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Bhopal News: PM मोदी को जीतू पटवारी ने लिखा पत्र,MP में संस्थागत भ्रष्टाचार का आरोप,CM से इस्तीफा लेने की मांग
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Thu, 22 Jan 2026 05:07 PM IST
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सार
कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में प्रशासनिक भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्य सचिव के कथित बयान का हवाला देकर इसे संस्थागत भ्रष्टाचार बताया और मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस्तीफा लेने व स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में प्रशासनिक भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस ने बड़ा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में भ्रष्टाचार के संस्थागत स्वरूप” का आरोप लगाया है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से तत्काल इस्तीफा लिए जाने की मांग की है। पत्र में मुख्य सचिव के कथित बयान को आधार बनाते हुए कांग्रेस ने राज्य की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का दावा है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव द्वारा यह कथन सामने आया कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता। पटवारी ने इसे महज टिप्पणी नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में लेन-देन आधारित शासन व्यवस्था का सीधा संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि अगर यह बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, तब भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह तत्काल स्थिति स्पष्ट करे, क्योंकि इससे शासन की साख पर गहरा असर पड़ा है।
50% कमीशन’ के आरोप को मिला प्रशासनिक आधार
कांग्रेस ने पत्र में कहा कि पार्टी लंबे समय से मध्यप्रदेश में 50% कमीशन की बात उठा रही है, जिसे भाजपा सरकार राजनीतिक आरोप बताकर खारिज करती रही। लेकिन अब मुख्य सचिव के कथित बयान से यह आशंका और मजबूत हो गई है कि भ्रष्टाचार कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित और संरचित तंत्र के रूप में काम कर रहा है।
पैसा कहां तक जा रहा है? कांग्रेस ने उठाया सवाल
पत्र में यह भी सवाल उठाया गया है कि अगर जिला स्तर पर कलेक्टर पैसे लेकर काम कर रहे हैं, तो यह पैसा केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह सकता। कांग्रेस ने आशंका जताई कि यह राशि प्रशासनिक नेटवर्क, राजनीतिक संरक्षण और सत्ता-समर्थित बिचौलियों तक पहुंच रही होगी। पार्टी ने पूछा है कि सरकार बताए यह व्यवस्था किसके संरक्षण में चल रही है, किन जिलों में ज्यादा है और अब तक कितने अधिकारियों पर वास्तविक कार्रवाई हुई है।
यह भी पढ़ें-माता-पिता के निधन के बाद सिर्फ बड़े बच्चे को मिलेगी पारिवारिक पेंशन
सरकार पर नियंत्रण खत्म होने का आरोप
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि नौकरशाही बेलगाम हो चुकी है, शिकायत निवारण तंत्र विफल है और जिला प्रशासन पर “वसूली तंत्र” बनने के आरोप लग रहे हैं। पार्टी ने इसे सुशासन नहीं, बल्कि राज्य सत्ता की नैतिक विफलता करार दिया। पत्र के अंत में जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री के नारे ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मध्यप्रदेश में बिना पैसे काम नहीं होने की स्थिति है, तो यह न केवल जनता के अधिकारों का हनन है, बल्कि केंद्र सरकार के घोषित सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
यह भी पढ़ें-रिव्यू मीटिंग में कई कामों से नाराज दिखे सीएस, कलेक्टर्स और एसपी को गिनाई सरकार की प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री से की गईं ये 5 बड़ी मांगें
- मुख्य सचिव के कथित बयान की सत्यता की जांच कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की रिकॉर्डिंग/ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक की जाए।
- सभी जिलों में प्रशासनिक भ्रष्टाचार की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी या स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
- जांच का दायरा केवल कलेक्टरों तक सीमित न रखकर ठेका, भुगतान, अनुमति, शिकायत निवारण, योजनाओं और ट्रांसफर-पोस्टिंग तक बढ़ाया जाए।
- दोषी अधिकारियों, राजनीतिक पदाधिकारियों और दलालों पर सख्त कार्रवाई और संपत्ति जांच कराई जाए।
- इस पूरे प्रशासनिक पतन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस्तीफा लिया जाए।
सार
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50% कमीशन’ के आरोप को मिला प्रशासनिक आधार
कांग्रेस ने पत्र में कहा कि पार्टी लंबे समय से मध्यप्रदेश में 50% कमीशन की बात उठा रही है, जिसे भाजपा सरकार राजनीतिक आरोप बताकर खारिज करती रही। लेकिन अब मुख्य सचिव के कथित बयान से यह आशंका और मजबूत हो गई है कि भ्रष्टाचार कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित और संरचित तंत्र के रूप में काम कर रहा है।
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पैसा कहां तक जा रहा है? कांग्रेस ने उठाया सवाल
पत्र में यह भी सवाल उठाया गया है कि अगर जिला स्तर पर कलेक्टर पैसे लेकर काम कर रहे हैं, तो यह पैसा केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह सकता। कांग्रेस ने आशंका जताई कि यह राशि प्रशासनिक नेटवर्क, राजनीतिक संरक्षण और सत्ता-समर्थित बिचौलियों तक पहुंच रही होगी। पार्टी ने पूछा है कि सरकार बताए यह व्यवस्था किसके संरक्षण में चल रही है, किन जिलों में ज्यादा है और अब तक कितने अधिकारियों पर वास्तविक कार्रवाई हुई है।
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सरकार पर नियंत्रण खत्म होने का आरोप
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि नौकरशाही बेलगाम हो चुकी है, शिकायत निवारण तंत्र विफल है और जिला प्रशासन पर “वसूली तंत्र” बनने के आरोप लग रहे हैं। पार्टी ने इसे सुशासन नहीं, बल्कि राज्य सत्ता की नैतिक विफलता करार दिया। पत्र के अंत में जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री के नारे ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मध्यप्रदेश में बिना पैसे काम नहीं होने की स्थिति है, तो यह न केवल जनता के अधिकारों का हनन है, बल्कि केंद्र सरकार के घोषित सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
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प्रधानमंत्री से की गईं ये 5 बड़ी मांगें
- मुख्य सचिव के कथित बयान की सत्यता की जांच कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की रिकॉर्डिंग/ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक की जाए।
- सभी जिलों में प्रशासनिक भ्रष्टाचार की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी या स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
- जांच का दायरा केवल कलेक्टरों तक सीमित न रखकर ठेका, भुगतान, अनुमति, शिकायत निवारण, योजनाओं और ट्रांसफर-पोस्टिंग तक बढ़ाया जाए।
- दोषी अधिकारियों, राजनीतिक पदाधिकारियों और दलालों पर सख्त कार्रवाई और संपत्ति जांच कराई जाए।
- इस पूरे प्रशासनिक पतन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस्तीफा लिया जाए।
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