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सिकल सेल रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: देश के 59% मरीज MP और ओडिशा में; 17 राज्यों में 7.27 करोड़ लोगों की हुई जांच
Wed, 12 Aug 2026 03:12 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Wed, 12 Aug 2026 03:12 PM IST
सार
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत 17 जनजातीय बहुल राज्यों में 7.27 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। इनमें 2.49 लाख से अधिक लोग सिकल सेल बीमारी से पीड़ित और 20.47 लाख से अधिक लोग वाहक पाए गए हैं। कुल मरीजों में करीब 59.28 प्रतिशत मरीज मध्य प्रदेश और ओडिशा में हैं।
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सांकेतिक फोटो- सिकल सेल
- फोटो : Istock
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विस्तार
देशभर में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित कुल मरीजों में से लगभग 59.28 प्रतिशत मरीज केवल दो राज्यों, मध्य प्रदेश और ओडिशा में पाए गए हैं। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के अंतर्गत देश के 17 प्रमुख जनजातीय बहुल राज्यों में अब तक 7.27 करोड़ से अधिक लोगों की जांच पूरी हो चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी जांच अभियान के दौरान कुल 2,49,167 लोग सिकल सेल बीमारी से पीड़ित मिले हैं, जबकि 20,47,145 लोगों को इस बीमारी के वाहक के रूप में चिह्नित किया गया है। डिजिटल माध्यम से राष्ट्रीय सिकल सेल पोर्टल के जरिए इस पूरे अभियान की निगरानी की जा रही है।
विभिन्न राज्यों में स्थिति और आंकड़े
सिकल सेल रोग से ग्रसित मरीजों की सर्वाधिक संख्या के मामले में ओडिशा शीर्ष स्थान पर है, जहां कुल 1,06,969 मरीज चिह्नित हुए हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश 40,741 मरीजों के साथ दूसरे स्थान पर है। गुजरात में 30,548 तथा महाराष्ट्र में 30,017 मरीज पाए गए हैं। दूसरी ओर, जांच प्रक्रिया के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य सबसे आगे रहा है। छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड 1.78 करोड़ से अधिक लोगों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 28,384 व्यक्ति पीड़ित पाए गए। मध्य प्रदेश में अब तक 1.33 करोड़ से अधिक लोगों की जांच हो चुकी है, जिसमें 2,45,024 व्यक्ति वाहक के रूप में पहचाने गए हैं। वर्ष 1984 में आईसीएमआर ने पहली बार मध्य प्रदेश के नर्मदा तटीय जिलों को सिकल सेल प्रभावित रेड जोन घोषित किया था।
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जांच सुविधाएं और उपचार के उपाय
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों के स्तर पर शून्य से 40 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों की मुफ्त जांच की जा रही है। आंगनबाड़ी, आशा केंद्र, उपकेंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर घुलनशीलता किट की मदद से कुछ ही मिनटों में बीमारी की पहचान हो जाती है। बीमारी की पुष्टि के लिए हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच कराई जाती है। सरकार ने आवश्यक दवा हाइड्रोक्सीयूरिया को राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल कर निचले स्तर तक उपलब्ध कराया है। जनजातीय इलाकों में डिजिटल ट्रैकिंग के साथ ही हाइड्रोक्सीयूरिया और फॉलिक एसिड का निशुल्क वितरण किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें- MP: पीडब्ल्यूडी ऑफिस में भड़के भाजपा विधायक, बोले- कागजों में बन रही सड़कें, जमीन पर नहीं; एसडीओ को हटाया
वाहक और पीड़ित के बीच अंतर
सिकल सेल का वाहक वह व्यक्ति होता है, जिसे माता-पिता में से किसी एक से दोषपूर्ण जीन मिलता है। ऐसा व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ जीवन जीता है, लेकिन वह इस जीन को अपने बच्चों में स्थानांतरित कर सकता है।
इसके विपरीत, पीड़ित व्यक्ति को दोनों माता-पिता से दोषपूर्ण जीन प्राप्त होता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं हंसिए के आकार की, कड़क और चिपचिपी बन जाती हैं। इससे रक्त तथा ऑक्सीजन का बहाव प्रभावित होता है, जिससे तेज दर्द, खून की कमी और अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे मरीजों को नियमित इलाज और देखभाल की जरूरत पड़ती है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी जांच अभियान के दौरान कुल 2,49,167 लोग सिकल सेल बीमारी से पीड़ित मिले हैं, जबकि 20,47,145 लोगों को इस बीमारी के वाहक के रूप में चिह्नित किया गया है। डिजिटल माध्यम से राष्ट्रीय सिकल सेल पोर्टल के जरिए इस पूरे अभियान की निगरानी की जा रही है।
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विभिन्न राज्यों में स्थिति और आंकड़े
सिकल सेल रोग से ग्रसित मरीजों की सर्वाधिक संख्या के मामले में ओडिशा शीर्ष स्थान पर है, जहां कुल 1,06,969 मरीज चिह्नित हुए हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश 40,741 मरीजों के साथ दूसरे स्थान पर है। गुजरात में 30,548 तथा महाराष्ट्र में 30,017 मरीज पाए गए हैं। दूसरी ओर, जांच प्रक्रिया के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य सबसे आगे रहा है। छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड 1.78 करोड़ से अधिक लोगों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 28,384 व्यक्ति पीड़ित पाए गए। मध्य प्रदेश में अब तक 1.33 करोड़ से अधिक लोगों की जांच हो चुकी है, जिसमें 2,45,024 व्यक्ति वाहक के रूप में पहचाने गए हैं। वर्ष 1984 में आईसीएमआर ने पहली बार मध्य प्रदेश के नर्मदा तटीय जिलों को सिकल सेल प्रभावित रेड जोन घोषित किया था।
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जांच सुविधाएं और उपचार के उपाय
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों के स्तर पर शून्य से 40 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों की मुफ्त जांच की जा रही है। आंगनबाड़ी, आशा केंद्र, उपकेंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर घुलनशीलता किट की मदद से कुछ ही मिनटों में बीमारी की पहचान हो जाती है। बीमारी की पुष्टि के लिए हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच कराई जाती है। सरकार ने आवश्यक दवा हाइड्रोक्सीयूरिया को राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल कर निचले स्तर तक उपलब्ध कराया है। जनजातीय इलाकों में डिजिटल ट्रैकिंग के साथ ही हाइड्रोक्सीयूरिया और फॉलिक एसिड का निशुल्क वितरण किया जा रहा है।
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वाहक और पीड़ित के बीच अंतर
सिकल सेल का वाहक वह व्यक्ति होता है, जिसे माता-पिता में से किसी एक से दोषपूर्ण जीन मिलता है। ऐसा व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ जीवन जीता है, लेकिन वह इस जीन को अपने बच्चों में स्थानांतरित कर सकता है।
इसके विपरीत, पीड़ित व्यक्ति को दोनों माता-पिता से दोषपूर्ण जीन प्राप्त होता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं हंसिए के आकार की, कड़क और चिपचिपी बन जाती हैं। इससे रक्त तथा ऑक्सीजन का बहाव प्रभावित होता है, जिससे तेज दर्द, खून की कमी और अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे मरीजों को नियमित इलाज और देखभाल की जरूरत पड़ती है।
