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MP News: डीजीपी मकवाना प्रशिक्षु आईएएस से बोले- ईमानदारी और सत्यनिष्ठा ही युवा अधिकारियों की सबसे बड़ी पूंजी
Mon, 06 Jul 2026 10:12 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 06 Jul 2026 10:12 PM IST
सार
मध्य प्रदेश कैडर के 2025 बैच के आठ प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों ने डीजीपी कैलाश मकवाना से मुलाकात की। डीजीपी ने उन्हें ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जनसेवा को प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए जिम्मेदारी के साथ काम करने की सीख दी।
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डीजीपी कैलाश मकवाना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश कैडर के 2025 बैच के आठ प्रशिक्षु भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना से मुलाकात की। इस दौरान डीजीपी ने नवचयनित अधिकारियों को प्रशासनिक सेवा के मूल्यों और जिम्मेदारियों पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि ईमानदारी और सत्यनिष्ठा ही किसी युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
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डीजीपी मकवाना ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि जनता की सेवा का दायित्व है। अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान अधिक से अधिक सीखने का प्रयास करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से सीखने में भी संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय में नए आपराधिक कानून, साइबर अपराध, साइबर फ्रॉड, नारकोटिक्स और नशा मुक्ति जैसे विषयों की अच्छी समझ होना जरूरी है।
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उन्होंने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संवाद और सही नेतृत्व से बड़ी चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने डॉयल-100 से 112 आपातकालीन सेवा में बदलाव और वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश के नक्सल मुक्त होने का उदाहरण देते हुए टीमवर्क और समर्पण के महत्व पर जोर दिया। डीजीपी ने अधिकारियों को सलाह दी कि किसी भी सूचना पर तुरंत भरोसा करने के बजाय पहले उसका सत्यापन करें और तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लें। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, व्यक्तिगत स्वार्थ और पद के अहंकार से दूर रहकर जनता की समस्याओं को अपनी समस्या समझकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 'साहबगिरी' नहीं, बल्कि जनसेवा की भावना एक सफल अधिकारी की पहचान है।
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मकवाना ने "सेफ क्लिक 2.0" साइबर जागरूकता अभियान और 15 जुलाई से शुरू होने वाले "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन अभियानों को सफल बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि नवचयनित अधिकारी अपनी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण से जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।
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डीजीपी मकवाना ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि जनता की सेवा का दायित्व है। अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान अधिक से अधिक सीखने का प्रयास करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से सीखने में भी संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय में नए आपराधिक कानून, साइबर अपराध, साइबर फ्रॉड, नारकोटिक्स और नशा मुक्ति जैसे विषयों की अच्छी समझ होना जरूरी है।
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उन्होंने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संवाद और सही नेतृत्व से बड़ी चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने डॉयल-100 से 112 आपातकालीन सेवा में बदलाव और वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश के नक्सल मुक्त होने का उदाहरण देते हुए टीमवर्क और समर्पण के महत्व पर जोर दिया। डीजीपी ने अधिकारियों को सलाह दी कि किसी भी सूचना पर तुरंत भरोसा करने के बजाय पहले उसका सत्यापन करें और तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लें। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, व्यक्तिगत स्वार्थ और पद के अहंकार से दूर रहकर जनता की समस्याओं को अपनी समस्या समझकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 'साहबगिरी' नहीं, बल्कि जनसेवा की भावना एक सफल अधिकारी की पहचान है।
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मकवाना ने "सेफ क्लिक 2.0" साइबर जागरूकता अभियान और 15 जुलाई से शुरू होने वाले "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन अभियानों को सफल बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि नवचयनित अधिकारी अपनी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण से जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।
