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MP News: सीएम के कमिश्नर्स-कलेक्टर को निर्देश, बोले- किसानों के कल्याण के लिए मिशन मोड में काम करें अधिकारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 31 Jan 2026 05:04 PM IST
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सार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी अधिकारियों को मिशन मोड में काम करना होगा। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को कृषक कल्याण वर्ष का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों का जीवन बेहतर बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अन्नदाता किसानों के सुख-दुख की चिंता करना हम सभी का कर्तव्य है। सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया है और इसका उद्देश्य किसानों के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाना है। इसके लिए सभी अधिकारियों को पूरी निष्ठा और मिशन मोड में काम करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष केवल औपचारिक कार्यक्रम न बने, बल्कि इसका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष किसानों के साथ लगातार संवाद किया जाए और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता से सुना जाए। किसानों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए किसान रथ चलाए जाएं। इन रथों का शुभारंभ स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कराया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग की बजाय मूंगफली और उड़द जैसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे उनकी आय बढ़ सके।
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डॉ. यादव ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग के लिए किसानों को जागरूक किया जाए। जलवायु और सतत कृषि को ध्यान में रखते हुए ई-विकास पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग कराया जाए। आकांक्षी जिलों में प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने पराली और नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नरवाई प्रबंधन की ठोस योजना बनाई जाए। खेतों से निकलने वाली पराली और भूसे का उपयोग गौशालाओं में किया जाए, जिससे गौवंश को चारा मिल सके। इसके साथ ही फसल अवशेषों से बायोगैस संयंत्र लगाने पर भी काम किया जाए।
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दुग्ध उत्पादन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु आहार और पशु स्वास्थ्य के लाभों के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने बताया कि पशुपालकों के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्हें दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी मिलेगी। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित करने और नगरीय क्षेत्रों में फिश पार्लर स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के साथ-साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित 15 से अधिक विभाग मिलकर काम करेंगे।
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मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कृषि उपज मंडियों का नियमित निरीक्षण किया जाए और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए पूरी विपणन श्रृंखला विकसित की जाए। कृषक कल्याण वर्ष की सभी गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने बताया कि फरवरी माह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मार्च में राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन होगा, जिसमें किसानों को नए कृषि ऋण और सहकारी बैंकिंग सुविधाएं दी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष की कार्य योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि प्रदेश का किसान खुशहाल और आत्मनिर्भर बन सके।
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डॉ. यादव ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग के लिए किसानों को जागरूक किया जाए। जलवायु और सतत कृषि को ध्यान में रखते हुए ई-विकास पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग कराया जाए। आकांक्षी जिलों में प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने पराली और नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नरवाई प्रबंधन की ठोस योजना बनाई जाए। खेतों से निकलने वाली पराली और भूसे का उपयोग गौशालाओं में किया जाए, जिससे गौवंश को चारा मिल सके। इसके साथ ही फसल अवशेषों से बायोगैस संयंत्र लगाने पर भी काम किया जाए।
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