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Bhopal News: ई-केवाईसी बनी रसोई गैस की नई अड़चन, भोपाल में 15% उपभोक्ताओं की सिलेंडर सप्लाई ठप
Tue, 28 Jul 2026 01:47 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 28 Jul 2026 01:47 PM IST
सार
भोपाल में ई-केवाईसी पूरी नहीं होने से करीब 1.35 लाख (15%) रसोई गैस उपभोक्ताओं की सिलेंडर डिलीवरी प्रभावित है। एजेंसियां मौखिक निर्देशों का हवाला देकर आपूर्ति रोक रही हैं, जबकि कंपनियां लिखित आदेश से इनकार कर रही हैं। इससे उपभोक्ताओं और गैस एजेंसियों के बीच विवाद बढ़ रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में रसोई गैस की ई-केवाईसी प्रक्रिया अब हजारों परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर बुकिंग के बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही। गैस एजेंसियों का दावा है कि मौखिक निर्देशों के आधार पर ऐसे उपभोक्ताओं की आपूर्ति रोकी जा रही है, जबकि तेल कंपनियां डिलीवरी रोकने के किसी लिखित आदेश से इनकार कर रही हैं। इस स्थिति से उपभोक्ता और एजेंसियां दोनों असमंजस में हैं। भोपाल में एचपी, भारत गैस और इंडियन ऑयल के करीब 9 लाख घरेलू गैस उपभोक्ता हैं। इनमें लगभग 15 प्रतिशत यानी करीब 1.35 लाख उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। एजेंसियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से ऐसे उपभोक्ताओं को सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की जा रही, जिससे शिकायतों का अंबार लग गया है।
पहचान सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट का अभियान
तेल कंपनियों के अनुसार ई-केवाईसी अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं की पहचान का सत्यापन करना, फर्जी और दोहरे कनेक्शन खत्म करना तथा रिकॉर्ड को अद्यतन करना है। उपभोक्ता आधार और मोबाइल नंबर के सत्यापन के साथ गैस एजेंसी या कंपनी के ऑनलाइन माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं।
लिखित आदेश नहीं, फिर भी डिलीवरी पर असर
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि उन्हें डिलीवरी रोकने का कोई लिखित आदेश नहीं मिला है, लेकिन मौखिक निर्देशों के आधार पर आपूर्ति प्रभावित हो रही है। गैस वितरक संघ के अध्यक्ष बीएस शर्मा का कहना है कि इससे 15 से 20 प्रतिशत उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं और एजेंसियों को रोजाना विवाद और शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह कंपनियों की तानाशाही है ई-केवाईसी करने का केवल उन्हीं कनेक्शन धारी का नियम है जो सब्सिडी ले रहे हैं जैसे कि उज्ज्वला योजना।
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यह भी पढ़ें-अनाथ शावकों को जंगल में बसाया, 20 से ज्यादा बाघों ने अपनाया प्राकृतिक जीवन
अधिकारियों का पक्ष
गैस कंपनी अधिकारियों का कहना है कि ई-केवाईसी उपभोक्ताओं की सुविधा और रिकॉर्ड शुद्ध करने की प्रक्रिया है। डिलीवरी रोकने के संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। वहीं गैस एजेंसियों का कहना है कि मौखिक निर्देशों के कारण उन्हें उपभोक्ताओं को सिलेंडर देने में परेशानी आ रही है, जिससे विवाद की स्थिति बन रही है।
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पहचान सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट का अभियान
तेल कंपनियों के अनुसार ई-केवाईसी अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं की पहचान का सत्यापन करना, फर्जी और दोहरे कनेक्शन खत्म करना तथा रिकॉर्ड को अद्यतन करना है। उपभोक्ता आधार और मोबाइल नंबर के सत्यापन के साथ गैस एजेंसी या कंपनी के ऑनलाइन माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं।
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लिखित आदेश नहीं, फिर भी डिलीवरी पर असर
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि उन्हें डिलीवरी रोकने का कोई लिखित आदेश नहीं मिला है, लेकिन मौखिक निर्देशों के आधार पर आपूर्ति प्रभावित हो रही है। गैस वितरक संघ के अध्यक्ष बीएस शर्मा का कहना है कि इससे 15 से 20 प्रतिशत उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं और एजेंसियों को रोजाना विवाद और शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह कंपनियों की तानाशाही है ई-केवाईसी करने का केवल उन्हीं कनेक्शन धारी का नियम है जो सब्सिडी ले रहे हैं जैसे कि उज्ज्वला योजना।
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अधिकारियों का पक्ष
गैस कंपनी अधिकारियों का कहना है कि ई-केवाईसी उपभोक्ताओं की सुविधा और रिकॉर्ड शुद्ध करने की प्रक्रिया है। डिलीवरी रोकने के संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। वहीं गैस एजेंसियों का कहना है कि मौखिक निर्देशों के कारण उन्हें उपभोक्ताओं को सिलेंडर देने में परेशानी आ रही है, जिससे विवाद की स्थिति बन रही है।
