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MP News: गुना में टीचर बनने के लिए बन गए दिव्यांग, जांच में पोल खुली तो गई नौकरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना Published by: अरविंद कुमार Updated Sat, 17 Jun 2023 09:38 PM IST
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सार

गुना जिले के प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। शिक्षक का कसूर यह था कि उसने इस नौकरी को पाने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट लगा दिया था। इस फर्जी सर्टिफिकेट का खुलासा कागजों की जांच के दौरान हुआ, जिसके बाद शिक्षक को नौकरी से निकाल दिया गया है। इसके आदेश जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी कर दिए हैं।
 

MP News Divyang became to become teacher in Guna investigation revealed the job
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में आवेदकों ने फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र लगा दिया। इसमें सबसे ज्यादा चयनित आवेदक मुरैना जिले के थे। अब ऐसे ही एक शिक्षक को गुना में नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। उसने फर्जी विकलांगता सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी हासिल की थी। गुरुवार को जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी कर उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

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दरअसल, ये सारा खेल विकलांगता के फर्जी सर्टिफिकेट से रचा गया है। कर्मचारी चयन मंडल मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक पद की पात्रता परीक्षा में मुरैना जिले के जौरा ब्लॉक के गुर्जना गांव में रहने वाले दीपक शर्मा की नियुक्ति प्राथमिक शिक्षक के पद पर हुई थी। उन्हें गुना जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय मनोरापुरा में नियुक्ति मिली थी। उनके द्वारा मुरैना जिले का विकलांगता सर्टिफिकेट लगाया गया था। इसकी जांच मुरैना कलेक्टर से कराई गई। जांच के दौरान पता चला कि उनका दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी है। सरकार ने ऐसे 80 लोगों पर मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। इनमें से 77 की रिपोर्ट आ चुकी है। ओवरराइटिंग वाले तीन प्रमाण पत्रों की जांच जारी है।
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18 हजार शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा मामला...
कर्मचारी चयन मंडल ने प्राथमिक शिक्षक के 18 हजार पदों के लिए पात्रता परीक्षा कराई थी। इसमें 1086 पद दिव्यांगों के लिए आरक्षित थे। परिणाम के आधार पर 755 पदों पर आवेदकों का चयन हुआ है। चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से 450 दिव्यांग टीचर सिर्फ मुरैना जिले से चुने गए हैं। एक जिले से इतनी संख्या में दिव्यांग टीचर बनने का मामला सामने आने के बाद से ही सवाल उठने लगे थे। दिव्यांगों ने इस मामले में आयुक्त नि:शक्तजन कल्याण संदीप रजक से शिकायत की थी। उन्होंने आयुक्त लोक शिक्षण एवं आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग को नोटिस जारी कर दिव्यांग कोटे से चयनित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए थे।

भर्ती परीक्षा में सबसे अधिक मुरैना जिले के 450 आवेदकों का चयन हुआ था। दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई तो इनमें से 80 के प्रमाण पत्र संदिग्ध मिले। जांच के बाद 77 के फर्जी होने की पुष्टि हुई। इनमें से 60 स्कूल शिक्षा विभाग और 17 जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ थे। सभी के दिव्यांग प्रमाण पत्रपर विशेषज्ञ चिकित्सक, सिविल सर्जन की सील लगाई गई है। तीन प्रमाण पत्रों पर ओवरराइटिंग की गई है, जिनकी रिपोर्ट आना बाकी है।

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