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शिक्षकों के पक्ष में उतरे दिग्विजय: बोले- TET पर सरकार ले जिम्मेदारी, कोर्ट में रखे अपना पक्ष, CM को लिखा पत्र

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 04 Apr 2026 04:11 PM IST
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सार

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने टीईटी को लेकर सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर करने और शिक्षकों को आर्थिक व मानसिक दबाव से राहत देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को खुद आगे आकर शिक्षकों का पक्ष रखना चाहिए।

Digvijay Comes Out in Support of Teachers: Says Government Must Take Responsibility for TET and Present Its Ca
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश में टीईटी अनिवार्यता को लेकर बढ़ते विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शिक्षकों के पक्ष में खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा है कि यह मुद्दा लाखों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए राज्य सरकार को खुद आगे आकर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना चाहिए।दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा कि टीईटी अनिवार्यता का मुद्दा केवल शिक्षकों पर छोड़ देना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार को रिव्यू पिटीशन या क्यूरेटिव पिटीशन दायर कर शिक्षकों को राहत दिलाने की पहल करनी चाहिए। इससे न केवल शिक्षकों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता भी सामने आएगी।
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कोर्ट की लड़ाई से बढ़ेगा आर्थिक बोझ
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शिक्षक व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हैं, तो उन्हें वरिष्ठ वकीलों की सेवाएं लेनी होंगी, जो काफी महंगी होती हैं। ऐसे में हजारों शिक्षकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इस स्थिति को समझते हुए खुद शिक्षकों की ओर से कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
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मध्यप्रदेश का पक्ष नहीं सुना गया
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में यह महत्वपूर्ण तथ्य भी उठाया कि जिस न्यायिक निर्णय के आधार पर टीईटी अनिवार्यता लागू की जा रही है, वह मामला महाराष्ट्र राज्य से संबंधित था। मध्य प्रदेश उस प्रकरण में पक्षकार नहीं था, इसलिए राज्य सरकार को अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखने का अवसर मिलना चाहिए।

अनुभवी शिक्षकों पर बढ़ेगा दबाव
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले कई वर्षों से व्यापम के माध्यम से मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया लागू है। ऐसे में 20-25 वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर अचानक परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने इसे शिक्षकों के साथ अन्याय बताया।

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RTE को भविष्यलक्षी रूप में लागू करने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 को भूतलक्षी (रेट्रोस्पेक्टिव) के बजाय भविष्यलक्षी (प्रॉस्पेक्टिव) प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। इससे पहले से कार्यरत शिक्षकों को राहत मिलेगी और वे बिना किसी डर के अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।

अंतिम फैसले तक TET पर रोक जरूरी
दिग्विजय सिंह ने सरकार से मांग की कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता को स्थगित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों के मन में बना असमंजस दूर होगा और उनकी नौकरी पर मंडरा रहा खतरा भी टलेगा।

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उम्रदराज शिक्षकों के लिए परीक्षा अनुचित
उन्होंने 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि इस उम्र में दोबारा परीक्षा देना व्यावहारिक नहीं है। इससे न केवल मानसिक दबाव बढ़ेगा, बल्कि कई शिक्षकों के लिए यह आर्थिक संकट भी पैदा कर सकता है। दिग्विजय सिंह ने बताया कि शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर अपनी समस्याएं और चिंताएं साझा की थीं।इसी आधार पर उन्होंने यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है।


 
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