भगवान हनुमान का जन्मोत्सव जिलेभर में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बलवारी हनुमान मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऊंची-नीची पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित इस प्राचीन और चमत्कारी मंदिर में विराजमान 12 फीट ऊंची हनुमानजी की प्रतिमा अपनी अनूठी विशेषता के कारण आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह विशाल प्रतिमा पिछले 900 वर्षों से बिना किसी सहारे के खड़ी है।
Dhar News: 900 साल से बिना किसी सहारे के खड़ी है हनुमान जी की प्रतिमा, जन्मोत्सव पर पहनाया गया हीरे का मुकुट
Dhar News: धार के बलवारी हनुमान मंदिर में स्थित 12 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा 900 वर्षों से बिना सहारे के खड़ी है, जिसे भक्त चमत्कारी मानते हैं। हनुमान जयंती पर विशेष श्रृंगार, हीरे का मुकुट, यज्ञ, सुंदरकांड पाठ और सात दिवसीय मेले के साथ बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन किया जा रहा है।
अमेरिकी डायमंड से तैयार पहनाया गया विशेष मुकुट
भक्त इसे चमत्कार मानते हैं और विश्वास करते हैं कि यहां दर्शन मात्र से ही संकट दूर हो जाते हैं। आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ राजनेता भी यहां अपनी अर्जी लगाने पहुंचते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त दोबारा आकर मन्नत उतारते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष रूप से भारी भीड़ रहती है। हनुमान जयंती के अवसर पर प्रतिमा को अमेरिकी डायमंड से तैयार विशेष मुकुट पहनाया गया। भगवान के हाथ में तंदुरा और झांझ भी सजाए गए, जिससे वे राम नाम का कीर्तन करते हुए भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। सुबह 5 बजे से ही हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना और चोला चढ़ाने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं।
तीन अवस्थाओं में होते हैं दर्शन
मंदिर के पुजारी निरंजनदास वैष्णव महंत ने बताया कि उनका परिवार सन् 1126 से मंदिर की सेवा कर रहा है। यह उनकी 35वीं पीढ़ी है, जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। उनके अनुसार, यह प्रतिमा पांडवकालीन मानी जाती है और हजारों वर्षों से यहां स्थापित है। इस प्रतिमा की एक विशेषता यह भी है कि भक्तों को एक ही दिन में तीन रूपों में दर्शन होते हैं। प्रातःकाल में बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था के रूप में। प्रतिमा के बाएं पैर के नीचे अहिरावण की आराध्य देवी भी विराजमान हैं।
तीन दिवसीय यज्ञ का आयोजन
मंदिर में तीन दिवसीय यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसकी पूर्णाहुति सुबह 7 बजे आरती के बाद हुई। पौष माह के दौरान यहां विशेष मेला भी लगता है, जिसमें श्रद्धालु तिल का तेल चढ़ाकर मनोकामनाएं मांगते हैं। करीब एक महीने तक चलने वाले इस मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और खरीदारी का आनंद भी लेते हैं।
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