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भोपाल गाइडलाइन रेट विवाद: सिर्फ दर बढ़ाना समाधान नहीं, पूरी वैल्यूएशन सिस्टम में सुधार जरूरी, क्रेडाई का सुझाव
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 24 Mar 2026 07:35 PM IST
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सार
भोपाल गाइडलाइन दरों को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। एक ओर प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी ओर क्रेडाई ने साफ कर दिया है कि केवल रेट बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरी मूल्यांकन प्रणाली में संरचनात्मक सुधार अब जरूरी हो गया है।
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल गाइडलाइन दरों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर और प्रशासन के बीच एक बार फिर बहस तेज हो गई है। क्रेडाई भोपाल ने स्पष्ट कहा है कि केवल सर्किल रेट बढ़ाना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यूएशन फिलॉसफी में सुधार की आवश्यकता है। एक दिन पहले जिला मूल्यांकन समिति ने शहर की कुल 740 लोकेशन पर गाइडलाइन में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इनमें से कई इलाके ऐसे हैं, जहां पर गाइडलाइन 181 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। वहीं, कुल 63 में से 34 दावे-आपत्ति खारिज कर दिए गए हैं। पंजीयन विभाग ने एक महीने के अंदर 100 लोकेशन और बढ़ा दी।
क्रेडाई की आपत्ति, सिस्टम में बदलाव की जरूरत
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि अब यह मुद्दा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे केंद्रीय स्तर पर अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की जरूरत है। उनके अनुसार गाइडलाइन को हर स्थिति में अंतिम मानकर लागू नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में देखा जाना चाहिए।
अलग मूल्यांकन नीति की मांग
क्रेडाई ने रेंज-बेस्ड गाइडलाइन लागू करने, री-ट्रांसफर पर स्टाम्प ड्यूटी समायोजन, कृषि भूमि पर अनावश्यक प्रावधानों के युक्तिकरण, कमर्शियल प्रॉपर्टी में फ्लोर-वाइज यथार्थवादी दरें तय करने और ग्रीन बेल्ट, नदी-नाले, जलाशय तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों की भूमि के लिए अलग मूल्यांकन नीति की मांग की है। साथ ही लंबित एग्रीमेंट वाली संपत्तियों के लिए सीमित अवधि की एमनेस्टी स्कीम और कम से कम तीन साल की स्थिर गाइडलाइन नीति का सुझाव भी दिया गया है।
राजस्व बनाम बाजार वास्तविकता
क्रेडाई का कहना है कि गाइडलाइन दरों को बाजार की वास्तविक स्थिति, भूमि उपयोग और उपयोगिता के आधार पर तय किया जाना चाहिए। संगठन ने जोर दिया कि राजस्व का स्थायी आधार केवल दरों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि वैध लेन-देन (वॉल्यूम) में वृद्धि है। पारदर्शी और संतुलित नीति से ही निवेश, अफोर्डेबिलिटी और बाजार का भरोसा मजबूत हो सकता है।
यह भी पढ़ें-शिक्षक भर्ती में पद वृद्धि की मांग, भोपाल में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, खून से सीएम को लिखा पत्र
इन इलाकों में सबसे ज्यादा उछाल
निर्मल सिटी (भानपुर): 6,400- 18,000 रु./वर्गमी. (181% वृद्धि)
मुर्गी बाजार (जहांगीराबाद): 32,000 - 80,000 रु./वर्गमी. (150% वृद्धि)
निशातपुरा रोड: अलग-अलग लोकेशंस में 166% तक उछाल
प्रमुख क्षेत्रों के नए-पुराने रेट
क्षेत्र पुराना रेट नया रेट बढ़ोतरी
मेंडोरा-मेंडोरी 6,000 रु./वर्गमी. 10,000 रु./वर्गमी. +67%
मेंडोरा (कृषि भूमि) 1 करोड़/हेक्टेयर 1.5 करोड़/हेक्टेयर +50%
भौंरी (प्लॉट) 14,000 रु./वर्गमी. 10,000 रु./वर्गमी. - 29% (घटोतरी)
यह भी पढ़ें-मुस्लिम समाज का प्रदर्शन,गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग,बोले-इस्लाम में गाय का मांस खाना हराम
इन इलाकों में 60% तक बढ़ोतरी
एयरपोर्ट रोड क्षेत्र: 25% से 50% तक वृद्धि
अयोध्या बायपास: 14% से 60% तक उछाल
बावड़ियाकलांः मिसरोद: 8% से 20% तक बढ़ोतरी
नीलबड़: 10% से 20% तक महंगे प्लॉट
कोलार क्षेत्र: 2.5% से 22% तक वृद्धि
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क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि अब यह मुद्दा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे केंद्रीय स्तर पर अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की जरूरत है। उनके अनुसार गाइडलाइन को हर स्थिति में अंतिम मानकर लागू नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में देखा जाना चाहिए।
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अलग मूल्यांकन नीति की मांग
क्रेडाई ने रेंज-बेस्ड गाइडलाइन लागू करने, री-ट्रांसफर पर स्टाम्प ड्यूटी समायोजन, कृषि भूमि पर अनावश्यक प्रावधानों के युक्तिकरण, कमर्शियल प्रॉपर्टी में फ्लोर-वाइज यथार्थवादी दरें तय करने और ग्रीन बेल्ट, नदी-नाले, जलाशय तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों की भूमि के लिए अलग मूल्यांकन नीति की मांग की है। साथ ही लंबित एग्रीमेंट वाली संपत्तियों के लिए सीमित अवधि की एमनेस्टी स्कीम और कम से कम तीन साल की स्थिर गाइडलाइन नीति का सुझाव भी दिया गया है।
राजस्व बनाम बाजार वास्तविकता
क्रेडाई का कहना है कि गाइडलाइन दरों को बाजार की वास्तविक स्थिति, भूमि उपयोग और उपयोगिता के आधार पर तय किया जाना चाहिए। संगठन ने जोर दिया कि राजस्व का स्थायी आधार केवल दरों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि वैध लेन-देन (वॉल्यूम) में वृद्धि है। पारदर्शी और संतुलित नीति से ही निवेश, अफोर्डेबिलिटी और बाजार का भरोसा मजबूत हो सकता है।
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इन इलाकों में सबसे ज्यादा उछाल
निर्मल सिटी (भानपुर): 6,400- 18,000 रु./वर्गमी. (181% वृद्धि)
मुर्गी बाजार (जहांगीराबाद): 32,000 - 80,000 रु./वर्गमी. (150% वृद्धि)
निशातपुरा रोड: अलग-अलग लोकेशंस में 166% तक उछाल
प्रमुख क्षेत्रों के नए-पुराने रेट
क्षेत्र पुराना रेट नया रेट बढ़ोतरी
मेंडोरा-मेंडोरी 6,000 रु./वर्गमी. 10,000 रु./वर्गमी. +67%
मेंडोरा (कृषि भूमि) 1 करोड़/हेक्टेयर 1.5 करोड़/हेक्टेयर +50%
भौंरी (प्लॉट) 14,000 रु./वर्गमी. 10,000 रु./वर्गमी. - 29% (घटोतरी)
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इन इलाकों में 60% तक बढ़ोतरी
एयरपोर्ट रोड क्षेत्र: 25% से 50% तक वृद्धि
अयोध्या बायपास: 14% से 60% तक उछाल
बावड़ियाकलांः मिसरोद: 8% से 20% तक बढ़ोतरी
नीलबड़: 10% से 20% तक महंगे प्लॉट
कोलार क्षेत्र: 2.5% से 22% तक वृद्धि

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