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अब टेढ़ी रीढ़ नहीं बनेगी परेशानी: एम्स ने रोबोटिक तकनीक से किया इलाज, 16 साल के किशोर की टेढ़ी रीढ़ हुई सीधी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 15 Jun 2026 06:48 PM IST
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सार
एम्स भोपाल ने रोबोटिक तकनीक की मदद से स्कोलियोसिस से पीड़ित 16 वर्षीय किशोर की सफल सर्जरी कर उसकी टेढ़ी रीढ़ को सीधा किया। आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए इस इलाज से मरीज को बिना आर्थिक बोझ के अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिला।
स्कोलियोसिस नामक बीमारी से पीड़ित मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रीढ़ की गंभीर विकृति से जूझ रहे 16 वर्षीय किशोर को एम्स भोपाल ने नई उम्मीद दी है। आधुनिक रोबोटिक तकनीक और उन्नत चिकित्सा उपकरणों की मदद से डॉक्टरों ने उसकी टेढ़ी रीढ़ को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया। यह उपलब्धि न केवल मरीज के लिए नई जिंदगी लेकर आई है, बल्कि रीढ़ की जटिल बीमारियों से परेशान अन्य मरीजों के लिए भी राहत भरी खबर है।
कई जगह इलाज के बाद भी नहीं मिली राहत
किशोर स्कोलियोसिस नामक बीमारी से पीड़ित था। इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी एक ओर मुड़ जाती है, जिससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और समय के साथ कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। परिवार ने कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
एम्स ने दिखाई नई राह
इसके बाद मरीज एम्स भोपाल पहुंचा, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने विस्तृत जांच और मूल्यांकन किया। जांच के बाद डॉ. पंकज कुमार मिश्रा, डॉ. तेजा और उनकी टीम ने रोबोटिक सहायता से रीढ़ सुधार सर्जरी करने का निर्णय लिया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल मानी जाती है, लेकिन आधुनिक तकनीक की मदद से इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
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ऑपरेशन के दौरान तंत्रिकाओं पर रखी गई नजर
सर्जरी के समय न्यूरोमॉनिटरिंग तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे तंत्रिकाओं की लगातार निगरानी होती रही। इससे ऑपरेशन अधिक सुरक्षित और सटीक बना तथा किसी भी प्रकार की जटिलता की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सका। यह पूरी सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई। इसके कारण मरीज और उसके परिवार को महंगे इलाज का आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। अत्याधुनिक तकनीक से उपचार मिलने के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया है।
यह भी पढ़ें-प्रदेश में प्री-मानसून की गतिविधियां तेज, भोपाल समेत 30 जिलों में बारिश और तेज आंधी की चेतावनी
आधुनिक तकनीक से बढ़ी इलाज की उम्मीद
अस्थिरोग विभागाध्यक्ष डॉ. रेहान-उल-हक ने कहा कि रोबोटिक तकनीक और न्यूरोमॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं जटिल सर्जरी को अधिक सुरक्षित बनाती हैं और बेहतर परिणाम देती हैं। वहीं एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. डॉ. माधवानन्द कर ने इसे संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बड़े महानगरों का रुख करने की जरूरत नहीं है।
कई जगह इलाज के बाद भी नहीं मिली राहत
किशोर स्कोलियोसिस नामक बीमारी से पीड़ित था। इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी एक ओर मुड़ जाती है, जिससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और समय के साथ कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। परिवार ने कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
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एम्स ने दिखाई नई राह
इसके बाद मरीज एम्स भोपाल पहुंचा, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने विस्तृत जांच और मूल्यांकन किया। जांच के बाद डॉ. पंकज कुमार मिश्रा, डॉ. तेजा और उनकी टीम ने रोबोटिक सहायता से रीढ़ सुधार सर्जरी करने का निर्णय लिया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल मानी जाती है, लेकिन आधुनिक तकनीक की मदद से इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
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ऑपरेशन के दौरान तंत्रिकाओं पर रखी गई नजर
सर्जरी के समय न्यूरोमॉनिटरिंग तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे तंत्रिकाओं की लगातार निगरानी होती रही। इससे ऑपरेशन अधिक सुरक्षित और सटीक बना तथा किसी भी प्रकार की जटिलता की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सका। यह पूरी सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई। इसके कारण मरीज और उसके परिवार को महंगे इलाज का आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। अत्याधुनिक तकनीक से उपचार मिलने के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया है।
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आधुनिक तकनीक से बढ़ी इलाज की उम्मीद
अस्थिरोग विभागाध्यक्ष डॉ. रेहान-उल-हक ने कहा कि रोबोटिक तकनीक और न्यूरोमॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं जटिल सर्जरी को अधिक सुरक्षित बनाती हैं और बेहतर परिणाम देती हैं। वहीं एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. डॉ. माधवानन्द कर ने इसे संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बड़े महानगरों का रुख करने की जरूरत नहीं है।

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