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Bhoapl News: 90 डिग्री ब्रिज के बाद अब टॉवर रोड पर बवाल, हाईटेंशन लाइन के नीचे से गुजर रही सड़क,लोगों में दहशत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 11 Feb 2026 05:59 PM IST
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सार
भोपाल के करोंद इलाके में हाईटेंशन टॉवर के नीचे से सार्वजनिक सड़क निकाली गई है, जिससे लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। घनी आबादी के बीच से गुजर रही इस सड़क को स्थानीय लोग ‘एफिल टॉवर रोड’ कह रहे हैं। बारिश के दौरान करंट फैलने का डर भी बना रहता है। बिजली कंपनी टॉवर शिफ्ट करने पर विचार कर रही है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है।
हाईटेंशन बिजली टॉवर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अजीबोगरीब निर्माणों को लेकर चर्चा में रहने वाली राजधानी भोपाल में अब एक और मामला सुर्खियों में है। करोंद इलाके की विनायक कॉलोनी में हाईटेंशन बिजली टॉवर के ठीक नीचे से सार्वजनिक सड़क निकाल दी गई है। स्थानीय लोग इसे तंज कसते हुए ‘भोपाल का एफिल टॉवर’ कह रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यह सड़क रोजाना खतरे के साये में गुजरती है।
नीचे से पैदल यात्री, दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं
घनी आबादी के बीच खड़े इस ऊंचे टॉवर के नीचे से पैदल यात्री, दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं। शुरुआत में यह इलाका खाली था, लेकिन समय के साथ यहां मकान बन गए और आबादी बढ़ती चली गई। अब स्थिति यह है कि टॉवर और हाईटेंशन लाइन के ठीक नीचे से लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही हो रही है।
यह भी पढ़ें-एमपी में दोहरे मौसम का असर, दिन में गर्मी, रात में ठिठुरन, नए सिस्टम से बदलेगा मौसम
बिजली करंट फैलने का डर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि भारी वाहन यहां से नहीं निकल पाते और बारिश के दिनों में बिजली करंट फैलने का डर और ज्यादा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता है। उनका कहना है कि राजधानी में इस तरह की लापरवाही गंभीर हादसे को न्योता दे सकती है।यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब शहर में पहले 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज और छोटे मेट्रो स्टेशन जैसी संरचनाएं चर्चा का विषय बन चुकी हैं। अब हाईटेंशन टॉवर के नीचे बनी यह सड़क भी सवाल खड़े कर रही है कि आखिर योजना और सुरक्षा मानकों का पालन कितना हो रहा है।
यह भी पढ़ें-DPI में रिटायरमेंट के अगले दिन ही दोबारा पोस्टिंग? कांग्रेस ने खोला मोर्चा,विधानसभा में गूंजेगा मामला
टॉवर को शिफ्ट करने के विकल्पों पर विचार
बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक टॉवर को शिफ्ट करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी और जमीन संबंधी दिक्कतों के कारण फैसला लंबित है। इधर, स्थानीय लोग जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।फिलहाल ‘एफिल टॉवर रोड’ नाम से चर्चित यह सड़क हर दिन सैकड़ों लोगों के लिए जोखिम भरा सफर बन गई है, और शहर एक और अनोखे लेकिन चिंताजनक निर्माण को लेकर बहस में है।
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नीचे से पैदल यात्री, दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं
घनी आबादी के बीच खड़े इस ऊंचे टॉवर के नीचे से पैदल यात्री, दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं। शुरुआत में यह इलाका खाली था, लेकिन समय के साथ यहां मकान बन गए और आबादी बढ़ती चली गई। अब स्थिति यह है कि टॉवर और हाईटेंशन लाइन के ठीक नीचे से लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही हो रही है।
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बिजली करंट फैलने का डर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि भारी वाहन यहां से नहीं निकल पाते और बारिश के दिनों में बिजली करंट फैलने का डर और ज्यादा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता है। उनका कहना है कि राजधानी में इस तरह की लापरवाही गंभीर हादसे को न्योता दे सकती है।यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब शहर में पहले 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज और छोटे मेट्रो स्टेशन जैसी संरचनाएं चर्चा का विषय बन चुकी हैं। अब हाईटेंशन टॉवर के नीचे बनी यह सड़क भी सवाल खड़े कर रही है कि आखिर योजना और सुरक्षा मानकों का पालन कितना हो रहा है।
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टॉवर को शिफ्ट करने के विकल्पों पर विचार
बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक टॉवर को शिफ्ट करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी और जमीन संबंधी दिक्कतों के कारण फैसला लंबित है। इधर, स्थानीय लोग जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।फिलहाल ‘एफिल टॉवर रोड’ नाम से चर्चित यह सड़क हर दिन सैकड़ों लोगों के लिए जोखिम भरा सफर बन गई है, और शहर एक और अनोखे लेकिन चिंताजनक निर्माण को लेकर बहस में है।

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