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MP News: कामकाजी महिलाओं के 59 हॉस्टलों की CAG जांच में बड़ी गड़बड़ी, 22 भवन दूसरे कामों में इस्तेमाल
Thu, 23 Jul 2026 07:18 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Thu, 23 Jul 2026 07:18 AM IST
सार
मध्य प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए गए हॉस्टलों की बदहाल स्थिति सीएजी की रिपोर्ट में उजागर हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक 59 में से सिर्फ 13 हॉस्टल ही चालू मिले, जबकि 22 का इस्तेमाल दूसरे सरकारी कामों के लिए किया जा रहा है।
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कैग रिपोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए गए हॉस्टलों की स्थिति पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 59 में से 22 हॉस्टलों का उपयोग महिलाओं की बजाय दूसरे कामों के लिए किया जा रहा है। कई हॉस्टल स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र और सरकारी कार्यालय बन गए। वहीं, सिर्फ 13 हॉस्टल ही पूरी या आंशिक रूप से चालू मिले।
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मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में कामकाजी महिलाओं के हॉस्टलों की योजना के संचालन और निगरानी में कई कमियां उजागर हुई हैं। यह ऑडिट वर्ष 2019-20 से 2023-24 की अवधि का है, जिसमें प्रदेश के 34 जिलों में बने सभी 59 हॉस्टलों की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार 59 में से 22 हॉस्टलों का उपयोग मूल उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। इनमें लड़के-लड़कियों के छात्रावास, आशा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण केंद्र, शहरी निकायों के कार्यालय और अन्य सरकारी उपयोग शामिल हैं। कुछ स्थानों पर हॉस्टलों को किराये पर देकर आय भी अर्जित की जा रही थी। ऑडिट में सामने आया कि खरगोन, धार, सिवनी और छतरपुर सहित कई जिलों में हॉस्टलों के हिस्से सरकारी विभागों, प्रशिक्षण केंद्रों और स्कूलों को किराए पर दिए गए थे।
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रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 59 हॉस्टलों में केवल 13 हॉस्टल ही 31 मार्च 2024 तक पूरी तरह या आंशिक रूप से संचालित हो रहे थे। चार हॉस्टल पूरी तरह बंद मिले, तीन हॉस्टलों का पता ही नहीं चला, जबकि तीन हॉस्टलों का निर्माण वर्षों बाद भी पूरा नहीं हुआ। एक हॉस्टल का निर्माण स्वीकृति मिलने के दशकों बाद भी शुरू नहीं किया गया। वहीं 12 हॉस्टल जर्जर या खंडहर जैसी स्थिति में मिले।
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सीएजी ने यह भी पाया कि चालू 13 हॉस्टलों में से 9 में 40 से 50 प्रतिशत तक ही कमरे भरे थे। इसकी वजह पुरानी इमारतें, आधुनिक सुविधाओं की कमी, लोगों में जागरूकता का अभाव और डे-केयर सेंटर का चालू नहीं होना बताई गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जिन 11 हॉस्टलों में डे-केयर सेंटर स्वीकृत थे, वहां निरीक्षण के दौरान एक भी डे-केयर सेंटर संचालित नहीं मिला। इसके अलावा कुछ हॉस्टलों में ऐसे लोग भी रह रहे थे, जो इस योजना के पात्र नहीं थे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने वर्ष 2019 से 2024 के बीच कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टलों की वास्तविक जरूरत का कोई सर्वे भी नहीं कराया। जबकि इस अवधि में प्रदेश में महिलाओं की श्रम भागीदारी दर बढ़ी है।
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