Chhatarpur News: किताबों की उम्र में सड़क-पुल-बिजली की लड़ाई, 18 घंटे बाद गांव लौटे बच्चे
15 अगस्त को महाराजपुर के टटम गांव के स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने सड़क, पुल और बिजली की मांग को लेकर करीब 18 घंटे पैदल आंदोलन किया। देर रात सर्किट हाउस में विधायक कामाख्या प्रताप सिंह से बातचीत के बाद तीन-चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने के आश्वासन पर आंदोलन समाप्त हुआ।
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विस्तार
देश जब 15 अगस्त को आजादी का पर्व मना रहा था, उसी दिन महाराजपुर क्षेत्र के टटम गांव के स्कूली बच्चे और ग्रामीण सड़क, पुल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर पैदल आंदोलन पर निकल पड़े। सुबह से शुरू हुआ यह आंदोलन करीब 18 घंटे बाद रविवार तड़के 2:30 बजे खत्म हुआ। विधायक से बातचीत के बाद ग्रामीणों को मांगें पूरी कराने का आश्वासन मिला, जिसके बाद बच्चे और ग्रामीण अपने गांव लौट गए।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर निकले बच्चे
ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर तीन प्रमुख मांगें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखीं।
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मढ़ापुरवा से टटम तक सड़क निर्माण।
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टपरन पुरवा से टटम तक पहुंचने के लिए पुल का निर्माण।
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टटम के वार्ड नंबर 20 में बिजली की सुविधा उपलब्ध कराना।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल नहीं होने के कारण बच्चों सहित ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है।
शाम 7 बजे पहुंचे महाराजपुर तहसील, नहीं मिला संतोषजनक आश्वासन
सुबह से पैदल चलने के बाद बच्चे और ग्रामीण शनिवार शाम करीब 7 बजे महाराजपुर तहसील पहुंचे। यहां अधिकारियों से अपनी मांगों को लेकर चर्चा की, लेकिन जब उन्हें संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला तो उन्होंने छतरपुर की ओर कूच करने का निर्णय लिया। तहसील से करीब एक किलोमीटर आगे महाराजपुर थाना क्षेत्र की सीमा पर उन्हें जानकारी मिली कि क्षेत्रीय विधायक कामाख्या प्रताप सिंह उनसे मिलने के लिए आ रहे हैं। इसके बाद प्रदर्शनकारी एक निजी पेट्रोल पंप पर रुक गए।
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विधायक मुर्दाबाद के नारे
इतना ही नहीं इस बीच विधायक के न पहुंचने पर ग्रामीण आंदोलनकारियों और स्कूली बच्चों ने क्षेत्रीय भाजपा विधायक कामाख्या प्रताप सिंह उर्फ टीकाराजा मुर्दाबाद के नारे भी लगाए जिनके वीडियो भी सामने आए हैं।
तेज बारिश में रात 11 बजे तक विधायक का इंतजार
तेज बारिश के बीच बच्चे और ग्रामीण करीब 3 से 4 घंटे तक विधायक का इंतजार करते रहे। रात करीब 11 बजे तक जब विधायक मौके पर नहीं पहुंचे तो उन्हें दूसरी सूचना दी गई कि विधायक ने सभी को अपने आलीपुरा स्थित घर पर बुलाया है।
विधायक के घर जाने से किया मना
ग्रामीणों और बच्चों ने विधायक के घर जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे किसी के निजी घर पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थान पर अपनी समस्याओं को लेकर बातचीत करेंगे। इसके बाद विधायक की ओर से छतरपुर आने की बात कही गई। ग्रामीणों ने भी छतरपुर के बजाय नौगांव सर्किट हाउस में बैठक करने का प्रस्ताव रखा।
रात 11:30 बजे सर्किट हाउस के लिए रवाना हुआ प्रतिनिधिमंडल
देर रात प्रशासन की ओर से वाहनों की व्यवस्था की गई। रात करीब 11:30 बजे 5-6 बच्चियां और गांव का प्रतिनिधित्व करने वाले 5-6 लोग नौगांव सर्किट हाउस के लिए रवाना हुए। उनके साथ एसडीएम, एसडीओपी और सीओ भी मौजूद रहे। रात करीब 1:30 बजे सर्किट हाउस में विधायक कामाख्या प्रताप सिंह के साथ ग्रामीणों की बातचीत हुई। करीब 18 घंटे चले आंदोलन के बाद विधायक ने उनकी मांगों पर निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया।
3-4 दिन में टेंडर, फिर शुरू होगा निर्माण: ग्रामीण
ग्रामीणों का प्रतिनिधित्व कर रहे सूरज अहिरवार ने बताया कि सर्किट हाउस में विधायक कामाख्या प्रताप सिंह से विस्तार से बातचीत हुई। विधायक ने आश्वासन दिया कि तीन से चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कराकर निर्माण कार्य की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। आश्वासन मिलने के बाद सभी प्रदर्शनकारियों को वाहनों से उनके गांव वापस भेजा गया और रविवार तड़के करीब 2:30 बजे बच्चे व ग्रामीण अपने गांव पहुंच गए।
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भीगते हुए आगे बढ़ते रहे बच्चे
आंदोलन के दौरान बच्चे और ग्रामीण बारिश में भीगते हुए महाराजपुर और गढ़ीमलहरा के बीच तक पहुंचे थे। वे छतरपुर की ओर आगे बढ़ रहे थे, लेकिन रास्ते में उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि विधायक उनसे मिलने आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे वापस नहीं लौटेंगे।
किताबों की उम्र में सुविधाओं की लड़ाई
ग्रामीणों का कहना है कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में उन्हें सड़क, पुल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए नाले और खराब रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। आजादी के पर्व पर बच्चों का यह पैदल मार्च ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से मांग उठाने के बावजूद यदि सड़क, पुल और बिजली जैसी सुविधाओं के लिए बच्चों को पैदल आंदोलन करना पड़े तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
विधायक के देर से पहुंचने पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि को आंदोलन और उनकी मांगों की जानकारी पहले से थी। इसके बावजूद विधायक का मौके पर नहीं पहुंचना और कई घंटे बाद देर रात सर्किट हाउस में मुलाकात होना जनप्रतिनिधि की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, देर रात हुई बातचीत के बाद विधायक की ओर से मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन मिलने से आंदोलन समाप्त हो गया। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि- तीन-चार दिन में टेंडर की प्रक्रिया वास्तव में शुरू होती है या नहीं और वर्षों पुरानी सड़क, पुल व बिजली की समस्या का समाधान कब तक होता है।
