फायर फाइटिंग सिस्टम भी ठप पाया गया। रिपोर्ट में मेस की फीस अधिक होने और छात्रों की पसंद के अनुरूप भोजन नहीं मिलने का भी उल्लेख है। इसके अलावा पीएचडी शोधार्थियों के लिए आवश्यक उपकरणों की कमी भी सामने आई।
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इन व्यवस्थाओं की हुई सराहना
रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के बाहरी परिसर की साफ-सफाई को संतोषजनक बताया गया। पुस्तकालय में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध पुस्तकें और सहायक व्यवस्थाएं बेहतर पाई गईं। कुलपति कार्यालय की व्यवस्थाओं की भी सराहना की गई। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए अकादमिक कैलेंडर जारी करने तथा छात्रावासों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया।