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MP News: मगरमच्छ के साथ क्रूरता कर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Thu, 04 Jun 2026 08:09 AM IST
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सार
सोशल मीडिया पर मगरमच्छ के साथ क्रूरता का वीडियो बनाकर वायरल करने वाले दो युवकों को शिवपुरी में गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने लोकप्रियता और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए संरक्षित वन्यजीव के साथ अमानवीय व्यवहार कर वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किया था।
मगरमच्छ के साथ क्रूरता कर वीडियो वायरल करने वाले दो गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सोशल मीडिया पर मगरमच्छ के साथ क्रूरता का वीडियो बनाकर वायरल करने वाले दो आरोपियों को स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) और वन विभाग की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने मगरमच्छ को पकड़कर उसके साथ छेड़छाड़ करने, उसे घसीटने और पटकने का वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किया था, जिससे वे सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करना चाहते थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्यप्रदेश के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए एसटीएसएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे वीडियो की जांच की। जांच के दौरान पता चला कि वीडियो में दिखाई देने वाले आरोपी शिवपुरी जिले के रहने वाले हैं।
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इसके बाद एसटीएसएफ की क्षेत्रीय इकाई शिवपुरी और वनमंडल शिवपुरी के अमले ने संयुक्त कार्रवाई कर पिछोर तहसील के ग्राम गरेठा से सुखनंदन केवट और गुलई सिंह को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बुधना नदी में मछली पकड़ने के लिए बिजली के करंट का उपयोग करते थे, जिससे मगरमच्छ भी उसकी चपेट में आ जाते थे। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपलोड किए गए वीडियो में दिखाए गए कृत्य को भी स्वीकार किया। वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ 2 जून 2026 को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया। आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद दोनों को न्यायालय पिछोर, जिला शिवपुरी में पेश किया गया।
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मगरमच्छ अनुसूची-1 का संरक्षित वन्यजीव
वन विभाग के अनुसार मगरमच्छ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। इसके शिकार, उत्पीड़न या छेड़छाड़ को गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में न्यूनतम तीन वर्ष से लेकर अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
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वन विभाग की अपील
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता या लाइक्स प्राप्त करने के लिए वन्यजीवों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या अमानवीय व्यवहार न करें। वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी गंभीर खतरा है।
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वन विभाग के अनुसार मगरमच्छ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। इसके शिकार, उत्पीड़न या छेड़छाड़ को गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में न्यूनतम तीन वर्ष से लेकर अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
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वन विभाग की अपील
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता या लाइक्स प्राप्त करने के लिए वन्यजीवों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या अमानवीय व्यवहार न करें। वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी गंभीर खतरा है।

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