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Bhopal: भारी बारिश में स्कूलों के ई-अटेंडेंस से राहत, शिक्षकों को नदी-नाले पार कर स्कूल पहुंचने की जरूरत नहीं
Wed, 12 Aug 2026 09:19 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 12 Aug 2026 09:19 AM IST
सार
एमपी में भारी बारिश के दौरान उफनती नदियों और नालों को पार कर स्कूल पहुंचने की जरूरत नहीं होगी। शिक्षक ऐसी स्थिति में प्राचार्य और संकुल प्राचार्य को सूचना देंगे। सामान्य दिनों में सुबह 10.30 बजे तक ई-अटेंडेंस जरूरी होगी और 15 मिनट की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी।
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भोपाल जिले की स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में भारी बारिश के बीच शिक्षकों और छात्रों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अब उफनती नदियों और नालों को पार कर स्कूल पहुंचने की कोशिश करने के बजाय शिक्षक इसकी सूचना प्राचार्य और संकुल प्राचार्य को देंगे। ऐसी परिस्थितियों को विभाग द्वारा ध्यान में रखा जाएगा। इससे प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल पहुंचने में असमर्थ शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बारिश के दौरान जान जोखिम में डालकर शिक्षक या विद्यार्थी स्कूल न पहुंचें। यदि नदी-नाला उफान पर है या रास्ता बंद है तो शिक्षक विद्यालय के प्राचार्य और संकुल प्राचार्य को सूचना देंगे।
10.30 बजे तक ई-अटेंडेंस, 15 मिनट की मोहलत
सामान्य दिनों में शिक्षकों और कर्मचारियों को सुबह 10.30 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। विभाग ने इसमें 15 मिनट का ग्रेस पीरियड रखा है, लेकिन रोजाना देरी को इसकी आड़ में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि समय पर स्कूल पहुंचना और पठन-पाठन में शामिल होना कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। लगातार लापरवाही होने पर वेतन कटौती भी हो सकती है। हालांकि, किसी शिक्षक के विद्यालय का समय अलग है या किसी विशेष परिस्थिति में समय आगे-पीछे होता है, तो इसकी जानकारी प्राचार्य के संज्ञान में देने की बात कही गई है।
बैरसिया में बारिश ने बढ़ाई मुश्किल
लगातार बारिश के कारण बैरसिया क्षेत्र में कई नदी-नाले उफान पर हैं। ईंटखेड़ी-बैरसिया मार्ग पर भी पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। ऐसे में कई शिक्षक अपने विद्यालय तक नहीं पहुंच सके और ई-अटेंडेंस भी दर्ज नहीं कर पाए। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि प्राकृतिक आपदा और भारी बारिश के कारण स्कूल नहीं पहुंच पाने वाले शिक्षकों को ई-अटेंडेंस में राहत दी जाए। ऐसी अनुपस्थिति को जानबूझकर की गई लापरवाही मानकर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
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संगठन ने उठाया सुविधाओं का मुद्दा
उपेंद्र कौशल ने कहा कि दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में ई-अटेंडेंस लागू करने से पहले सरकार को शिक्षकों के लिए सुरक्षित आवागमन, आवास और विशेष ग्रामीण भत्ते जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों में काम कर रहे शिक्षकों पर केवल नियम लागू करने के बजाय उनकी वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
यह भी पढ़ें-एमपी में 72 घंटे से बारिश का दौर, 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-गुना में स्कूल बंद
छुट्टी के विकल्प की तकनीकी समस्या भी सुलझेगी
‘शिक्षक’ आवेदन में अवकाश का विकल्प नहीं आने समेत अन्य तकनीकी समस्याओं पर भी विभाग ने कदम उठाने की बात कही है। शिक्षक संगठनों से चार सदस्यों की टीम बनाने को कहा गया है, जो लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय की तकनीकी टीम के साथ मिलकर इन समस्याओं का समाधान करेगी।
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10.30 बजे तक ई-अटेंडेंस, 15 मिनट की मोहलत
सामान्य दिनों में शिक्षकों और कर्मचारियों को सुबह 10.30 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। विभाग ने इसमें 15 मिनट का ग्रेस पीरियड रखा है, लेकिन रोजाना देरी को इसकी आड़ में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि समय पर स्कूल पहुंचना और पठन-पाठन में शामिल होना कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। लगातार लापरवाही होने पर वेतन कटौती भी हो सकती है। हालांकि, किसी शिक्षक के विद्यालय का समय अलग है या किसी विशेष परिस्थिति में समय आगे-पीछे होता है, तो इसकी जानकारी प्राचार्य के संज्ञान में देने की बात कही गई है।
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बैरसिया में बारिश ने बढ़ाई मुश्किल
लगातार बारिश के कारण बैरसिया क्षेत्र में कई नदी-नाले उफान पर हैं। ईंटखेड़ी-बैरसिया मार्ग पर भी पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। ऐसे में कई शिक्षक अपने विद्यालय तक नहीं पहुंच सके और ई-अटेंडेंस भी दर्ज नहीं कर पाए। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि प्राकृतिक आपदा और भारी बारिश के कारण स्कूल नहीं पहुंच पाने वाले शिक्षकों को ई-अटेंडेंस में राहत दी जाए। ऐसी अनुपस्थिति को जानबूझकर की गई लापरवाही मानकर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
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संगठन ने उठाया सुविधाओं का मुद्दा
उपेंद्र कौशल ने कहा कि दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में ई-अटेंडेंस लागू करने से पहले सरकार को शिक्षकों के लिए सुरक्षित आवागमन, आवास और विशेष ग्रामीण भत्ते जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों में काम कर रहे शिक्षकों पर केवल नियम लागू करने के बजाय उनकी वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
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छुट्टी के विकल्प की तकनीकी समस्या भी सुलझेगी
‘शिक्षक’ आवेदन में अवकाश का विकल्प नहीं आने समेत अन्य तकनीकी समस्याओं पर भी विभाग ने कदम उठाने की बात कही है। शिक्षक संगठनों से चार सदस्यों की टीम बनाने को कहा गया है, जो लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय की तकनीकी टीम के साथ मिलकर इन समस्याओं का समाधान करेगी।
