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MP News: मेडिकल फैकल्टी इंटरव्यू में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट सख्त, दोषी अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश
Sat, 08 Aug 2026 09:17 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा/ भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा/ भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 08 Aug 2026 09:17 PM IST
सार
मेडिकल फैकल्टी के इंटरव्यू में मिली गड़बड़ियों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने चार सप्ताह में नई रिपोर्ट पेश करने और अधिकारियों पर प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है।
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कोर्ट। सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने मेडिकल फैकल्टी के इंटरव्यू में कथित गड़बड़ी के मामले में राज्य सरकार को दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में यदि अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है तो सरकार को जांच के निष्कर्षों पर कार्रवाई करते हुए उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा। कोर्ट ने यह आदेश 5 अगस्त 2026 को डॉ. आरडी दत्त की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से पेश अनुपालन रिपोर्ट को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया। यह रिपोर्ट विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से प्रस्तुत की गई थी।
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विभागीय जांच में अफसरों की लापरवाही मिली
सरकार की रिपोर्ट में इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान कुछ अधिकारियों की ओर से लापरवाही किए जाने की बात सामने आई है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब विभाग की अपनी जांच में अधिकारियों को जिम्मेदार माना गया है, तो अब सरकार को जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए। यह अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट के 20 मई 2026 के पूर्व आदेश के पालन में पेश की गई थी।
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पीडियाट्रिक्स के लिए फिर होंगे इंटरव्यू
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि पीडियाट्रिक्स (शिशु रोग) विषय के लिए नए सिरे से इंटरव्यू कराने का प्रस्ताव है। सरकार ने बताया कि यह प्रक्रिया हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के पालन के लिए की जाएगी। इससे संबंधित दो रिट याचिकाओं में कोर्ट पहले ही आवश्यक निर्देश जारी कर चुका है। सरकार ने कहा कि नए इंटरव्यू कराने का उद्देश्य कोर्ट के आदेश का पालन करने के साथ अवमानना की कार्यवाही से जुड़े मुद्दों का समाधान करना भी है।
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चार सप्ताह का समय
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि में सरकार को नई अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके साथ ही लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को शपथपत्र देकर यह बताना होगा कि जांच रिपोर्ट में जिन अधिकारियों को जिम्मेदार पाया गया है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तावित है। फिलहाल कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी है।
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विभागीय जांच में अफसरों की लापरवाही मिली
सरकार की रिपोर्ट में इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान कुछ अधिकारियों की ओर से लापरवाही किए जाने की बात सामने आई है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब विभाग की अपनी जांच में अधिकारियों को जिम्मेदार माना गया है, तो अब सरकार को जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए। यह अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट के 20 मई 2026 के पूर्व आदेश के पालन में पेश की गई थी।
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पीडियाट्रिक्स के लिए फिर होंगे इंटरव्यू
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि पीडियाट्रिक्स (शिशु रोग) विषय के लिए नए सिरे से इंटरव्यू कराने का प्रस्ताव है। सरकार ने बताया कि यह प्रक्रिया हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के पालन के लिए की जाएगी। इससे संबंधित दो रिट याचिकाओं में कोर्ट पहले ही आवश्यक निर्देश जारी कर चुका है। सरकार ने कहा कि नए इंटरव्यू कराने का उद्देश्य कोर्ट के आदेश का पालन करने के साथ अवमानना की कार्यवाही से जुड़े मुद्दों का समाधान करना भी है।
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चार सप्ताह का समय
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि में सरकार को नई अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके साथ ही लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को शपथपत्र देकर यह बताना होगा कि जांच रिपोर्ट में जिन अधिकारियों को जिम्मेदार पाया गया है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तावित है। फिलहाल कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी है।
