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यूसीसी पर जमीयत का बड़ा हमला: बोले- मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल बर्दाश्त नहीं, लिव-इन रिलेशनशिप अपवित्र रिश्ता
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 24 Jun 2026 02:55 PM IST
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सार
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने यूसीसी का विरोध करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को अपवित्र रिश्ता बताया और जरूरत पड़ने पर अदालत जाने की बात भी कही।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर चल रही कवायद के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने सरकार के प्रस्तावित प्रावधानों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश में अधिकांश सिविल कानून पहले से लागू हैं, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ को संविधान का संरक्षण प्राप्त है और उसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। अमर उजाला से चर्चा के दौरान हाजी हारून ने कहा कि यूसीसी के नाम पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रावधानों की बात की जा रही है। यदि पूरे देश के लिए एक समान कानून बनाना है तो यह काम संसद के स्तर पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ कुरान और हदीस पर आधारित है, जिसे मुस्लिम समाज मानता और उस पर अमल करता है।
लिव-इन रिलेशनशिप पर जताई कड़ी आपत्त
हाजी हारून ने प्रस्तावित यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विवाह, निकाह और शादी जैसे पवित्र रिश्तों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि बिना विवाह के संबंधों को कानूनी मान्यता देना समाज और पारिवारिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा, हम पवित्र रिश्तों की बात करते हैं। शादी और परिवार की संस्था को मजबूत किया जाना चाहिए, जबकि लिव-इन रिलेशनशिप को बढ़ावा देना भारतीय सामाजिक मूल्यों के विपरीत है।
71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं के समर्थन पर उठाए सवाल
सरकार की ओर से मिले सुझावों में 71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं द्वारा समर्थन जताने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए हाजी हारून ने कहा कि ऐसे आंकड़े किस आधार पर जुटाए गए हैं, इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में हुई बैठकों में बड़ी संख्या में लोगों ने यूसीसी और विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप संबंधी प्रावधानों का विरोध किया है।
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यह भी पढ़ें-एमपी में मानसून की दस्तक जल्द, आज 42 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, सामान्य से 53% कम वर्षा
डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स का भी किया जिक्र
जमीयत अध्यक्ष ने कहा कि संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में केवल यूसीसी ही नहीं, बल्कि शराबबंदी, समान वेतन और संसाधनों के समान वितरण जैसी बातें भी शामिल हैं। यदि सरकार वास्तव में नीति निर्देशक तत्वों को लागू करना चाहती है तो सभी बिंदुओं पर समान रूप से काम करना चाहिए।
गाय संरक्षण पर भी रखा पक्ष
हाजी हारून ने कहा कि यदि गाय को लेकर देश में व्यापक भावनाएं हैं तो केंद्र सरकार को पूरे देश के लिए एक समान कानून बनाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि गौवंश की बिक्री और निर्यात पर सख्त राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पूरे देश के लिए एकसमान कानून लाने की जरूरत है।
यह भी पढ़ें-कांग्रेस का आरोप- मोहन यादव ने CM बनने के बाद खरीदी 111 एकड़ जमीन, बीजेपी का पलटवार
अदालत जाने के दिए संकेत
मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू होने की स्थिति पर हाजी हारून ने कहा कि फिलहाल प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है, लेकिन यदि मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप किया गया तो कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
लिव-इन रिलेशनशिप पर जताई कड़ी आपत्त
हाजी हारून ने प्रस्तावित यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विवाह, निकाह और शादी जैसे पवित्र रिश्तों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि बिना विवाह के संबंधों को कानूनी मान्यता देना समाज और पारिवारिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा, हम पवित्र रिश्तों की बात करते हैं। शादी और परिवार की संस्था को मजबूत किया जाना चाहिए, जबकि लिव-इन रिलेशनशिप को बढ़ावा देना भारतीय सामाजिक मूल्यों के विपरीत है।
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71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं के समर्थन पर उठाए सवाल
सरकार की ओर से मिले सुझावों में 71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं द्वारा समर्थन जताने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए हाजी हारून ने कहा कि ऐसे आंकड़े किस आधार पर जुटाए गए हैं, इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में हुई बैठकों में बड़ी संख्या में लोगों ने यूसीसी और विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप संबंधी प्रावधानों का विरोध किया है।
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डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स का भी किया जिक्र
जमीयत अध्यक्ष ने कहा कि संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में केवल यूसीसी ही नहीं, बल्कि शराबबंदी, समान वेतन और संसाधनों के समान वितरण जैसी बातें भी शामिल हैं। यदि सरकार वास्तव में नीति निर्देशक तत्वों को लागू करना चाहती है तो सभी बिंदुओं पर समान रूप से काम करना चाहिए।
गाय संरक्षण पर भी रखा पक्ष
हाजी हारून ने कहा कि यदि गाय को लेकर देश में व्यापक भावनाएं हैं तो केंद्र सरकार को पूरे देश के लिए एक समान कानून बनाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि गौवंश की बिक्री और निर्यात पर सख्त राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पूरे देश के लिए एकसमान कानून लाने की जरूरत है।
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अदालत जाने के दिए संकेत
मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू होने की स्थिति पर हाजी हारून ने कहा कि फिलहाल प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है, लेकिन यदि मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप किया गया तो कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
