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Bhopal News: मध्य भारत का प्रमुख मेडिकल हब बन रहा एम्स, राष्ट्रीय सम्मेलन जी-सर्ग में जुटे देशभर के डॉक्टर
Sat, 25 Jul 2026 06:39 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 25 Jul 2026 06:39 PM IST
सार
एम्स भोपाल में 26 जुलाई तक राष्ट्रीय शल्य चिकित्सा सम्मेलन जी-सर्ग आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से आए 120 युवा डॉक्टर और शीर्ष विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य युवा सर्जनों को आधुनिक सर्जरी तकनीकों, शोध और सीखने का राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।
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एम्स भोपाल में तीन दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन जी-सर्ग का शुभारंभ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एम्स भोपाल के सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा 26 जुलाई तक आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन जी-सर्ग (G-SERG) का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. माधवानन्द कर, डीन डॉ. रजनीश जोशी और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विकास गुप्ता की मौजूदगी में शुरू हुए इस सम्मेलन को चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यह आयोजन सिर्फ एक कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को बदलने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है।
देश में शल्य चिकित्सा की नई दिशा
इस सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों से आए 120 से अधिक युवा रेजिडेंट डॉक्टर और देश के नामचीन विशेषज्ञ भोपाल में एक साथ जुटे हैं।सम्मेलन के जरिए भोपाल को राष्ट्रीय स्तर पर शल्य चिकित्सा शिक्षा और शोध के मुख्य केंद्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है। देश भर से आए विशेषज्ञ यहां सामान्य शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम अनुसंधानों पर मंथन कर रहे हैं।
युवा सर्जनों को सीधे राष्ट्रीय दिग्गजों से सीखने का मौका
देशभर के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 120 स्नातकोत्तर रेजिडेंट डॉक्टरों को डॉ. चिंतामणि, डॉ. रत्ना चोपड़ा, डॉ. संजय जैन (पूर्व अध्यक्ष, एएसआई) और डॉ. अरविंद राय जैसे भारत के नामचीन शल्य चिकित्सकों से सीधे संवाद और मार्गदर्शन का फायदा मिल रहा है। सम्मेलन का सीधा फायदा यह होगा कि युवा डॉक्टर सामान्य शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में आ रही सबसे एडवांस तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों से अपडेट हो रहे हैं। इससे आने वाले समय में सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और त्वरित रिकवरी वाली बन सकेगी।
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यह भी पढ़ें-धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भोपाल में छात्रों का जश्न: ढोल-नगाड़ों के बीच मिठाई बांटी, बोले-अभी तो शुरुआत
शोध और नए विचारों को राष्ट्रीय पहचान
आयोजन अध्यक्ष डॉ. श्याम लाल के अनुसार, यह मंच युवा सर्जनों को अपने शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर दे रहा है। इससे देश के मेडिकल सेक्टर में गुणवत्तापूर्ण रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और नए शल्य चिकित्सा मॉडल तैयार होंगे। जब देश के युवा रेजिडेंट डॉक्टर आधुनिकतम तकनीकों और वैश्विक मानकों से प्रशिक्षित होंगे, तो इसका अंतिम और सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को मिलेगा। अस्पतालों में जटिल से जटिल ऑपरेशन भी अधिक सफलता दर के साथ संभव हो सकेंगे। आयोजन सचिव डॉ. मूरत सिंह यादव ने बताया कि इस सम्मेलन से देश भर के चिकित्सा संस्थानों के बीच एक पेशेवर नेटवर्क स्थापित हो रहा है। यह डॉक्टरों के बीच ज्ञान साझा करने और भविष्य में जटिल मामलों में एक-दूसरे के सहयोग के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
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देश में शल्य चिकित्सा की नई दिशा
इस सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों से आए 120 से अधिक युवा रेजिडेंट डॉक्टर और देश के नामचीन विशेषज्ञ भोपाल में एक साथ जुटे हैं।सम्मेलन के जरिए भोपाल को राष्ट्रीय स्तर पर शल्य चिकित्सा शिक्षा और शोध के मुख्य केंद्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है। देश भर से आए विशेषज्ञ यहां सामान्य शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम अनुसंधानों पर मंथन कर रहे हैं।
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युवा सर्जनों को सीधे राष्ट्रीय दिग्गजों से सीखने का मौका
देशभर के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 120 स्नातकोत्तर रेजिडेंट डॉक्टरों को डॉ. चिंतामणि, डॉ. रत्ना चोपड़ा, डॉ. संजय जैन (पूर्व अध्यक्ष, एएसआई) और डॉ. अरविंद राय जैसे भारत के नामचीन शल्य चिकित्सकों से सीधे संवाद और मार्गदर्शन का फायदा मिल रहा है। सम्मेलन का सीधा फायदा यह होगा कि युवा डॉक्टर सामान्य शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में आ रही सबसे एडवांस तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों से अपडेट हो रहे हैं। इससे आने वाले समय में सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और त्वरित रिकवरी वाली बन सकेगी।
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शोध और नए विचारों को राष्ट्रीय पहचान
आयोजन अध्यक्ष डॉ. श्याम लाल के अनुसार, यह मंच युवा सर्जनों को अपने शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर दे रहा है। इससे देश के मेडिकल सेक्टर में गुणवत्तापूर्ण रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और नए शल्य चिकित्सा मॉडल तैयार होंगे। जब देश के युवा रेजिडेंट डॉक्टर आधुनिकतम तकनीकों और वैश्विक मानकों से प्रशिक्षित होंगे, तो इसका अंतिम और सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को मिलेगा। अस्पतालों में जटिल से जटिल ऑपरेशन भी अधिक सफलता दर के साथ संभव हो सकेंगे। आयोजन सचिव डॉ. मूरत सिंह यादव ने बताया कि इस सम्मेलन से देश भर के चिकित्सा संस्थानों के बीच एक पेशेवर नेटवर्क स्थापित हो रहा है। यह डॉक्टरों के बीच ज्ञान साझा करने और भविष्य में जटिल मामलों में एक-दूसरे के सहयोग के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
