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यूसीसी विरोध में मैदान में उतरे आरिफ मसूद: बोले- लिव-इन को बढ़ावा देने वाला कानून मंजूर नहीं, विरोध दर्ज कराएं
Mon, 15 Jun 2026 04:57 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 15 Jun 2026 04:57 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सुझाव प्रक्रिया के बीच कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद खुलकर मैदान में उतर आए हैं। मसूद ने प्रदेशभर के लोगों से सरकार के पोर्टल पर जाकर यूसीसी के खिलाफ सुझाव दर्ज करने की अपील की है। उन्होंने मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और आदिवासी समाज के साथ अन्य हिंदू समुदायों से भी इस प्रक्रिया में भाग लेने का आह्वान किया है।
Writing
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कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में शुरू की गई कवायद के खिलाफ कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मोर्चा खोल दिया है। मसूद ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रदेश के नागरिकों से सरकार द्वारा जारी सुझाव फॉर्म भरने और यूसीसी के विरोध में अपनी राय दर्ज कराने की अपील की है। आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जिस कॉमन सिविल कानून को लाने की तैयारी कर रही है, वह पूरी तरह गैर-जरूरी है और इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य अधिक दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके लिए आयोग का गठन किया है, जो विभिन्न जिलों में जाकर लोगों से सुझाव ले रहा है। साथ ही एक ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया गया है, जहां आम नागरिक अपनी राय दर्ज कर सकते हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप के मुद्दे पर सरकार को घेरा
आरिफ मसूद ने यूसीसी से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस कानून के जरिए लिव-इन रिलेशनशिप को वैधता और बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे भारतीय सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि ऐसे प्रावधानों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। मसूद ने कहा कि विवाह संस्था भारतीय समाज की बुनियाद है और किसी भी कानून को पारिवारिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से इस पहलू पर भी गंभीरता से विचार करने की अपील की।
मेरे जवाबों के आधार पर फॉर्म भरें
मसूद ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि उनके वीडियो में बताए गए जवाबों को आधार बनाकर सरकार के पोर्टल पर सुझाव दर्ज किए जाएं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भाग लें ताकि सरकार तक आम जनता की राय पहुंच सके।
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सिर्फ मुस्लिम समाज नहीं, सभी समुदायों से समर्थन मांगा
कांग्रेस विधायक ने अपनी अपील को केवल मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सिख, ईसाई, बौद्ध और आदिवासी समुदायों के साथ अन्य हिंदू समाज के लोगों से भी यूसीसी पर अपने विचार दर्ज करने की अपील की। मसूद ने कहा कि यह मुद्दा कई समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी वर्गों को इसमें भागीदारी करनी चाहिए।
यह भी पढ़ेें-एमपी में बनेगा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर, सीएम बोले- डेटा सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
ट्राइबल समाज का मुद्दा भी उठाया
अपने बयान में मसूद ने आदिवासी समुदायों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समुदायों को अलग श्रेणी में रखा जाता है, तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता नहीं कहा जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अलग-अलग वर्गों के लिए अलग व्यवस्था रखी जाएगी, तो समानता का दावा किस आधार पर किया जाएगा।
यह भी पढ़ेें-चिलचिलाती धूप में अर्धनग्न होकर सड़क पर लेटे अभ्यर्थी,शिक्षक भर्ती में पद वृद्धि की मांग,किया प्रदर्शन
यूसीसी पर तेज हुई सियासत
मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर सुझाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। भाजपा इसे समान कानून व्यवस्था और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस के कुछ नेता और विभिन्न सामाजिक संगठन इसके कई प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं। आरिफ मसूद का यह अभियान अब यूसीसी को लेकर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ता नजर आ रहा है। फिलहाल सरकार की ओर से गठित आयोग विभिन्न वर्गों से सुझाव जुटा रहा है, वहीं विपक्षी दल और सामाजिक संगठन भी अपने-अपने स्तर पर लोगों को इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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लिव-इन रिलेशनशिप के मुद्दे पर सरकार को घेरा
आरिफ मसूद ने यूसीसी से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस कानून के जरिए लिव-इन रिलेशनशिप को वैधता और बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे भारतीय सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि ऐसे प्रावधानों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। मसूद ने कहा कि विवाह संस्था भारतीय समाज की बुनियाद है और किसी भी कानून को पारिवारिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से इस पहलू पर भी गंभीरता से विचार करने की अपील की।
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मेरे जवाबों के आधार पर फॉर्म भरें
मसूद ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि उनके वीडियो में बताए गए जवाबों को आधार बनाकर सरकार के पोर्टल पर सुझाव दर्ज किए जाएं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भाग लें ताकि सरकार तक आम जनता की राय पहुंच सके।
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सिर्फ मुस्लिम समाज नहीं, सभी समुदायों से समर्थन मांगा
कांग्रेस विधायक ने अपनी अपील को केवल मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सिख, ईसाई, बौद्ध और आदिवासी समुदायों के साथ अन्य हिंदू समाज के लोगों से भी यूसीसी पर अपने विचार दर्ज करने की अपील की। मसूद ने कहा कि यह मुद्दा कई समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी वर्गों को इसमें भागीदारी करनी चाहिए।
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ट्राइबल समाज का मुद्दा भी उठाया
अपने बयान में मसूद ने आदिवासी समुदायों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समुदायों को अलग श्रेणी में रखा जाता है, तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता नहीं कहा जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अलग-अलग वर्गों के लिए अलग व्यवस्था रखी जाएगी, तो समानता का दावा किस आधार पर किया जाएगा।
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यूसीसी पर तेज हुई सियासत
मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर सुझाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। भाजपा इसे समान कानून व्यवस्था और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस के कुछ नेता और विभिन्न सामाजिक संगठन इसके कई प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं। आरिफ मसूद का यह अभियान अब यूसीसी को लेकर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ता नजर आ रहा है। फिलहाल सरकार की ओर से गठित आयोग विभिन्न वर्गों से सुझाव जुटा रहा है, वहीं विपक्षी दल और सामाजिक संगठन भी अपने-अपने स्तर पर लोगों को इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
