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Indore News: 10 करोड़ के लोन का झांसा देकर 1 करोड़ ठगे, फिर कोर्ट ने वापस दिलाई पूरी रकम

Tue, 21 Jul 2026 08:40 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Tue, 21 Jul 2026 08:40 PM IST
सार

इंदौर जिला कोर्ट के आदेश के बाद बैंक ने पीड़ित कारोबारी को पूरे 1 करोड़ रुपए ऑनलाइन वापस ट्रांसफर कर दिए हैं, जो साइबर अपराध के मामलों में दिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है। 

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INDORE NEWS - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

इंदौर के एक बड़े कारोबारी से 10 करोड़ रुपए का लोन दिलाने का झांसा देकर 1 करोड़ रुपए की ठगी हो गई। अब इस मामले में जिला कोर्ट के आदेश पर पीड़ित को पूरी राशि वापस मिल गई है। कोर्ट के निर्देश के बाद बैंक ने आरोपियों के खातों में फ्रीज किए गए 1 करोड़ रुपए कारोबारी के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। साइबर ठगी के मामले में इतनी बड़ी राशि की वापसी इंदौर जिला कोर्ट में अपने तरह का अहम मामला माना जा रहा है।
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चेन्नई की कंपनी के प्रतिनिधियों ने किया था संपर्क
दरअसल, कारोबारी को अपने व्यवसाय के लिए 10 करोड़ रुपए के लोन की जरूरत थी। उसने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों में आवेदन किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान चेन्नई की एक कंपनी के प्रतिनिधियों ने संपर्क कर 10 करोड़ रुपए का लोन दिलाने का दावा किया। आरोपियों ने जरूरी दस्तावेज मंगवाकर कारोबारी को चेन्नई बुलाया। वहां भरोसा जीतने के लिए 10 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) दिखाया और लोन मंजूर होने का दावा करते हुए कई दस्तावेजों, चेक और स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर करवा लिए।
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प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ऐंठे 1 करोड़ रुपए
आरोपियों ने प्रोसेसिंग फीस, ब्याज, रजिस्ट्रेशन और अन्य बैंकिंग औपचारिकताओं का हवाला देकर करीब 1 करोड़ रुपए जमा करवा लिए। रकम मिलते ही डिमांड ड्राफ्ट वापस ले लिया गया और लोन जारी करने के नाम पर टालमटोल शुरू हो गई। लंबे समय तक रकम नहीं मिलने पर कारोबारी को ठगी का अहसास हुआ।

वीडियो कॉल पर दिखाए 10 करोड़ रुपए कैश और फिर मांगे 20 लाख रुपए
पीड़ित के अधिवक्ता रोहित जैन ने बताया कि ठगों ने भरोसा बढ़ाने के लिए एक और चाल चली। वे चेन्नई से इंदौर आए और वीडियो कॉल पर 10 करोड़ रुपए नकद होने का दावा किया। आरोपियों ने कहा कि यदि कारोबारी 20 लाख रुपए और दे दे, तो उसे पूरा लोन नकद दे दिया जाएगा। हालांकि इस बार कारोबारी को संदेह हो गया। उसे लगा कि पहले की तरह यह रकम भी डूब सकती है। उसने अतिरिक्त भुगतान करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद आरोपी इंदौर से फरार हो गए।

210 किलो नोटों का वजन बताकर किया गुमराह
ठगों ने कारोबारी को झांसे में लेने के लिए नकदी का वजन तक समझाया। उन्होंने बताया कि 500 रुपए के नोटों में 1 करोड़ रुपए का बंडल करीब 21 किलो का होता है, इसलिए 10 करोड़ रुपए की नकदी का वजन लगभग 210 किलो है। इसी आधार पर उन्होंने दावा किया कि पूरी रकम उनके पास मौजूद है और अतिरिक्त 20 लाख रुपए मिलते ही नकद लोन दे दिया जाएगा।

महिला समेत 10 लोगों का संगठित गिरोह
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस फर्जीवाड़े में 9 से 10 लोगों का गिरोह शामिल है। इनमें एक महिला, खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताने वाला व्यक्ति और कई अन्य सदस्य शामिल हैं। कुछ आरोपी कारोबारी से चेन्नई में मिले, जबकि कुछ उसके ऑफिस और व्यवसाय से जुड़ी जानकारी जुटाने पहुंचे थे।

साइबर सेल ने खाते कराए फ्रीज
ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने अधिवक्ता रोहित जैन के माध्यम से क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और पलासिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान साइबर सेल ने आरोपियों के बैंक खातों में मौजूद 1 करोड़ रुपए फ्रीज करा दिए। हालांकि रकम फ्रीज होने के बाद भी उसे वापस प्राप्त करने के लिए कारोबारी को जिला कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।


कोर्ट के आदेश पर लौटी पूरी राशि
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का अवलोकन कर माना कि कारोबारी के साथ लोन के नाम पर धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद 9 जुलाई को जिला कोर्ट ने एक्सिस बैंक को 10 दिनों के भीतर फ्रीज की गई राशि पीड़ित के खाते में जमा कराने के निर्देश दिए। बैंक ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए 18 जुलाई को पूरी 1 करोड़ रुपए की राशि कारोबारी के खाते में ट्रांसफर कर दी। इससे पीड़ित को बड़ी राहत मिली।

साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए बनी बड़ी मिसाल
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की रकम वापस मिलना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि पैसा कई खातों में ट्रांसफर हो जाता है और रिकवरी लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझ जाती है। ऐसे में कोर्ट के आदेश से इतनी बड़ी राशि की वापसी साइबर अपराध के पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल मानी जा रही है। समय रहते शिकायत दर्ज होने और आरोपियों के खाते फ्रीज होने से पीड़ित की पूरी रकम बचाई जा सकी।
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