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MP: देश की सबसे लंबी जल सुरंग का आज निरीक्षण करेंगे सीएम यादव, प्रदेश के इन-इन जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ
Fri, 17 Jul 2026 06:43 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 17 Jul 2026 06:43 AM IST
सार
कटनी में बन रही देश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद जल सुरंग अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को इसका निरीक्षण करेंगे। इसके पूरा होने पर विंध्य और महाकौशल के करीब 1,450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई का लाभ मिलेगा।
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स्लीमनाबाद प्रोजेक्ट का निरीक्षण करेंगे सीएम।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को कटनी जिले में बन रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण करेंगे। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग अंतिम चरण में है और इसके पूरा होने से विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के लाखों किसानों को स्थायी सिंचाई की सुविधा मिलेगी। कटनी जिले में 11.952 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद जल सुरंग का निर्माण किया जा रहा है।
सुरंग का केवल अंतिम एक मीटर हिस्सा शेष है, जिसके बाद इसका निर्माण पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण करेंगे। यह सुरंग नर्मदा नदी का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) के माध्यम से सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी। इससे सिंचाई के लिए पानी बिना अतिरिक्त ऊर्जा खर्च किए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा
परियोजना पूरी होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1,450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार यह परियोजना केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि नर्मदा और सोन नदी क्षेत्रों के बीच लंबे समय से चली आ रही भौगोलिक दूरी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रयास भी है।
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1,610.47 करोड़ की लागत से तैयार हो रही टनल
इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में करीब 799 करोड़ रुपये की लागत से हुई थी, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, पानी के रिसाव को रोकने और आधुनिक तकनीक के उपयोग के कारण अब तक इस पर 1,610.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। करीब 11.95 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग और 12.13 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर का निर्माण पूरा हो चुका है। पूरी परियोजना का 96.66 प्रतिशत काम पूरा हो गया है और केवल कुछ अंतिम कार्य शेष हैं।
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विंध्य और महाकौशल की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नर्मदा का पानी बिना बिजली और बिना बड़े पंपों के केवल गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी फ्लो) के जरिए विंध्य पर्वतमाला के नीचे से होकर सोन नदी क्षेत्र तक पहुंचेगा। सरकार के अनुसार मार्च 2026 तक 44,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा शुरू की जा चुकी है। अब लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक 87,433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचाई से जोड़ा जाए। सरकार का मानना है कि यह परियोजना विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में कृषि, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।
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सुरंग का केवल अंतिम एक मीटर हिस्सा शेष है, जिसके बाद इसका निर्माण पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण करेंगे। यह सुरंग नर्मदा नदी का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) के माध्यम से सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी। इससे सिंचाई के लिए पानी बिना अतिरिक्त ऊर्जा खर्च किए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा
परियोजना पूरी होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1,450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार यह परियोजना केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि नर्मदा और सोन नदी क्षेत्रों के बीच लंबे समय से चली आ रही भौगोलिक दूरी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रयास भी है।
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1,610.47 करोड़ की लागत से तैयार हो रही टनल
इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में करीब 799 करोड़ रुपये की लागत से हुई थी, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, पानी के रिसाव को रोकने और आधुनिक तकनीक के उपयोग के कारण अब तक इस पर 1,610.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। करीब 11.95 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग और 12.13 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर का निर्माण पूरा हो चुका है। पूरी परियोजना का 96.66 प्रतिशत काम पूरा हो गया है और केवल कुछ अंतिम कार्य शेष हैं।
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विंध्य और महाकौशल की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नर्मदा का पानी बिना बिजली और बिना बड़े पंपों के केवल गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी फ्लो) के जरिए विंध्य पर्वतमाला के नीचे से होकर सोन नदी क्षेत्र तक पहुंचेगा। सरकार के अनुसार मार्च 2026 तक 44,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा शुरू की जा चुकी है। अब लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक 87,433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचाई से जोड़ा जाए। सरकार का मानना है कि यह परियोजना विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में कृषि, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।
