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शनि अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण के समय करें पंच दान, होगा हर समस्या का समाधान - 4 दिसम्बर, 2021
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शनि अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण के समय करें पंच दान, होगा हर समस्या का समाधान - 4 दिसम्बर, 2021

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बस्ती मंडल की रिपोर्ट :  कड़ा घमासान, सबका इम्तिहान, पिछले चुनाव की तरह एकतरफा नजर नहीं आ रहा माहौल

महर्षि वशिष्ठ की तपस्थली मखौड़ा, तथागत बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु और संत कबीर की महिमास्थली मगहर से आलोकित बस्ती मंडल में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जबर्दस्त लहर चली। यहां सपा और बसपा का सूपड़ा साफ  हो गया। मंडल की 13 सीटों में से भाजपा ने 12, तो एक सीट उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने जीत ली। उस समय कैसी बयार बह रही थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि छह बार विधायक रहे तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को आखिरी चुनाव की दुहाई भी नहीं बचा पाई। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा डुमरियागंज, बस्ती और संत कबीरनगर से अपने प्रत्याशी जिताने में कामयाब रही। पर, अब हालात पिछले विधानसभा चुनाव की तरह एकतरफा नजर नहीं आ रहे हैं। कम अंतर से चुनाव जीते कई विधायकों का पूरा दारोमदार ध्रुवीकरण के समीकरण पर टिका नजर आ रहा है।

प्रदेश में भाजपा सरकार बनी तो बस्ती मंडल से तीन मंत्री बनाकर इलाके को भरपूर अहमियत दी गई। सिद्धार्थनगर के बांसी से विधायक जयप्रताप सिंह को कैबिनेट, इसी जिले की इटवा से विधायक डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी और धनघटा (संत कबीरनगर) से श्रीराम चौहान को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। बस्ती व सिद्धार्थनगर को मेडिकल कॉलेज व कई लंबी सड़कों के साथ मंडल को कई सौगातें मिलीं। पर, इस सबके बावजूद कई विधायकों व मंत्रियों के खिलाफ  नाराजगी के स्वर सुनाई दे रहे हैं। परदे के पीछे हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के बीच की खींचतान भी लोगों की जुबान पर है। संत कबीरनगर में पूर्व सांसद व विधायक के बीच जूता कांड के तीन वर्ष बीतने के बावजूद ठाकुरवाद-ब्राह्मणवाद की भड़की चिंगारी अभी ठंडी नहीं हुई है।

मंडल में ब्राह्मण चेहरे के रूप में उभरे संत कबीरनगर के पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी की मृत्यु हो चुकी है, तो बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी का कद तेजी से बढ़ा है। वह संगठन में राष्ट्रीय मंत्री के साथ बिहार के प्रभारी बन चुके हैं। डुमरियागंज में सांसद जगदंबिका पाल की चिर-परिचित अंदाज की सियासत जारी है। वहीं, संत कबीरनगर में निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद बेटे प्रवीण निषाद को सांसद बनवाने और खुद एमएलसी बनने के बावजूद सीटों की सौदेबाजी को लेकर हर चौराहे पर चर्चा के केंद्र में हैं। विधानसभा चुनाव से पहले की सियासी तस्वीर ये है कि बिना विपक्ष के प्रत्याशी फाइनल हुए ही कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाने की चर्चा आम है। एक-एक सीट पर कई-कई लोग टिकट के लिए परेशान हैं। जातिवाद, नाराजगी व भितरघात की बनती पृष्ठभूमि में कई सीटों पर कांटे की टक्कर की जमीन तैयार होती नजर आ रही है। यह बात अलग है कि टिकट की मारामारी विरोधी दलों में भी काफी है।

दलबदल रुके तब तो साफ हो सियासी तस्वीर
2017 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही मंडल में दलबदल का दौर जारी है। बस्ती के हर्रैया से पिछला चुनाव सपा से लड़े पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस में चले गए थे। अब वह हाथी पर सवार हो चुके हैं। इसी तरह कप्तानगंज से बसपा प्रत्याशी रहे पूर्व विधायक राम प्रसाद चौधरी साइकिल का हैंडल थाम चुके हैं। संत कबीरनगर में भाजपा के एक विधायक का भाई सपा से टिकट मांग रहा है, तो सिद्धार्थनगर के एक पूर्व विधायक का भाई बसपा में लाइन लगाए है। बस्ती मंडल में कुर्मी और निषाद जातियों का कई सीटों पर अच्छा प्रभाव है। सपा और भाजपा दोनों ही इसे साधने के लिए हर कोशिश में लगे हैं। सपा ने राम प्रसाद चौधरी को गले लगा लिया तो भाजपा ने संजय चौधरी को जिला पंचायत अध्यक्ष बना दिया है।

बस्ती : बंद पड़ी हैं चीनी मिलें
अयोध्या में राममंदिर निर्माण शुरू हुआ तो पड़ोस के बस्ती का भी रंग-रूप बदलने लगा है। यहां तेजी से बहुमंजिला भवन आकार लेने लगे हैं। जमीन की कीमतें बढ़ गई हैं। वहीं, होटल और उद्योग के लिए जमीन तलाशने वालों की आवाजाही भी बढ़ गई है। यानी तस्वीर बदल रही है। पर, एक स्याह तस्वीर यह भी है कि बस्ती व वाल्टरगंज की चीनी मिलें बंद पड़ी हैं जिससे रोजगार के अवसर नहीं बढ़ पा रहे हैं। मुंडेरवा के राम अवतार कहते हैं, बेशक बड़ी सड़कों का काम हुआ है। हालात बदले हैं। पर, गांवों को जोड़ने वाली सड़कों का बुरा हाल है। ऊंचगांव जमोहे से लेकर बस्ती-गोरखपुर हाईवे तक की सड़क खराब पड़ी है। वहीं हर्रैया के उमानाथ पांडेय कहते हैं, ईमानदारी से कहें तो पहले के मुकाबले सड़क, स्कूल व बिजली के काफी काम हुए हैं। पर, मुद्दों से ज्यादा चुनाव में प्रत्याशी कौन है, यह मायने रखता है।

संत कबीरनगर : नए उद्योग लगे नहीं, बंद हो रहे पुराने 
खलीलाबाद के हीरालाल रामनिवास पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमरनाथ पांडेय संत कबीरनगर के औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित नहीं हो पाने पर सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं, नए उद्योग तो लग नहीं रहे, पुराने भी या तो बंद हो गए या बंदी जैसे हालात में हैं। क्षेत्रीय गांधी आश्रम बंदी की कगार पर है। कभी यह गोरखपुर और बस्ती मंडल का बड़ा केंद्र हुआ करता था। मगहर की सूती मिल बंद पड़ी है। यहां कभी 500 से लेकर 800 तक कर्मचारी काम करते थे। खलीलाबाद की चीनी मिल और डालडा फैक्टरी भी बंद हैं। जिला गठन के ढाई दशक बीत चुके हैं, लेकिन मुख्यालय पर आज तक बस अड्डा नहीं बन पाया। जिला मुख्यालय से मेंहदावल व धनघटा को जोड़ने वाली सड़कें बेहद खराब हालत में हैं। घाघरा और राप्ती की बाढ़ की समस्या से भी निजात नहीं मिल पाई। बहरहाल मगहर में अकादमी का निर्माण हो रहा है, जिससे पर्यटन की दृष्टि से विकास की उम्मीद बढ़ी है। पर, इसे कुशीनगर के गौतमबुद्ध स्थली की तरह विकसित करने की जरूरत है। इसी तरह, 29 वर्ग किलोमीटर में फैली बखिरा झील विकसित की जाए तो बड़ा पर्यटक केंद्र बन सकती है। डॉ. पांडेय कहते हैं, चिंताजनक बात ये है कि जनप्रतिनिधि चुनाव खत्म होते ही इन मुद्दों से मुंह मोड़ लेते हैं।

सिद्धार्थनगर : पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो कपिलवस्तु
भगवान बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाया। यहां के जमशेद खान बताते हैं, कपिलवस्तु में अच्छे होटलों की कमी है। हेलीपैड बना है, लेकिन एयर बस सेवा नहीं शुरू हो सकी। शहर से कपिलवस्तु जाने वाली सड़क तो चौड़ी होनी ही चाहिए। बाढ़ की समस्या से निजात दिलाने के लिए तीन दशक पहले जलकुंडी परियोजना बनी थी, पर ठंडे बस्ते में चली गई। बाढ़ के कारण शोहरतगढ़, कपिलवस्तु, डुमरियागंज, बांसी एवं इटवा क्षेत्र के लोग प्रभावित होते हैं। जिले में उद्योग बढ़ें तो रोजगार के अवसर बढ़ें। 
डुमरियागंज, शोहरतगढ़, इटवा गन्ने का क्षेत्र है। चीनी मिल शुरू हो तो किसानों की तरक्की का रास्ता साफ हो सकता है। कपिलवस्तु, शोहरतगढ़ में काला नमक धान की खेती होती है। काला नमक धान या चावल की खुशबू न उड़ जाए, इसलिए इन्हें एयरकंडीशंड हॉल में रखने की जरूरत होती है। बांसी क्षेत्र के खेसरहा में सीएफएससी निर्माणाधीन है, जिसमें एयरकंडीशंड गोदाम और कुटाई की सुविधा होगी। किसान चाहते हैं कि ऐसी कई सीएफसी की और जरूरत है। काला नमक चावल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए। वहीं, नहरों की सफाई हो तो किसानों को महंगा डीजल खरीदकर सिंचाई से मुक्ति मिले।
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लखनऊ : अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक प्रांशु मिश्रा को, कहा- गरिमापूर्ण है पत्रकारिता का पेशा

लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयुक्त महाविद्यालय आर्यकुल कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के परास्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्र प्रांशु मिश्रा को ‘स्वर्गीय अतुल माहेश्वरी मेमोरियल जर्नलिज्म गोल्ड मेडल’ दिया जाएगा। यह पदक ‘अमर उजाला’ द्वारा प्रायोजित है। मंगलवार को विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूची में इस मेडल के लिए प्रांशु के नाम पर मुहर लग गई। 

प्रांशु ने बताया कि पत्रकारिता एक गरिमापूर्ण प्रोफेशन है। इससे हमें समाज में बदलाव लाने का अवसर मिलता है और समाज को हम काफी कुछ दे सकते हैं। यह हमें काफी कुछ सीखने का अवसर देती है। इससे हम किसी एक क्षेत्र में बंधे नहीं रहते हैं। इसीलिए यह पेशा चुना है। पत्रकारिता से हमें विभिन्न नजरिए से समाज को देखने का अवसर मिलता है। 

प्रांशु ने कहा कि आज डिजिटल पत्रकारिता या न्यू जर्नलिज्म काफी तेजी से बढ़ रहा है। यह टीवी तक सीमित नहीं है बल्कि सोशल मीडिया, ब्लॉग आदि के रूप में भी है। प्रांशु को अमेरिका की प्रतिष्ठित फेलोशिप इंटरनेशनल लीडरशिप विजिटर प्रोग्राम (आईवीएलपी) भी मिली है।
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यूपी : डेल्टा से ज्यादा खतरनाक नहीं है नया वैरिएंट, स्कूल से लेकर अस्पतालों तक आज से होगी फोकस सैंपलिंग

प्रदेश में कोविड के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर हर स्तर पर सावधानी बरती जा रही है। पूरे प्रदेश में बुधवार से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदि में फोकस सैंपलिंग कराई जाएगी। जांच का दायरा भी डेढ़ लाख से बढ़ाकर ढाई लाख कर दिया गया है। कोरोना के नए स्वारूप को लेकर सभी जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीम, निगरानी कमेटी, कोविड कंट्रोल रूम को सक्रिय कर दिया गया है। महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. वेदब्रत सिंह ने बताया कि बुधवार से सभी जिलों में फोकस सैंपलिंग कराई जाएगी।

रेलवे व बस स्टेशनों, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, अस्पताल, वृद्धा आश्रम समेत प्रमुख चौराहों पर फोकस सैंपलिंग कराई जाएगी। जांच का दायरा भी हर दिन औसतन ढाई लाख कर दिया गया है। इसमें 70 फीसदी से ज्यादा जांच आरटीपीसीआर से की जाएगी।  विदेश से आने वालों की जांच अनिवार्य रूप से की जा रही है। इन्हें 14 दिन तक क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं।

गाइडलाइन तैयार करने में जुटी सरकार
चिकित्सा विशेषज्ञों की राज्य परामर्शदाता समिति भी नए स्वरूप को लेकर इलाज की गाइडलाइन तैयार करने में जुटी है। इस समिति के अध्यक्ष एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो आरके धीमान हैं। कमेटी पहली और दूसरी लहर के अनुभव और विदेशों में इस स्वारूप को लेकर दिए जा रहे उपचार का अध्ययन कर रही है। इसके बाद नए सिरे से उपचार की गाइडलाइन तैयार की जा रही है।

राज्य परामर्शदाता समिति के अध्यक्ष एवं एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो आरके धीमान ने बताया कि नया वैरिएंट तेजी से फैलता है और इसकी संक्रमण दर भी अधिक है। लेकिन यह यह डेल्टा की तुलना में ज्यादा खतरनाक नहीं है। नए स्वरूप से मृत्यु दर की बढ़ने की आशंका कम है। ओमिक्रॉन को लेकर ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसे जल्द ही शासन को सौंप दिया जाएगा। एसजीपीजीआई की विशेष टीम ने ड्राफ्ट में कोरोना के इस नए वैरिएंट को लेकर यूपी में बरती जाने वाली सावधानियां, खतरे, टीकाकरण के बाद इसके प्रभावों के बारे में चर्चा की है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ सालों में बढ़ाई गई चिकित्सीय सुविधाओं के चलते अब प्रदेश इस नए स्वरूप से निपटने के लिए तैयार है। 
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सतर्कता बढ़ाई गई: आतंकी इनपुट को लेकर अयोध्या में अलर्ट, पुलिस बल ने भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था को परखा

आतंकी इनपुट को लेकर रामनगरी अयोध्या में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है। गुरुवार को एसएसपी शैलेश पांडेय के नेतृत्व में राम जन्मभूमि सहित पूरी अयोध्या में एटीएस सहित पुलिस बल ने भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था को परखा।

सबसे पहले राम जन्मभूमि की सुरक्षा व्यवस्था में लगे सुरक्षाकर्मियों को अलर्ट रहने की हिदायत दी गई। इसके बाद एटीएस की टीम ने हनुमानगढ़ी सहित रामकोट के क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर लोगों को सुरक्षा के प्रति आश्वस्त कराया।

शहर के मुख्य मार्ग से लेकर नया घाट के सरयू तट तक पैदल भ्रमण कर सुरक्षा में लगे कर्मियों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। क्षेत्राधिकारी आरके चतुर्वेदी ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए मिली आतंकी थ्रेट और छह दिसंबर को लेकर अयोध्या की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। प्रवेश मार्गों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

उन्होंने आम जनमानस से भी अपील किया है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु की सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। तीन दिसंबर से अयोध्या में राम विवाह उत्सव भी शुरू हो रहा है। ऐसे में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना को लेकर भी पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है।
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पैदल मार्च कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते पुलिसकर्मी व एसटीएफ। पैदल मार्च कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते पुलिसकर्मी व एसटीएफ।

यूपी: डिप्टी सीएम केशव मौर्य के बयान पर मायावती बोलीं, हिंदू-मुस्लिम भाजपा का आखिरी हथकंडा, हार रही है भाजपा

बसपा सुप्रीमो मायावती ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के ट्वीट अयोध्या - काशी में मंदिर निर्माण जारी है, अब मथुरा की तैयारी है, को लेकर कहा कि यह भाजपा की चुनाव में हार की पुष्टि करता है। हिंदू-मुस्लिम भाजपा का आखिरी हथकंडा है। इससे जनता को सावधान रहना चाहिए।

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा विधानसभा आमचुनाव के नजदीक दिया गया बयान कि अयोध्या व काशी में मन्दिर निर्माण जारी है अब मथुरा की तैयारी है। यह भाजपा के हार की आम धारणा को पुख्ता करता है। इनके इस आखिरी हथकंडे से अर्थात् हिन्दू-मुस्लिम राजनीति से भी जनता सावधान रहे।



उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के एक ट्वीट ने भाजपा के धार्मिक राष्ट्रवाद के आगामी एजेंडे के नए संकेत दिए है। मौर्य ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि अयोध्या और काशी में मंदिर का निर्माण चल रहा है। मथुरा की तैयारी है। जय श्रीराम, जय शिव शंभू और जय श्रीराधे कृष्ण।

इस ट्वीट के बाद सियासी गलियारों में मथुरा को लेकर भाजपा की आगामी योजना के कयास शुरू हो गए हैं। विहिप सहित तमाम हिंदू संगठन वर्षों से मथुरा में श्रीकृष्ण विराजमान (श्रीकृष्ण जन्मभूमि) के पास स्थित शाही ईदगाह को हटाने की मांग कर रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान का दावा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की जमीन पर ईदगाह बनाई गई है। करीब 190 साल पुराना विवाद अभी अदालत में विचाराधीन है।
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यूपी: स्टाप बिलिंग में चल रहे खेल पर पावर कॉर्पोरेशन सख्त, उदासीन तीन दर्जन एक्सईएन को नोटिस

पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन स्टाप बिलिंग (स्थायी विच्छेदन की प्रक्रिया पूरी होने तक बिलिंग न किए जाने) की आड़ में चल रहे खेल पर सख्त हो गया है। प्रबंधन के संज्ञान में कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें स्टॉप बिलिंग के बावजूद कनेक्शन चलते पाए गए हैं।

स्टॉप बिलिंग के मामले में उदासीन ऐसे तीन दर्जन से ज्यादा अधिशासी अभियंताओं (एक्सईएन) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही सभी बिजली कंपनियों को कार्ययोजना बनाकर इन मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने को कहा गया है।

पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने बिजली कंपनियों को स्टॉप बिलिंग के श्रेणी में रखे गए उपभोक्ताओं के परिसरों का स्थलीय निरीक्षण कराने का निर्देश देते कहा है कि अगर कनेक्शन बंद है तो तत्काल अस्थायी विच्छेदन की कार्यवाही पूरी की जाए और अगर कनेक्शन चलता पाया जाता है तो तुरंत फिर से बिलिंग शुरू की जाए।

प्रदेश भर में बड़ी संख्या में ऐसे बिजली उपभोक्ता हैं, जिन्होंने स्थायी रूप से बिजली कटवा ली है। लेकिन इसकी औपचारिकता पूरी न होने से इन्हें स्टॉप बिलिंग की श्रेणी में डालकर बिलिंग बंद कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार बिजली कंपनियों में डाटा क्लीन के नाम पर लगभग 36 लाख उपभोक्ताओं को स्टॉप बिलिंग की श्रेणी में डाल दिया गया है।

स्टॉप बिलिंग की श्रेणी में डाले गए उपभोक्ताओं पर 30 हजार करोड़ रुपये बकाया है। हाल ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जब यह मुद्दा उठाया तो पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन सक्रिय हुआ। कॉर्पोरेशन के निर्देश के बाद बिजली कंपनियों ने संबंधित एक्सईएन को कारण बताओ नोटिस जारी करके स्टॉप बिलिंग के मामले में जवाब तलब किया है। सभी वितरण खंडों को इस माह के अंत तक स्टॉप बिलिंग के मामलों का निस्तारण करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियां स्टॉप बिलिंग के मामलों का निस्तारण कराकर कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये बकाया वसूल सकती हैं। 
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अमर उजाला इंपैक्ट: मुख्यमंत्री योगी की नाराजगी पड़ी भारी, रोडवेज सेवा प्रबंधक हटाया गया

राजधानी लखनऊ में बसों को दुरुस्त रख पाने की नाकामी लखनऊ परिक्षेत्र (लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली) के सेवा प्रबंधक को भारी पड़ी। रोडवेज प्रबंधन ने बृहस्पतिवार सुबह उन्हें हटा दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद सेवा प्रबंधक विक्रमजीत सिंह को लखनऊ से हटा कर कानपुर स्थित केंद्रीय कार्यशाला में सेवा प्रबंधक के पद स्थानांतरित कर दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ये कार्रवाई रोडवेज के एमडी नवदीप रिणवा ने की। विक्रमजीत सिंह की जगह पर केंद्रीय कार्यशाला कानपुर में तैनात केके सिंह को लखनऊ परिक्षेत्र का सेवा प्रबंधक बनाया गया है।

‘अमर उजाला’ ने एक दिसंबर को ‘2000 के स्पेयर पार्ट के लिए 11 दिन खड़ी रही जनरथ बस ’ शीर्षक से खबर को छाप करके सवारियों को होने वाली दिक्कत एवं रोडवेज के नुकसान का खुलासा किया था। मुख्यमंत्री ने इस खबर का संज्ञान लेकर बीते बुधवार को ही रोडवेज अफसरों को अल्टीमेटम दिया था कि बस यात्रियों को परेशानी हुई तो अफसरों की खैर नहीं है।

मुख्यमंत्री ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। एमडी ने इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट आने के बाद बृहस्पतिवार सुबह विक्रमजीत सिंह को बसों के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी से हटा दिया। वहीं एमडी के द्वारा पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
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यूपी : दिव्यांगों व दिव्यांगता के लिए काम करने वालों को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विश्व दिव्यांगजन दिवस पर दिव्यांगजनों व दिव्यांगता के लिए काम करने वाली संस्थाओं को सम्मानित करेंगे। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय मोहान रोड पर शुक्रवार सुबह दस बजे होने वाले समारोह के लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से सूची जारी कर दी गई है।

इसमें लखनऊ के लव कुमार अवस्थी और शगुन सिंह के नाम भी शामिल हैं। जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी कमलेश ने बताया कि समारोह में बदायूं के अजय कुमार, महराजगंज के नागेन्द्र कुमार, इटावा आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की नीतू द्विवेदी, इरफाना तारीख और धीरज श्रीवास्तव गोरखपुर, डॉ. सी तुलसीदास और प्रो. मंगला कपूर वाराणसी, जीया राय आजमगढ़, सौरभ तिवारी डुमरियागंज और रति मिश्रा बांसी सिद्धार्थनगर को सम्मानित किया जाएगा।

इसके अलावा दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाली संस्थाएं कैफेबिटिली फाउंडेशन वाराणसी, भागीरथ सेवा संस्थान गाजियाबाद और प्रेमधाम चैरिटेबल सोसाइटी बिजनौर का भी सम्मान किया जाएगा।
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यूपी : बिना जांच कराए किसी यात्री का यूपी में प्रवेश नहीं, मास्क नहीं लगाने पर सख्त कार्रवाई

कई देशों में नए वैरिएंट के बढ़ते मामलों के बीच सर्वाधिक आबादी वाले प्रदेश के सभी बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सर्तकता बरतने के निर्देश बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दिए हैं। सीएम ने उच्चस्तरीय बैठक में मास्क को अनिवार्य करने और कोविड प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन कराने के आदेश जारी किए हैं। सीएम ने कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर प्रदेश में जीनोम सीक्वेंसिंग की रफ्तार को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मामले में गौतमबुधनगर के जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से प्रदेश आने वाले यात्रियों का विवरण उपलब्ध कराएंगे।

सीएम ने बैठक में कहा कि दूसरे देशों और प्रदेशों से यूपी आ रहे हर व्यक्ति की आरटीपीसीआर जांच की जाए। उन्होंने कहा कि बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के साथ ही बिना जांच किए किसी यात्री को बाहर न आने दिया जाए। पहले चरण में इंटरस्टेट कनेक्टिविटी वाले बस स्टेशन पर जांच को तेज़ी से बढ़ाते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतें। सीएम ने केंद्र सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइंस को प्रभावी रूप से लागू किए जाने के आदेश दिए।

प्रदेश में बीते 24 घंटों में हुई एक लाख 53 हजार 569 सैम्पल की जांच में कुल सात संक्रमितों की पुष्टि हुई। इसी अवधि में तीन संक्रमित कोरोना मुक्त भी हुए। आज प्रदेश में कुल एक्टिव कोविड केस की संख्या 92 है। उन्होंने कहा कि लखनऊ के केजीएमयू , पीजीआई, गोरखपुर, झांसी, मेरठ में तेजी से जीनोम सीक्वेंसिंग की व्यवस्था की जाए।

प्रदेश में पांच करोड़ तीन लाख अधिक लोगों को टीके की दोनों डोज देकर कोविड का सुरक्षा कवर प्रदान कर दिया गया है। 11 करोड़ 23 लाख लोगों ने टीके की पहली डोज प्राप्त कर ली है। यह संख्या टीकाकरण के लिए पात्र प्रदेश की कुल आबादी की लगभग 76.20 फीसदी से अधिक है। इस प्रकार प्रदेश में अब तक 16 करोड़ 27 लाख से अधिक कोविड वैक्सीन डोज लगाए जा चुके हैं। कोविड टेस्टिंग और टीकाकरण में उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कोविड टीकाकरण को और तेज करने के लिए ठोस प्रयास की जरूरत है। घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जाए। अब तक पहली डोज न पाने लेने वालों की अलग सूची तैयार कराएं। जिनका दूसरा डोज ओवरड्यू हो गया हो उनकी पृथक सूची बनाई जाए। दिव्यांग, अक्षम, निराश्रित, वृद्ध जनों से संपर्क कर उनका टीकाकरण कराएं। सीएमओ स्तर से ग्राम प्रधानों, पार्षदों का सहयोग लिया जाए। प्रदेश भर में पब्लिक एड्रेस सिस्टम की मदद से जागरूक करने की कवायद को शुरु किया जाए। ताकि  ज्यादा से ज्यादा लोग वैक्सीन का डोज प्राप्त कर सकें। कोविड पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए सावधानी और सतर्कता जरूरी है। विश्व के अनेक देशों में नए वैरिएंट के संक्रमित मिलने की संख्या में बढोतरी हो रही है। ऐसे में हमें बहुत सतर्कता-सावधानी की जरूरत है। 

उन्होंने कहा कि सभी जगहों पर मास्क को अनिवार्य कराएं। इसके अलावा दूसरे देशों और प्रदेशों से उत्तर प्रदेश आ रहे हर व्यक्ति की जांच जरूर की जाए। बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है, बिना किसी की जांच किए उसे बाहर न आने दिया जाए। केंद्र सरकार की तरफ से गाइडलाइंस को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। पहले चरण में इंटरस्टेट कनेक्टिविटी वाले बस स्टेशन पर जांच को तेज़ी से बढ़ाते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतें।

अब तक विभिन्न जिलों में कुल 525 ऑक्सीजन प्लांट क्रियाशील किये जा चुके हैं। शेष प्लान्ट की स्थापना का कार्य यथाशीघ्र पूरा किया जाए। प्रदेश की जनता को बेहतर सुविधा मिल सके इसके लिए परिवहन निगम की बसों को लेकर समीक्षा बैठक करें और बसों को जल्द से जल्द ठीक कराएं। प्रदेश के सभी कस्तूरबा गांधी विद्यालय, छात्रावास में सभी व्यवस्थाओं को ठीक किया जाए, इसको लेकर विभाग एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर समीक्षा करे और जवाबदेही तय करें।

एसजीपीजीआई के दोनों कोविड अस्पताल होंगे शुरू
कोविड के नए वैरिएंट को लेकर एसजीपीजीआई में मरीजों को भर्ती करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। संस्थान के ट्रॉमा में बने 254 और मुख्य भवन में बने 72 बेड वाले कोविड अस्पताल दोबारा शुरू की जाएंगे। मरीजों के बढ़ने पर पहले 72 बेड वाला अस्पताल क्रियाशील होगा, फिर ट्रॅामा सेंटर में मरीज भर्ती किए जाएंगे। 
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अडानी ग्रुप-आईआरबी बनाएंगे गंगा एक्सप्रेसवे : 594 किमी लंबे एक्सप्रेसवे का पीएम मोदी व सीएम योगी कर सकते हैं शिलान्यास

प्रयागराज से मेरठ तक प्रस्तावित 594 किमी लंबे छह लेन गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का जिम्मा अडानी समूह व आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को दिया गया है। देश के इस सबसे लंबे एक्सप्रेसवे का शिलान्यास दिसंबर के अंत तक पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं।

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) संजीव मित्तल की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सामने मंगलवार की देर शाम फाइनेंशियल बिड खोली गई। करीब 36 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए कुल तीन कंपनियों ने बोली लगाई थी। कंपनियों के चयन की औपचारिक घोषणा जल्द होगी। पहले चरण में मेरठ से अमरोहा तक का काम आईआरबी को मिला है। अमरोहा से प्रयागराज तक तीन चरणों का काम अडानी समूह करेगा।

इस एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। इसके दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर भी स्थापित किए जाएंगे। उप्र एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने पूरे प्रोजेक्ट को 12 पैकेज और चार ग्रुप में बांटा है।
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यूपी : आंगनबाड़ी वर्कर्स के लिए खुशखबरी, प्रदेश सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने के दिशा-निर्देश किए जारी

उत्तर प्रदेश सरकार ने पोषण अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर के लिए मासिक प्रोत्साहन देने संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस बारे में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने शासनादेश जारी कर दिया है। इसके तहत मासिक प्रोत्साहन मापदंड तय किए गए हैं।

आंगनबाड़ी वर्कर के लिए पोषण ट्रैकर एप डाउनलोड करना और लाभार्थियों का डाटा अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। लाभार्थियों को घर-घर जाकर टेक होम राशन वितरित करना, आंगनबाड़ी हेल्पर के लिए टेक होम राशन वितरण में सहयोग आदि प्रदान करना भी शामिल है।

शासनादेश के अनुसार,  प्रत्येक माह आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 0-6 वर्ष के कम से कम 80 प्रतिशत सामान्य और अंडरवेट बच्चों का मापन किया गया हो। आंगनबाड़ी वर्कर के मानदंडों को पूरा करने पर 500 रुपये दिए जाएंगे। इसी तरह आंगनबाड़ी सहायिका के मानदंड पूरा करने पर 250 रुपये दिए जाएंगे।
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टीईटी पेपर लीक : नोएडा के होटल में तय हुई थी 13 करोड़ की डील, अनूप और संजय के बीच तय हुआ था मामला

उत्तर प्रदेश में टीईटी पेपर लीक मामले में खुलासा हुआ है कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव संजय उपाध्याय और आरएसएम फिनसर्व लि. के निदेशक अनूप प्रसाद के बीच पुराने रिश्ते रहे हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व में संजय की तैनाती नोएडा में भी रही है।
 

प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले कई गिरोह सक्रिय

सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी एसटीएफ को जानकारी मिली है कि प्रश्नपत्र छपने का काम देने से पहले नोएडा के पांच सितारा होटल में संजय और अनूप के बीच मीटिंग भी हुई थी। यह काम 13 करोड़ रुपये का था, लेकिन काम देने से पहले न तो परीक्षा का काम लेने वाली कंपनी का टर्न ओवर देखा गया और न ही उसका सेटअप देखा गया। वहीं एसटीएफ के सूत्रों ने बताया कि आरएसएम को छपाई का काम मिलने के बाद से ही प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले कई गिरोह सक्रिय हो गए थे।

मुजफ्फरनगर पर टिकी एसटीएफ की नजर 
टीईटी पेपर लीक होने के मामले के तार मुजफ्फरनगर से भी जुड़ गए है। एसटीएफ के साथ ही जनपद पुलिस ने इस हाई प्रोफाइल मामले से जुड़े एक आरोपित की गोपनीय तरीके से तलाश शुरू की है। 28 नवंबर को प्रदेश में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) का पेपर था। शामली में एसटीएफ ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर उनके पास से एक ओरिजनल, नौ फोटो स्टेट कापी और चार प्रवेश पत्र बरामद किए थे। एक आरोपित फरार हो गया था। तीनों गिरफ्तार लोगों को जेल भेजा गया था। इस मामले के तार अब मुजफ्फरनगर से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि एसटीएफ ने सोमवार रात बागपत के बड़ौत के गांव छछरपुर निवासी दुकानदार राहुल चौधरी को गिरफ्तार किया है। उसके दो साथी किरठल निवासी फिरोज पुत्र सुलेमान और मुजफ्फरनगर के गांव शाह डब्बर निवासी बबलू उर्फ बलराम पुत्र किरणपाल फरार हो गए थे। तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। यदि पुलिस की माने तो गिरफ्तार राहुल ने बताया है कि उसने पेपर बबलू उर्फ बलराम से खरीदा था। फरार बबलू, गिरफ्तार राहुल का फुफेरा भाई है। बबलू चूंकि फरार है, इसी के चलते इस मामले के तार मुजफ्फरनगर से जुड़ते नजर आ रहे हैं। जिस कारण एसटीएफ की नजर मुजफ्फरनगर जनपद पर टिकी है। सूत्र बताते है कि एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस की मदद से बबलू की तलाश गोपनीय तरीके से शुरू की है। सीओ बुढ़ाना विनय गौतम ने बताया कि पुलिस गोपनीय रूप से आरोपी की तलाश कर रही है।
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शाहजहांपुर: गिरे पुल की होगी उच्चस्तरीय जांच, वेल के नीचे ऑर्टिजन बनने की आशंका

शाहजहांपुर में एक पुल के बड़े हिस्से के जमींदोज होने को सरकार ने गंभीरता से लिया है। सेतु निगम के एमडी योगेश पवार ने विशेषज्ञों के साथ बुधवार को मौका मुआयना किया। हालांकि, यह टीम किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। इसके सही कारणों की पड़ताल के लिए उच्चस्तरीय परीक्षण की जरूरत बताई जा रही है। पुल के वेल (कुआं) के नीचे ऑर्टिजन बनने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

शाहजहांपुर में कलान-मिर्जापुर क्षेत्र को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण 18 सौ मीटर लंबा कोलाघाट पुल सोमवार को तड़के पिलर धंसने से ढह गया था। करीब दो सौ मीटर हिस्सा जमींदोज होने से पुल तीन हिस्सों में बंट गया। यह पुल 2009 में बनाया गया था। कुछ अभियंता इसकी जांच सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) से कराने की जरूरत बताते हैं, ताकि असली कारण सामने आने पर भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

विशेषज्ञों ने ये आशंकाएं भी जताईं
पीडब्ल्यूडी के जानकारों का कहना है कि आजकल इस तरह की मशीनें उपलब्ध हैं, जो यह बता देती हैं कि पिलर (खंभा) समेत वेल की गहराई कितनी है। इससे आसानी से यह पता लगाया जा सकता है कि पुल का निर्माण तय डिजाइन के अनुसार हुआ या नहीं। ऐसा तो नहीं कि वेल की गहराई डिजाइन से कम कर दी गई हो, जो हादसे का कारण बना हो। यह भी देखना होगा कि वेल की तली पर कंक्रीट का ढांचा (तकनीकी भाषा में बॉटम प्लगिंग ऑफ वेल), मध्य भाग की प्लगिंग और वेल कैप (सबसे ऊपरी हिस्सा) मानक के अनुसार बनाया गया नहीं।

वेल की तली और कैप की कंक्रीट के ढांचे में तो कोई दिक्कत नहीं आई। वेल कैप फेल होने से भी खंभा नीचे धंस जाता है, जो पुल टूटने की वजह बनता है। अगर वेल में ऑर्टिजन बना होगा, तो पूरा स्ट्रक्चर सिकुड़ने लगता है, जिससे भी पिलर अंदर चला जाता है। पुल का जो हिस्सा गिरा है, उसके गर्डर और स्लैब गिरने पर भी नहीं टूटे हैं, इसलिए जानकारों का कहना है कि उसके ऊपरी हिस्से की क्वालिटी में कोई गड़बड़ नहीं मालूम पड़ रही है। अलबत्ता सही स्थिति जांच के बाद ही साफ हो सकती है।
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