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यूसीसी पर मंथन: आदिवासियों के लिए क्या होगा नियम, महिलाओं के अधिकारों पर भी चर्चा, बैठक से कांग्रेस गायब
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 22 Jun 2026 04:42 PM IST
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सार
भोपाल में यूसीसी (समान नागरिक संहिता) ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में आदिवासी अधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर मंथन हुआ। भाजपा ने अपने सुझाव सौंपे, जबकि कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दल बैठक से दूर रहे।
यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सोमवार को राजधानी भोपाल की प्रशासन अकादमी में यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी की अहम बैठक हुई, जिसमें विभिन्न आयोगों, विभागों और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया गया। बैठक में आदिवासी समुदाय, महिलाओं के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य और उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि यूसीसी की वेबसाइट पर लाखों लोगों ने अपने सुझाव भेजे हैं। इन्हीं सुझावों और विभिन्न संस्थाओं से मिले फीडबैक के आधार पर कानून का प्रारूप तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले समाज के विभिन्न वर्गों के विचारों का समावेश जरूरी है।
आदिवासियों को लेकर सामने आए चार बड़े विकल्प
बैठक में अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे में शामिल करने या नहीं करने को लेकर व्यापक चर्चा हुई। शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक चार तरह के सुझाव सामने आए हैं। पहला, आदिवासी समुदाय को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखा जाए। दूसरा, उन्हें पूरी तरह यूसीसी के दायरे में लाया जाए। तीसरा, केवल विवाह पंजीकरण जैसे सीमित मामलों में यूसीसी लागू हो। चौथा, आदिवासी समुदाय के लिए इसे वैकल्पिक रखा जाए, ताकि वे चाहें तो इसके दायरे में आएं और चाहें तो नहीं।
लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं और बच्चों के अधिकार बड़ा मुद्दा
कमेटी ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी चर्चा की। शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट कर चुका है कि दो बालिगों का साथ रहना उनका व्यक्तिगत निर्णय है। लेकिन महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ऐसे संबंधों में रहने वाली महिला और उससे जन्म लेने वाले बच्चों को क्या कानूनी अधिकार मिलें। कमेटी इस विषय पर भी सुझावों का अध्ययन कर रही है।
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भाजपा ने रखे विवाह, तलाक और संपत्ति अधिकार से जुड़े सुझाव
बैठक में भाजपा की ओर से प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार, गोद लेने, भरण-पोषण, अभिभावकत्व और परिवार से जुड़े दस्तावेजों के डिजिटलीकरण जैसे विषयों पर सुझाव दिए। भाजपा ने बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुरक्षा, वैवाहिक संपत्ति के अधिकार और त्वरित न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की भी पैरवी की।
एनआरआई विवाह और फर्जी जानकारी छिपाने पर भी बने सख्त नियम
भाजपा ने कमेटी के सामने एनआरआई विवाहों में होने वाली धोखाधड़ी का मुद्दा भी उठाया। साथ ही उम्र, वैवाहिक स्थिति, जाति या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाकर शादी करने के मामलों में सख्त नियम बनाने का सुझाव दिया गया। परित्यक्त महिलाओं के अधिकारों को भी यूसीसी में शामिल करने की मांग रखी गई।
आदिवासी अधिकारों को यथावत रखने की पैरवी
राहुल कोठारी ने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि जनजातीय समाज को वर्तमान में प्राप्त अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय से जुड़े अधिकारों को लेकर पार्टी का रुख पहले से स्पष्ट है और उन्हें संरक्षित रखा जाना चाहिए।
यह भी पढ़ें-मानसून की रफ्तार सुस्त, एमपी में लू, गर्मी और आंधी-बारिश का मिला-जुला असर
बैठक में कांग्रेस नहीं पहुंची, भाजपा ने साधा निशाना
राजनीतिक दलों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया था, लेकिन कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दलों का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। भाजपा की ओर से केवल राहुल कोठारी ने सुझाव प्रस्तुत किए। इस पर भाजपा ने कांग्रेस पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया और कहा कि महत्वपूर्ण विषयों पर विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने से बच रहा है।
यह भी पढ़ें-धर्मगुरु, राजनीतिक दल व अफसर देंगे राय; मानसून सत्र में विधेयक पेश करने की तैयारी
सभी पक्षों से चर्चा के बाद अंतिम रूप लेगा मसौदा
यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी अब विभिन्न विभागों, आयोगों, राजनीतिक दलों, धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों से मिले सुझावों का विश्लेषण करेगी। इसके बाद तैयार मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। माना जा रहा है कि आदिवासी अधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक कानूनों में समानता जैसे मुद्दे यूसीसी के सबसे अहम हिस्से होंगे।
आदिवासियों को लेकर सामने आए चार बड़े विकल्प
बैठक में अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे में शामिल करने या नहीं करने को लेकर व्यापक चर्चा हुई। शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक चार तरह के सुझाव सामने आए हैं। पहला, आदिवासी समुदाय को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखा जाए। दूसरा, उन्हें पूरी तरह यूसीसी के दायरे में लाया जाए। तीसरा, केवल विवाह पंजीकरण जैसे सीमित मामलों में यूसीसी लागू हो। चौथा, आदिवासी समुदाय के लिए इसे वैकल्पिक रखा जाए, ताकि वे चाहें तो इसके दायरे में आएं और चाहें तो नहीं।
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लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं और बच्चों के अधिकार बड़ा मुद्दा
कमेटी ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी चर्चा की। शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट कर चुका है कि दो बालिगों का साथ रहना उनका व्यक्तिगत निर्णय है। लेकिन महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ऐसे संबंधों में रहने वाली महिला और उससे जन्म लेने वाले बच्चों को क्या कानूनी अधिकार मिलें। कमेटी इस विषय पर भी सुझावों का अध्ययन कर रही है।
भाजपा ने रखे विवाह, तलाक और संपत्ति अधिकार से जुड़े सुझाव
बैठक में भाजपा की ओर से प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार, गोद लेने, भरण-पोषण, अभिभावकत्व और परिवार से जुड़े दस्तावेजों के डिजिटलीकरण जैसे विषयों पर सुझाव दिए। भाजपा ने बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुरक्षा, वैवाहिक संपत्ति के अधिकार और त्वरित न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की भी पैरवी की।
एनआरआई विवाह और फर्जी जानकारी छिपाने पर भी बने सख्त नियम
भाजपा ने कमेटी के सामने एनआरआई विवाहों में होने वाली धोखाधड़ी का मुद्दा भी उठाया। साथ ही उम्र, वैवाहिक स्थिति, जाति या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाकर शादी करने के मामलों में सख्त नियम बनाने का सुझाव दिया गया। परित्यक्त महिलाओं के अधिकारों को भी यूसीसी में शामिल करने की मांग रखी गई।
आदिवासी अधिकारों को यथावत रखने की पैरवी
राहुल कोठारी ने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि जनजातीय समाज को वर्तमान में प्राप्त अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय से जुड़े अधिकारों को लेकर पार्टी का रुख पहले से स्पष्ट है और उन्हें संरक्षित रखा जाना चाहिए।
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बैठक में कांग्रेस नहीं पहुंची, भाजपा ने साधा निशाना
राजनीतिक दलों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया था, लेकिन कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दलों का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। भाजपा की ओर से केवल राहुल कोठारी ने सुझाव प्रस्तुत किए। इस पर भाजपा ने कांग्रेस पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया और कहा कि महत्वपूर्ण विषयों पर विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने से बच रहा है।
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सभी पक्षों से चर्चा के बाद अंतिम रूप लेगा मसौदा
यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी अब विभिन्न विभागों, आयोगों, राजनीतिक दलों, धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों से मिले सुझावों का विश्लेषण करेगी। इसके बाद तैयार मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। माना जा रहा है कि आदिवासी अधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक कानूनों में समानता जैसे मुद्दे यूसीसी के सबसे अहम हिस्से होंगे।
