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Bhopal: यूनियन कार्बाइड के आसपास पानी के 63 में 43 नमूने दूषित, गैस पीड़ित बोले- बनेगी भागीरथपुरा जैसी स्थिति

Fri, 31 Jul 2026 04:51 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 31 Jul 2026 04:51 PM IST
सार

यूनियन कार्बाइड के आसपास 30 बस्तियों से लिए 63 पानी के नमूनों में 43 में मल के बैक्टीरिया मिलने का दावा किया गया है। गैस पीड़ित संगठनों ने नगर निगम पर दूषित पानी सप्लाई करने का आरोप लगाते हुए भागीरथपुरा जैसी स्थिति की चेतावनी दी और सीवेज व्यवस्था व स्वतंत्र जल जांच की मांग की।

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Bhopal: 43 out of 63 samples from the vicinity of Union Carbide found contaminated; gas tragedy survivors warn
गैस त्रासदी पीड़ितों से जुड़े चार संगठनों की प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास रहने वाले लोगों के सामने पेयजल का संकट एक बार फिर गंभीर रूप में सामने आया है। गैस त्रासदी पीड़ितों से जुड़े चार संगठनों ने पानी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि क्षेत्र की बस्तियों में पहुंच रहे पानी के बड़ी संख्या में नमूने मल से दूषित मिले हैं। संगठनों ने इसके लिए भोपाल नगर निगम की जल और सीवेज व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संगठनों के मुताबिक इस महीने प्रभावित इलाकों की 30 बस्तियों से नलों के पानी के 63 नमूने लिए गए। जांच में 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म यानी मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए। संगठनों का दावा है कि इस आंकड़े के आधार पर करीब 70 प्रतिशत नमूने दूषित मिले हैं।
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19 बस्तियों में दूषित पानी पहुंचने का दावा
भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि जिन नमूनों की जांच की गई, उनमें से 43 के दूषित मिलने का मतलब है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों तक सुरक्षित पेयजल नहीं पहुंच रहा।
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उन्होंने यह भी दावा किया कि बड़े तालाब से आने वाले पानी के 90 प्रतिशत नमूने जांच में दूषित पाए गए, जबकि कोलार बांध से सप्लाई किए जाने वाले पानी के 25 प्रतिशत नमूनों में भी फीकल कोलीफॉर्म मिला।
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घर-घर बीमारी फैलने का आरोप
गैस पीड़ित संगठनों का कहना है कि कारखाने के आसपास के मोहल्लों में लंबे समय से दूषित पानी की समस्या बनी हुई है। उनके मुताबिक कई परिवारों में एक साथ दस्त और उल्टी की शिकायतें सामने आ रही हैं। निजी चिकित्सालयों में टाइफाइड के मामले बढ़ने का दावा भी संगठनों ने किया है। भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि प्रभावित इलाकों में जहरीले कचरे के कारण पानी की गुणवत्ता को लेकर पहले भी गंभीर चिंता जताई जा चुकी है। उनका कहना है कि लोगों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए वर्षों पहले से व्यवस्था किए जाने की मांग उठती रही है।

आठ साल पुरानी सीवेज समस्या अब भी बरकरार
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि अगस्त 2018 में पानी में मल मिलने की शिकायतों के बाद प्रभावित इलाकों में सीवर लाइन और जल निकासी व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम ने काम पूरा करने का भरोसा दिलाया था, लेकिन आठ साल बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।


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भागीरथपुरा का हवाला देकर कार्रवाई की मांग
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने कहा कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे के बाद जागने के बजाय अभी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने दूषित पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने और पानी की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच व्यवस्था शुरू करने की मांग की। संगठनों ने चेतावनी दी कि समय रहते समस्या नहीं सुलझाई गई तो भोपाल में भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसे गंभीर हालात पैदा हो सकते हैं।





 
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