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MP News: तीन संतान के आधार पर हटाए गए सब-रजिस्ट्रार को मिली राहत, सेवा समाप्ति आदेश पर शासन ने लगाई रोक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 15 Jun 2026 10:12 PM IST
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सार
सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को राज्य शासन से बड़ी राहत मिली है। दो से अधिक संतान के आधार पर की गई सेवा समाप्ति की कार्रवाई पर शासन ने फिलहाल रोक लगा दी है।
वल्लभ भवन, भोपाल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दो से अधिक संतान होने के आधार पर सेवा से हटाए गए सिंगरौली के उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) अशोक सिंह परिहार को राज्य शासन से अंतरिम राहत मिल गई है। शासन ने उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए सेवा समाप्ति के आदेश के प्रभाव पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही अंतिम निर्णय होने तक उनकी सेवा यथावत बनी रहेगी। दरअसल, महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक कार्यालय द्वारा 11 जून 2026 को जारी आदेश में अशोक सिंह परिहार की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। विभाग ने यह कार्रवाई दो से अधिक संतान होने के आधार पर की थी। इसके बाद परिहार ने 15 जून को राज्य शासन के समक्ष अपील दायर कर आदेश को चुनौती दी।
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अपील में परिहार ने तर्क दिया कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। ऐसे में करीब 23 वर्ष बाद इस आधार पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई उचित नहीं है। उन्होंने सेवा समाप्ति आदेश पर रोक लगाने और मामले पर पुनर्विचार की मांग की थी। सूत्रों के अनुसार, परिहार ने उपमुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा के समक्ष भी अपना पक्ष रखा। मामले की सुनवाई के बाद शासन ने माना कि अपील के अंतिम निराकरण में समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में यदि सेवा समाप्ति आदेश लागू रहता है तो अपीलकर्ता को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
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इसी आधार पर वाणिज्यिक कर विभाग ने 11 जून को जारी सेवा समाप्ति आदेश पर अंतरिम स्थगन प्रदान कर दिया है। विभाग के अपर सचिव राजेश ओगरे द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अपील के अंतिम निर्णय तक पूर्व स्थिति कायम रहेगी। इस निर्णय के बाद अशोक सिंह परिहार फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला शासन द्वारा अपील के विस्तृत परीक्षण के बाद लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अशोक सिंह परिहार का नाम पूर्व में विभिन्न विवादों और शिकायतों के कारण भी चर्चा में रहा है। वहीं, राज्य सरकार पहले भी संकेत दे चुकी है कि केवल तीन संतान होने के आधार पर सेवा से पृथक्करण जैसे मामलों में प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण तथ्यों और नियमों के अनुसार किया जाएगा।
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अपील में परिहार ने तर्क दिया कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। ऐसे में करीब 23 वर्ष बाद इस आधार पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई उचित नहीं है। उन्होंने सेवा समाप्ति आदेश पर रोक लगाने और मामले पर पुनर्विचार की मांग की थी। सूत्रों के अनुसार, परिहार ने उपमुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा के समक्ष भी अपना पक्ष रखा। मामले की सुनवाई के बाद शासन ने माना कि अपील के अंतिम निराकरण में समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में यदि सेवा समाप्ति आदेश लागू रहता है तो अपीलकर्ता को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
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इसी आधार पर वाणिज्यिक कर विभाग ने 11 जून को जारी सेवा समाप्ति आदेश पर अंतरिम स्थगन प्रदान कर दिया है। विभाग के अपर सचिव राजेश ओगरे द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अपील के अंतिम निर्णय तक पूर्व स्थिति कायम रहेगी। इस निर्णय के बाद अशोक सिंह परिहार फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला शासन द्वारा अपील के विस्तृत परीक्षण के बाद लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अशोक सिंह परिहार का नाम पूर्व में विभिन्न विवादों और शिकायतों के कारण भी चर्चा में रहा है। वहीं, राज्य सरकार पहले भी संकेत दे चुकी है कि केवल तीन संतान होने के आधार पर सेवा से पृथक्करण जैसे मामलों में प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण तथ्यों और नियमों के अनुसार किया जाएगा।
