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MP: सौरभ शर्मा की 100 करोड़ की काली कमाई मामले में लोकायुक्त जांच पूरी, मां-पत्नी समेत 15 से अधिक बनेंगे आरोपी
Mon, 17 Aug 2026 10:37 AM IST
भोपाल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: भोपाल ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2026 10:37 AM IST
सार
MP News: मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की कथित 100 करोड़ रुपये से अधिक की काली कमाई के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने जांच पूरी कर ली है। जांच में 52 किलो सोना, 11.60 करोड़ रुपये नकद समेत कई संपत्तियों को जांच के दायरे में लिया गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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सौरभ शर्मा केस
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के बहुचर्चित 100 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार की काली कमाई के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच में लावारिस इनोवा कार से बरामद 52 किलो सोना और 11.60 करोड़ रुपये नकद को लोकायुक्त ने सौरभ शर्मा की ही अवैध संपत्ति माना है। हालांकि, आयकर विभाग इसी वर्ष फरवरी में इस सोने और नकदी को बेनामी संपत्ति मानकर राजसात कर चुका है। अब लोकायुक्त पुलिस सौरभ शर्मा के साथ-साथ उसकी पत्नी, मां, साले, करीबियों और बिजनेस पार्टनर्स चेतन गौर, शरद जायसवाल समेत 15 से अधिक लोगों को आरोपी बनाकर अदालत में चालान पेश करने की अंतिम तैयारी कर रही है।
सरकार से अभियोजन स्वीकृति का इंतजार
मामले में चालान पेश करने के लिए फिलहाल राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से अभियोजन स्वीकृति मिलना बाकी है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, अगस्त माह के अंत तक सरकार से अभियोजन की मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। मंजूरी मिलते ही लोकायुक्त पुलिस सितंबर महीने में विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर देगी।
जमानत मिलने के बाद लोकायुक्त में बढ़ी हलचल
लगभग एक सप्ताह पहले ही जबलपुर हाईकोर्ट से सौरभ शर्मा को जमानत मिली है। आरोपी के जेल से बाहर आने के बाद लोकायुक्त संगठन हरकत में आ गया है। जांच एजेंसी जल्द से जल्द चालान पेश करना चाहती है, ताकि आरोपी सौरभ शर्मा बाहर रहकर मामले के अहम गवाहों को प्रभावित न कर सके और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो जाए।
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पांच एजेंसियों के शिकंजे में रही 'काली कमाई'
सौरभ शर्मा के खिलाफ 19 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त ने पहली बार छापे की कार्रवाई की थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच प्रमुख केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने अपनी जांच शुरू की।लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति का मुख्य भ्रष्टाचार मामला दर्ज किया। आयकर विभाग ने मेंडोरी गांव से इनोवा कार में मिला 52 किलो सोना और 11.60 करोड़ रुपये नकद बेनामी मानकर राजसात किया। प्रवर्तन निदेशालय ने लोकायुक्त की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर कार्रवाई की। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने इतने बड़े पैमाने पर मिले सोने की तस्करी और खरीद-बिक्री के स्रोतों की जांच की। इसके साथ ही भोपाल पुलिस सौरभ शर्मा की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों और फर्जीवाड़े की समानांतर जांच कर रही है।
100 करोड़ से अधिक की संपत्ति जांच के दायरे में
लोकायुक्त की विवेचना के अनुसार, सौरभ ने अपनी काली कमाई का बड़ा हिस्सा परिजनों और दोस्तों के नाम से बेनामी जमीनों, राजगढ़ में मछली पालन के कारोबार और भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित आवास व कार्यालय में निवेश कर रखा था। छापे के दौरान दो करोड़ 85 लाख रुपये नकद, 234 किलो चांदी की सिल्लियां और कई संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए गए थे। लोकायुक्त पुलिस की जांच के दायरे में करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति शामिल है। लोकायुक्त डीजी योगेश देशमुख के अनुसार, 50 से अधिक लोगों से गहन पूछताछ के बाद विवेचना का काम पूरा हो चुका है। शासन से स्वीकृति मिलते ही अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
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सरकार से अभियोजन स्वीकृति का इंतजार
मामले में चालान पेश करने के लिए फिलहाल राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से अभियोजन स्वीकृति मिलना बाकी है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, अगस्त माह के अंत तक सरकार से अभियोजन की मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। मंजूरी मिलते ही लोकायुक्त पुलिस सितंबर महीने में विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर देगी।
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जमानत मिलने के बाद लोकायुक्त में बढ़ी हलचल
लगभग एक सप्ताह पहले ही जबलपुर हाईकोर्ट से सौरभ शर्मा को जमानत मिली है। आरोपी के जेल से बाहर आने के बाद लोकायुक्त संगठन हरकत में आ गया है। जांच एजेंसी जल्द से जल्द चालान पेश करना चाहती है, ताकि आरोपी सौरभ शर्मा बाहर रहकर मामले के अहम गवाहों को प्रभावित न कर सके और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो जाए।
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पांच एजेंसियों के शिकंजे में रही 'काली कमाई'
सौरभ शर्मा के खिलाफ 19 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त ने पहली बार छापे की कार्रवाई की थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच प्रमुख केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने अपनी जांच शुरू की।लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति का मुख्य भ्रष्टाचार मामला दर्ज किया। आयकर विभाग ने मेंडोरी गांव से इनोवा कार में मिला 52 किलो सोना और 11.60 करोड़ रुपये नकद बेनामी मानकर राजसात किया। प्रवर्तन निदेशालय ने लोकायुक्त की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर कार्रवाई की। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने इतने बड़े पैमाने पर मिले सोने की तस्करी और खरीद-बिक्री के स्रोतों की जांच की। इसके साथ ही भोपाल पुलिस सौरभ शर्मा की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों और फर्जीवाड़े की समानांतर जांच कर रही है।
100 करोड़ से अधिक की संपत्ति जांच के दायरे में
लोकायुक्त की विवेचना के अनुसार, सौरभ ने अपनी काली कमाई का बड़ा हिस्सा परिजनों और दोस्तों के नाम से बेनामी जमीनों, राजगढ़ में मछली पालन के कारोबार और भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित आवास व कार्यालय में निवेश कर रखा था। छापे के दौरान दो करोड़ 85 लाख रुपये नकद, 234 किलो चांदी की सिल्लियां और कई संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए गए थे। लोकायुक्त पुलिस की जांच के दायरे में करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति शामिल है। लोकायुक्त डीजी योगेश देशमुख के अनुसार, 50 से अधिक लोगों से गहन पूछताछ के बाद विवेचना का काम पूरा हो चुका है। शासन से स्वीकृति मिलते ही अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
