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पहली बारिश में डूबा छिंदवाड़ा: एक घंटे की वर्षा ने खोली निगम की पोल, सड़कें बनीं तालाब; सीवर लाइन उफान पर
Sun, 05 Jul 2026 01:40 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 01:40 PM IST
सार
मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच छिंदवाड़ा में हुई एक घंटे की मूसलाधार बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। शहर के कई इलाकों में जलभराव, बिजली गुल और यातायात बाधित रहा। स्थानीय लोगों ने नालों पर अतिक्रमण और सफाई की कमी को इसकी मुख्य वजह बताया। तस्वीरों में देखें कैसे हालात?
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बारिश में भरा पानी, डूबी सड़कें; कुछ ऐसे बने हालात।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच रविवार सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई तेज बारिश ने छिंदवाड़ा शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी। महज एक घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश से शहर के कई हिस्से जलमग्न हो गए। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित रहा, कई मोहल्लों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई और लोगों को घरों से निकलने तक में परेशानी का सामना करना पड़ा। पहली ही तेज बारिश में नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ाती नजर आई।
शहर के लालबाग स्थित सांई मंदिर के आसपास सबसे ज्यादा खराब स्थिति देखने को मिली। यहां सड़क पर कई फीट तक पानी भर गया, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन आधे तक पानी में डूब गए। वाहन चालकों को काफी देर तक जाम और जलभराव के बीच फंसे रहना पड़ा। कई लोगों ने धक्का लगाकर अपने वाहन बाहर निकाले। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि हर साल बारिश में यही हालात बनते हैं।
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नालों पर अतिक्रमण बना सबसे बड़ी वजह
स्थानीय लोगों ने जलभराव के लिए नालों पर हुए अतिक्रमण को जिम्मेदार बताया। उनका कहना है कि वर्षों से नालों के ऊपर निर्माण और कब्जे होते रहे, जिससे उनकी चौड़ाई लगातार कम होती गई। नतीजतन बारिश का पानी तेजी से निकल नहीं पाता और कुछ ही देर में सड़कें तालाब बन जाती हैं। लोगों का आरोप है कि मानसून से पहले नगर निगम ने न तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की और न ही नालों की समुचित सफाई कराई। इसका खामियाजा अब आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
चूना गली में दुकानों तक पहुंचा पानी, व्यापार प्रभावित
छोटी बाजार स्थित चूना गली क्षेत्र में भी जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। संकरी नालियों में कचरा जमा होने के कारण बारिश का पानी तेजी से निकासी नहीं कर सका और दुकानों व मकानों के सामने भर गया। कई व्यापारियों को दुकान के अंदर पानी घुसने की आशंका के चलते सामान सुरक्षित स्थान पर रखना पड़ा। ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित रही। रहवासियों ने बताया कि बारिश के हर मौसम में यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कभी गंभीर प्रयास नहीं किए गए।
हर साल दोहराई जाती है समस्या, समाधान अब भी अधूरा
शहरवासियों का कहना है कि जलभराव की समस्या अब स्थायी रूप ले चुकी है। कई इलाकों में नालों की चौड़ाई अतिक्रमण के कारण आधी रह गई है, जबकि नियमित सफाई भी नहीं होती। नगर निगम हर साल मानसून पूर्व तैयारियों के दावे करता है, लेकिन पहली ही तेज बारिश उन दावों की पोल खोल देती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालों का चौड़ीकरण, सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ये भी पढ़ें- Shahdol News: रिश्वतखोर डॉक्टर की दो जिलों में नौकरी! लोकायुक्त कार्रवाई के बाद खुली दोहरी पोस्टिंग की परतें
राजपाल चौक पर उफनी सीवर लाइन
बारिश के दौरान शहर के प्रमुख राजपाल चौक में सीवर लाइन का ढक्कन अचानक ऊपर उठ गया। इसके बाद तेज दबाव के साथ पानी बाहर निकलने लगा और कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहगीरों और वाहन चालकों को काफी सावधानी के साथ वहां से गुजरना पड़ा। इस घटना ने करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए सीवर प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और तकनीकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सामान्य बारिश में ही सीवर लाइन जवाब दे रही है तो लगातार और तेज बारिश के दौरान हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। सीवर का गंदा पानी सड़कों पर फैलने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता चीकू पाल ने पूरे सीवर प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि पहली तेज बारिश में ही सीवर लाइन उफनने लगे तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
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शाम तक और बारिश का अलर्ट, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मौसम विभाग ने जिले में शाम तक और तेज बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नगर निगम के सामने जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने की बड़ी चुनौती है। यदि समय रहते नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाने और जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्य नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में शहर के कई हिस्सों में हालात और बिगड़ सकते हैं। पहली ही तेज बारिश ने साफ कर दिया है कि छिंदवाड़ा शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब केवल दावों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
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शहर के लालबाग स्थित सांई मंदिर के आसपास सबसे ज्यादा खराब स्थिति देखने को मिली। यहां सड़क पर कई फीट तक पानी भर गया, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन आधे तक पानी में डूब गए। वाहन चालकों को काफी देर तक जाम और जलभराव के बीच फंसे रहना पड़ा। कई लोगों ने धक्का लगाकर अपने वाहन बाहर निकाले। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि हर साल बारिश में यही हालात बनते हैं।
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नालों पर अतिक्रमण बना सबसे बड़ी वजह
स्थानीय लोगों ने जलभराव के लिए नालों पर हुए अतिक्रमण को जिम्मेदार बताया। उनका कहना है कि वर्षों से नालों के ऊपर निर्माण और कब्जे होते रहे, जिससे उनकी चौड़ाई लगातार कम होती गई। नतीजतन बारिश का पानी तेजी से निकल नहीं पाता और कुछ ही देर में सड़कें तालाब बन जाती हैं। लोगों का आरोप है कि मानसून से पहले नगर निगम ने न तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की और न ही नालों की समुचित सफाई कराई। इसका खामियाजा अब आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
चूना गली में दुकानों तक पहुंचा पानी, व्यापार प्रभावित
छोटी बाजार स्थित चूना गली क्षेत्र में भी जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। संकरी नालियों में कचरा जमा होने के कारण बारिश का पानी तेजी से निकासी नहीं कर सका और दुकानों व मकानों के सामने भर गया। कई व्यापारियों को दुकान के अंदर पानी घुसने की आशंका के चलते सामान सुरक्षित स्थान पर रखना पड़ा। ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित रही। रहवासियों ने बताया कि बारिश के हर मौसम में यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कभी गंभीर प्रयास नहीं किए गए।
हर साल दोहराई जाती है समस्या, समाधान अब भी अधूरा
शहरवासियों का कहना है कि जलभराव की समस्या अब स्थायी रूप ले चुकी है। कई इलाकों में नालों की चौड़ाई अतिक्रमण के कारण आधी रह गई है, जबकि नियमित सफाई भी नहीं होती। नगर निगम हर साल मानसून पूर्व तैयारियों के दावे करता है, लेकिन पहली ही तेज बारिश उन दावों की पोल खोल देती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालों का चौड़ीकरण, सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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राजपाल चौक पर उफनी सीवर लाइन
बारिश के दौरान शहर के प्रमुख राजपाल चौक में सीवर लाइन का ढक्कन अचानक ऊपर उठ गया। इसके बाद तेज दबाव के साथ पानी बाहर निकलने लगा और कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहगीरों और वाहन चालकों को काफी सावधानी के साथ वहां से गुजरना पड़ा। इस घटना ने करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए सीवर प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और तकनीकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सामान्य बारिश में ही सीवर लाइन जवाब दे रही है तो लगातार और तेज बारिश के दौरान हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। सीवर का गंदा पानी सड़कों पर फैलने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता चीकू पाल ने पूरे सीवर प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि पहली तेज बारिश में ही सीवर लाइन उफनने लगे तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
ये भी पढ़ें- Shahdol News: रिश्वतखोर डॉक्टर की दो जिलों में नौकरी! लोकायुक्त कार्रवाई के बाद खुली दोहरी पोस्टिंग की परतें
शाम तक और बारिश का अलर्ट, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मौसम विभाग ने जिले में शाम तक और तेज बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नगर निगम के सामने जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने की बड़ी चुनौती है। यदि समय रहते नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाने और जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्य नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में शहर के कई हिस्सों में हालात और बिगड़ सकते हैं। पहली ही तेज बारिश ने साफ कर दिया है कि छिंदवाड़ा शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब केवल दावों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
