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Bhopal News: एमपी में बनेगा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर, सीएम बोले- डेटा सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Dinesh Sharma
Updated Mon, 15 Jun 2026 02:53 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश सरकार राज्य में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह केंद्र साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देगा। केंद्र साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सीएम मोहन यादव ने साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की घोषणा की।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों और डेटा सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है। यह घोषणा उन्होंने सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने’ विषयक परामर्श कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ साइबर अपराधों का स्वरूप भी लगातार बदल रहा है। ऐसे में राज्य को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने बताया कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से प्रस्तावित रिसर्च सेंटर साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ये भी पढ़ें- CM Mohan Yadav: ई-व्हीकल से भीमनगर पहुंचकर सीएम ने चौंकाया, बोर्ड टॉपर चांदनी के घर गए; साथ में ली सेल्फी
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डॉ. यादव ने कहा कि आज के समय में डेटा की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। यदि किसी नागरिक की जीवनभर की जमा पूंजी साइबर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन ठगी के जरिए हड़प ली जाए तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के डिजिटल विश्वास को मजबूत बनाने और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने समय रहते डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने और संभावित खतरों के प्रति समाज को जागरूक करने का कार्य किया है। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं ने पारदर्शिता बढ़ाने के साथ लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने में अहम योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध और डीपफेक जैसी नई चुनौतियों से मुकाबले के लिए केवल प्रतिक्रिया आधारित नहीं, बल्कि पूर्वानुमान और सतत निगरानी पर आधारित व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। प्रस्तावित रिसर्च सेंटर साइबर हमलों की समय रहते पहचान और रोकथाम में भी मदद करेगा। कार्यशाला में प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेलवेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य के कई विभागों को डिजिटल नवाचारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है और इसी उद्देश्य से साइबर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। देशभर से आए विशेषज्ञों ने कार्यशाला में साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न नीतिगत और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ साइबर अपराधों का स्वरूप भी लगातार बदल रहा है। ऐसे में राज्य को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने बताया कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से प्रस्तावित रिसर्च सेंटर साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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डॉ. यादव ने कहा कि आज के समय में डेटा की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। यदि किसी नागरिक की जीवनभर की जमा पूंजी साइबर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन ठगी के जरिए हड़प ली जाए तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के डिजिटल विश्वास को मजबूत बनाने और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने समय रहते डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने और संभावित खतरों के प्रति समाज को जागरूक करने का कार्य किया है। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं ने पारदर्शिता बढ़ाने के साथ लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने में अहम योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध और डीपफेक जैसी नई चुनौतियों से मुकाबले के लिए केवल प्रतिक्रिया आधारित नहीं, बल्कि पूर्वानुमान और सतत निगरानी पर आधारित व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। प्रस्तावित रिसर्च सेंटर साइबर हमलों की समय रहते पहचान और रोकथाम में भी मदद करेगा। कार्यशाला में प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेलवेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य के कई विभागों को डिजिटल नवाचारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है और इसी उद्देश्य से साइबर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। देशभर से आए विशेषज्ञों ने कार्यशाला में साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न नीतिगत और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की।

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