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MP News: मध्य प्रदेश के पर्यावरण और ग्राम विकास के प्रहरी मोहन नागर को पद्मश्री, आज राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Tue, 23 Jun 2026 08:04 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले मोहन नागर को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में 23 जून को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति उनके तीन दशक लंबे जनसेवा और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों का सम्मान करेंगी।

MP News: Mohan Nagar, a guardian of Madhya Pradesh's environment and rural development, to receive the Padma S
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नागर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरणविद् और जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर को शिक्षा, ग्राम विकास, सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। राष्ट्रपति भवन में 23 जून को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्वारा उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। मूल रूप से राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव के निवासी मोहन नागर पिछले तीन दशकों से बैतूल और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता, जल संरक्षण, शिक्षा और पर्यावरण संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष तथा भारत भारती शिक्षा समिति, बैतूल के सचिव के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। 


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आदिवासी अंचलों से की जनसेवा की शुरुआत 
23 फरवरी 1968 को जन्मे मोहन नागर ने उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही सामाजिक गतिविधियों से जुड़े नागर वर्ष 1991 में आदिवासी अंचलों के विकास के उद्देश्य से बैतूल पहुंचे और वहीं से उनके जनसेवा के अभियान की शुरुआत हुई। उन्होंने शिवध्वज यात्रा के माध्यम से शिक्षा, जल संरक्षण, वन संवर्धन और पर्यावरण जागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप दिया। 
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अभियानों से जल स्रोतों को नया जीवन दिया 
मोहन नागर के नेतृत्व में चलाए गए गंगावतरण अभियान, बोरी बंधान, नदी पुनर्जीवन अभियान और जल महोत्सव जैसी पहलें देशभर में सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यावरण संरक्षण के सफल मॉडल के रूप में पहचान बना चुकी हैं। गंगावतरण अभियान के तहत हजारों जल संरचनाओं का निर्माण, 32 हजार से अधिक देशी पौधों का रोपण और पहाड़ी क्षेत्रों में हरियाली व भूजल स्तर बढ़ाने का कार्य किया गया। वहीं नदी पुनर्जीवन अभियान से कई ग्राम पंचायतों में जल स्रोतों को नया जीवन मिला।

आदिवासी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने किया काम 
आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान उनके मार्गदर्शन में सतपुड़ा क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर 75 हजार जल संरचनाओं के निर्माण और व्यापक वृक्षारोपण अभियान ने जनभागीदारी आधारित पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश की। आदिवासी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके चलते बैतूल का बाचा गांव "सौर गांव" के रूप में पहचान बना सका।

नागर हो चुके है कई पुरस्कारों से सम्मानित 
मोहन नागर को  भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा समर्थित राष्ट्रीय जल प्रहरी पुरस्कार (2019) और जल नायक पुरस्कार (2020) से सम्मानित किया गया है। उन्हें भूजल संरक्षण (भूगर्भ जल संरक्षण) में उनकी अग्रणी भूमिका को रेखांकित करने वाला राष्ट्रीय पुरस्कार, भाऊराव देवरस सेवा सम्मान (2024-25) भी प्राप्त हुआ है। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित प्रतिष्ठित दुष्यंत कुमार कृति साहित्य अकादमी पुरस्कार (2014) भी मिला है, जो उनकी कविता 'चतुर्मास' के माध्यम से उनके विशेष योगदान के लिए दिया गया है, जिसमें पर्यावरण और ग्रामीण भारत के विषयों को जमीनी स्तर के पर्यावरणवाद की अभिव्यक्ति के रूप में उजागर किया गया है।
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